अदाणी पावर की बड़ी जीत: NCLAT ने विदर्भ इंडस्ट्रीज अधिग्रहण पर लगाई मुहर, विरोध की याचिकाएं खारिज

Maharashtra News: NCLAT ने विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर के लिए अदाणी पावर की ₹4,000 करोड़ की समाधान योजना को हरी झंडी दे दी है। न्यायाधिकरण ने विरोधियों की आपत्तियों को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया।
Adani Power Vidarbha Industries Acquisition
गौतम अडानी (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Adani Power Vidarbha Industries Acquisition: कॉर्पोरेट जगत की बड़ी हलचल में, राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (NCLAT) ने अदाणी पावर लिमिटेड द्वारा विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर के अधिग्रहण के फैसले को बरकरार रखा है। ट्रिब्यूनल ने साफ किया कि अदाणी समूह की ₹4,000 करोड़ की बोली पूरी तरह संवैधानिक और IBC नियमों के दायरे में है।

अदाणी समूह के पक्ष में कानूनी फैसला

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (NCLAT) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुंबई एनसीएलटी (NCLT) के उस आदेश की पुष्टि की है, जिसमें विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर लिमिटेड के लिए अदाणी पावर की समाधान योजना को मंजूरी दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समाधान प्रक्रिया में किसी भी कानूनी प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं हुआ है। इस फैसले के बाद अब विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर के अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है, जो अदाणी पावर की ऊर्जा क्षमता को और मजबूती प्रदान करेगा।

विरोधियों की याचिकाएं हुईं खारिज

जस्टिस की दो सदस्यीय पीठ ने वेस्टर्न कोलफील्ड्स और विदर्भ इंडस्ट्रीज के एक कर्मचारी प्रदीप सोत द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। इन याचिकाओं में अदाणी पावर की योजना को चुनौती दी गई थी। हालांकि, NCLAT ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों में कोई ठोस आधार नहीं है और यह दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करती है।

कानूनी प्रक्रिया और CoC की भूमिका

अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि अदाणी पावर की योजना सभी वैधानिक आवश्यकताओं को पूरा करती है। लेनदारों की समिति (CoC) ने व्यावसायिक बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए निष्पक्ष और कानूनी तरीके से इस पर निर्णय लिया है। कोर्ट के अनुसार, "प्रतिवादी संख्या 2 (अदाणी पावर) की योजना में हस्तक्षेप करने का कोई वैध कारण मौजूद नहीं है।"

समय सीमा और तकनीकी आपत्तियों का खंडन

सुनवाई के दौरान वेस्टर्न कोलफील्ड्स के वकीलों ने तर्क दिया था कि CoC ने 180 दिनों की निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद योजना को मंजूरी दी। हालांकि, अदाणी पावर के कानूनी प्रतिनिधियों ने इन दावों का पुरजोर खंडन किया। उन्होंने दलील दी कि पूरी प्रक्रिया IBC की धारा 30(2) के तहत संपन्न हुई है और इसे पहले ही एनसीएलटी से संवैधानिक मंजूरी मिल चुकी थी।

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