जान पर खेलकर पूरा किया खतरनाक मिशन: सिक्किम सुरंग हादसे में नागपुर WCL की रेस्क्यू टीम ने 25 शव निकाले बाहर
NHPC Tunnel Rescue: सिक्किम की NHPC सुरंग में हुए हादसे के बाद वेकोलि की 14 सदस्यीय रेस्क्यू टीम ने जान जोखिम में डालकर बचाव अभियान चलाया व दमघोंटू सुरंग से शवों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।
- Written By: अंकिता पटेल
वेकोलि रेस्क्यू टीम, सिक्किम सुरंग हादसा,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
WCL Rescue Operation: सिक्किम के नामची जिले में नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रक पावर कॉर्पोरेशन (एनएचपीसी) की सुरंग में सोमवार को संदिग्ध मीथेन गैस विस्फोट हुआ था। इस हादसे में जान गंवाने वाले 25 लोगों के शवों को बाहर निकालने के लिए वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) की 14 सदस्यीय रेस्क्यू टीम ने अपनी जान की बाजी लगा दी।
अंधेरी और दमघोंटू सुरंग में एक किलोमीटर से अधिक कीचड़ से गुजरते हुए टीम ने हर एक सांस को गिनकर यह खतरनाक अभियान पूरा किया। टीम के लीडर बिसेन शुक्रवार को वापस आ गए, जबकि टीम के बाकी लोग शनिवार को वापस आएंगे।
भेजी गई विशेष फ्लाइट
टीम की एक्सर्टिज देखकर एनएचपीसी के अधिकारियों ने विशेष विमान की व्यवस्था की और टीम को यहां से एयरलिफ्ट किया गया। टीम में वेकोलि मुख्यालय, सास्ती, गोकुल, सावनेर, पाटनसावंगी, सिल्लेवाड़ा, मकरधोकड़ा माइन के जानकारों को शामिल किया गया था।
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समय की पाबंदी के बीच मुकाबला
बिसेन ने बताया कि सुरंग पूरी तरह से गैस चैंबर में तब्दील हो चुकी थी और शव अंदर 2 किलोमीटर से अधिक दूरी पर पड़े थे। ऐसे खतरनाक और जहरीले माहौल में सिर्फ कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनियों के पास ही लंबे समय तक ऑक्सीजन देने वाले विशेष गैस प्रोटेक्शन किट होते हैं।
इस किट को एक बार चालू करने पर ऑक्सीजन केवल 2 घंटे ही चलती है जिससे यह टीम के लिए समय के खिलाफ एक बड़ी दौड़ बन गई थी। रेस्क्यू टीम के पास हर रोज केवल 2 घंटे का समय होता था। इसमें से डेढ़ घंटा शवों को तलाशने और उन्हें स्ट्रेचर पर लाने में खर्च होता था जबकि आधा घंटा सुरक्षित दूरी पर खड़ी गाड़ी तक वापस लौटने के लिए बचता था।
पहले भी दिखाया है पराक्रम
प्रशिक्षण के दौरान नियमित रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले इन रेस्क्यू किटों का नामची में वास्तविक उपयोग किया गया। वेकोलि की यह टीम इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित है।
वेकोलि रेस्क्यू टीम, सिक्किम सुरंग हादसा,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
इससे पहले 2023 में उत्तरकाशी के सिलवयारा सुरंग हादसे में फसे 41 मजदूरों को बचाने के लिए चलाए गए अभियान में भी वेकोलि की टीम शामिल रही है। इसके अलावा निजी खदानों की आग की घटनाओं में भी यह टीम अपनी सेवाएं दे चुकी है।
कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन
टीम सुरंग के अंदर एक किलोमीटर तक गाड़ियों से गई और बाकी की दूरी पैदल तय की, उस जगह पर गैस इतनी अधिक थी कि यदि डीजल गाड़ी को और आगे ले जाया जाता तो एक और बड़ा विस्फोट हो सकता था।
अंदर भारी कीचड़ था और शव उसी कीचड़ के नीचे दबे हुए थे। कुछ शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुके थे। ऐसे में टीम ने भारी हिम्मत दिखाते हुए शवों को स्ट्रेचर पर रखा और पैदल चलकर वहां तक लाए जहां गाड़ियां खड़ी थी।
‘साहिब’ और टीम के अनुभव की कहानी
WCL के सुरक्षा महाप्रबंधक दिनेश बिसेन ने खुद इस 14 सदस्यीय टीम का नेतृत्व किया। उन्होंने बाहर आने के बाद अपनी आपबीती सुनाई। बिसेन ने बताया कि हमारा काम लोगों की जान बचाना होता है लेकिन इस बार हमें शवों को बाहर निकालना था।
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यह भावनात्मक रूप से भी बेहद चुनौतीपूर्ण काम था लेकिन आखिरकार हमने इसे कर दिखाया। वेकोलि के सीएमडी हेमंत शरद पांडे ने इस कार्य के लिए काफी मदद की और हर जरूरी सुविधा -समय पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया।
