नागपुर मनपा की पुरानी इमारत की सफाई के नाम पर 10 लाख खर्च, स्थायी समिति में हंगामा, सदस्यों ने जताई नाराजगी

NMC Old Building Cleaning Dispute: नागपुर मनपा मुख्यालय की डीप क्लीनिंग पर ₹10 लाख खर्च करने को लेकर स्थायी समिति में तीखा हंगामा हुआ। सभापति की आपत्तियों के बाद भी प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया।
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NMC Spent Rs 10 lakh On Cleaning Old Building : नागपुर मनपा की स्थायी समिति की शुक्रवार को हुई बैठक में पुराने मनपा मुख्यालय की इमारत की साफ-सफाई और मरम्मत के नाम पर किए गए करीब 10 लाख रुपये के खर्च को लेकर तीखे सवाल उठाए गए। बैठक में विपक्षी सदस्यों ने कुछ वैधानिक मुद्दों को लेकर वॉक-आउट किया, वहीं डीप क्लीनिंग के खर्च का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में रहा। सदस्यों ने खर्च को जरूरत से अधिक बताते हुए प्रशासन से इसके औचित्य पर स्पष्टीकरण मांगा। हालांकि, चर्चा और आपत्तियों के बावजूद संबंधित खर्च को मंजूरी दे दी गई।

स्थायी समिति सभापति शिवानी दाणी ने भी खर्च पर जताई आपत्ति

बैठक में स्थायी समिति सभापति शिवानी दाणी ने भी इस तरह के खर्च पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि केवल डीप क्लीनिंग के नाम पर इतनी बड़ी राशि खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ी। प्रशासन की ओर से बताया गया कि डीप क्लीनिंग के तहत दीवारों की घिसाई, फर्श की सफाई और फर्नीचर की सफाई जैसे काम किए गए हैं।

10 लाख के खर्च पर सदस्यों ने उठाए सवाल

इस स्पष्टीकरण पर भी सदस्यों ने सवाल उठाया। उनका कहना था कि डीप क्लीनिंग में सामान्य तौर पर फ्लोर क्लीनिंग मशीनों सहित आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में इन कार्यों पर करीब 10 लाख रुपये का खर्च कैसे आया, इसका विस्तृत हिसाब सामने रखा जाना चाहिए।

e.g 9.99 लाख. 10 लाख से कम की फाइलें क्यों?

चर्चा के दौरान सभापति शिवानी दाणी ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने प्रशासन से पूछा कि कई मामलों में काम की फाइलें 10 लाख रुपये की सीमा से ठीक नीचे, जैसे 9.99 लाख, 9.61 लाख या 9.97 लाख रुपये की ही क्यों तैयार की जा रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि 5 या 6 लाख रुपये जैसी सामान्य राशि की फाइलें इतनी कम क्यों दिखाई देती हैं।

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि तत्काल काम कराने के नाम पर बड़े कार्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर मंजूर कराने की कोशिश तो नहीं की जा रही। सदस्यों की ओर से आशंका जताई गई कि ऐसा होने पर काम अनिवार्य ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के दायरे से बाहर रह सकता है।

स्थायी समिति की बैठक में उठे सवालों के जवाब अधुरे

स्थायी समिति की बैठक में उठे इन सवालों के बाद प्रशासन के सामने खर्च की प्रक्रिया और कार्यों की वास्तविक लागत को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण देने की जरूरत सामने आई है। हालांकि, संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से विवाद फिलहाल खत्म नहीं हुआ है और आने वाली बैठकों में यह मुद्दा फिर उठने की संभावना है।

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