

Nagpur Municipal Corporation: नागपुर शहर के पॉश इलाके सिविल लाइंस स्थित रवींद्रनाथ टैगोर मार्ग पर मौजूद 5 मंजिला व्यावसायिक इमारत को सील करने का आधिकारिक आदेश जारी होते ही सिटी में ऐसी इमारतों पर गाज गिरने की संभावनाएं जताई जा रही थीं किंतु हमेशा की तरह मनपा की कार्यप्रणाली इस बार भी 'ढाक के तीन पात' ही रही।
आश्चर्यजनक यह कि अग्निशमन कानून और महाराष्ट्र रीजनल टाउन प्लानिंग के नियमों की अनदेखी करने वाले नानकिंग बिल्डिंग को तमाम विभागों की उपस्थिति में पहले सील कर दिया गया किंतु 3 दिन में ही यहां 'खुल जा सिम-सिम' का नजारा देखा गया। पहले सील और बाद में रेस्टोरेंट की इमारत खुली दिखाई देने पर मनपा की कार्यप्रणाली को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का सिलसिला शुरू हो गया, जिसमें अवैध इमारतों के खिलाफ कौन कार्रवाई करेगा, इसे लेकर भी सवाल उठने लगे।
उल्लेखनीय है कि अग्निशमन विभाग की ओर से इमारत को सील किए जाने के बाद दूसरी इमारत पर स्थित मेसर्स रामटेके एसोसिएट्स के मालिक सुरेश रामटेके की ओर से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। उन्होंने अपनी दलील में मनपा की कार्रवाई को एकतरफा और गैरकानूनी करार दिया किंतु मनपा के वकील द्वारा रखे गए सबूतों को देखने के बाद हाई कोर्ट ने सिरे से याचिका खारिज कर दी।
यहां तक कि मनपा को नियमों के अनुसार कार्रवाई करने को भी कहा। आलम यह है कि इस इमारत को 2024 में ही नोटिस जारी किए गए थे। बिल्डर ने इस इमारत के लिए पहले आवासीय नक्शा मंजूर कराया था किंतु बाद में इस पूरी इमारत का व्यावसायिक उपयोग शुरू हुआ।
यहां तक कि 2 फ्लोर पर रेस्टोरेंट शुरू किया गया। आवासीय उपयोग का नक्शा और व्यावसायिक उपयोग होने से वैसे ही इमारत अवैध हो गई थी। यहां तक कि अग्निशमन रोकथाम के उपाय नहीं होने से इमारत को खतरनाक घोषित किया गया था।
हाल ही में अग्निशमन विभाग की ओर से ही आवासीय नक्शा मंजूर कर बाद में व्यावसायिक उपयोग होने का खुलासा करते हुए 500 बहुमंजिला इमारतों का आंकड़ा उजागर किया गया था। इस तरह के दुरुपयोग से न केवल ऐसी इमारतों में जाने वाले लोगों की जान खतरे में है, बल्कि मनपा के राजस्व को भी चूना लग रहा है। नानकिंग रेस्टोरेंट की बिल्डिंग में न केवल इमारत का उपयोग बदला गया, बल्कि चौथी मंजिल में स्वयं बिल्डर ने अवैध निर्माण किया हुआ है किंतु अवैध निर्माण पर अब तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई।
सुरक्षा को खतरे में देखते हुए विभाग ने इससे पहले भी कई बार चेतावनी दी थी। 27 नवंबर 2024 को इमारत को खाली करने का नोटिस जारी किया गया था और बाद में 3 जुलाई 2025 को इमारत की बिजली और पानी की आपूर्ति काटने का निर्देश भी दिया गया था।
आदेश के बावजूद इमारत का उपयोग जारी रहा जिससे हाल ही में इमारत को सील कर दिया गया। अब इमारत में अग्निशमन उपाय करने के लिए फिर से सील खोल दिया गया।
सील खुलते ही इमारत का उपयोग पहले जैसे शुरू हो गया है। बताया जाता है कि अग्निशमन विभाग द्वारा अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के बाद दूसरे विभागों की ओर से कार्रवाई की जानी चाहिए थी किंतु अब कार्रवाई ठप पड़ी है।
हालांकि 3 वर्ष के प्रशासक काल में कई तरह की धांधली होने का आरोप करते हुए सत्ता पक्ष ने प्रशासन पर निशाना साधा था, लेकिन अब सत्ता पक्ष स्वयं इस तरह की धांधली की नौटंकी देख रहा है।