नया नागपुर प्रोजेक्ट या किसानों से धोखा? 1710 एकड़ जमीन पर अधिग्रहण का सस्पेंस, अधर में लटका हजारों का भविष्य
हिंगना क्षेत्र में नया नागपुर परियोजना को लेकर किसानों में चिंता और असंतोष बढ़ रहा है। भूमि अधिग्रहण पर असमंजस।
New Nagpur Project Hingna Land Acquisition: महाराष्ट्र की उपराजधानी के पास प्रस्तावित ‘नया नागपुर’ (New Nagpur Project) योजना अब विकास के वादों से ज्यादा विवादों के घेरे में सिमटती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर हिंगना क्षेत्र के किसानों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। आलम यह है कि करोड़ों की लागत वाली यह योजना फिलहाल केवल सरकारी कागजों और फाइलों तक ही सीमित है, जबकि जमीन पर किसान अपनी आजीविका को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
1,710 एकड़ उपजाऊ जमीन पर ‘आरक्षण’ की तलवार
परियोजना के तहत लाडगांव, रिठी और गोधनी रिठी क्षेत्रों की लगभग 1,710 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि को आरक्षित किया गया है। किसानों का कहना है कि यह जमीन उनकी पहचान और कमाई का इकलौता जरिया है। शुरुआत से ही भू-अधिग्रहण का कड़ा विरोध कर रहे किसानों का स्पष्ट कहना है कि वे किसी भी कीमत पर घाटे का सौदा नहीं करेंगे।
मुआवजे का गणित: वादे बनाम हकीकत
किसानों की मांग बेहद स्पष्ट है। बाजार मूल्य का 5 गुना मुआवजा और प्रति एकड़ 2,000 वर्ग मीटर का विकसित प्लॉट मिलना चाहिए। हालांकि, पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने पुराने रेडी रेकनर के आधार पर प्रति एकड़ 1.57 करोड़ रुपये और 1,500 वर्ग फुट प्लॉट देने का आश्वासन दिया था। इस आश्वासन के बाद कुछ स्तर पर सर्वेक्षण तो हुए, लेकिन उसके बाद सरकार की ओर से कोई ठोस हलचल नहीं दिखी। किसानों का आरोप है कि उन्हें अधूरी जानकारी देकर भ्रमित किया जा रहा है और समय पर स्पष्टता न होने से उनका नुकसान हो रहा है।
सम्बंधित ख़बरें
सांगली हत्याकांड के मुख्य गवाह की हत्या, कर्नाटक में मिली लाश; शिंदे गुट के पदाधिकारी समेत 3 गिरफ्तार
शरद पवार गुट के नेता विकास लवांडे पर जानलेवा हमला, स्याही फेंककर दी जान से मारने की धमकी, VIDEO वायरल
Amravati Division 10th Result: बुलढाणा जिला रहा अव्वल, बेटियों ने फिर गाड़े सफलता के झंडे
Chandrapur SSC Result: पोंभुर्णा तहसील जिले में अव्वल, 81 स्कूलों का 100% रिजल्ट
खेती पर संकट: गुड़ी पड़वा और नया सीजन
मराठी नववर्ष यानी गुड़ी पड़वा के साथ ही नए कृषि सत्र की तैयारी शुरू हो जाती है। लेकिन भूमि अधिग्रहण के असमंजस ने किसानों के हाथ बांध दिए हैं। किसान दुविधा में हैं कि वे नई फसल के लिए बीज और खाद खरीदें या नहीं? मजदूरों की व्यवस्था और पशुओं की खरीद-बिक्री जैसे जरूरी काम ठप पड़े हैं। अगर सरकार जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं करती, तो किसानों को भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ सकता है।
चेतावनी: ‘जमीन खाली नहीं करेंगे’
हिंगना के किसानों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द ही निर्णय नहीं लेती, तो वे अपनी जमीन पर स्वतंत्र रूप से खेती जारी रखेंगे और किसी भी सरकारी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेंगे। किसानों ने यह भी सुझाव दिया है कि यदि सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं कर सकती, तो इस परियोजना को किसी अन्य बंजर स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाए।
