

Vidarbha Hockey Association:विदर्भ हॉकी एसोसिएशन (वीएचए) को अमरावती रोड स्थित हॉकी मैदान के मामले में बड़ा झटका लगा है। अपर विभागीय आयुक्त, नागपुर विभाग ने महाराष्ट्र जमीन राजस्व संहिता, 1966 की धारा 247 के तहत दायर वीएचए की अपील खारिज करते हुए कलेक्टर के उस आदेश को कायम रखा है जिसमें सरकारी नजूल जमीन का भाड़ेपट्टा रद्द कर जमीन शासन के कब्जे में लेने का आदेश दिया गया था। 28 सितंबर को पारित इस आदेश के साथ 3.80 हेक्टेयर जमीन को लेकर वीएचए की अपील फिलहाल खारिज हो गई है।
अमरावती रोड स्थित मौजा गाडगा, तहसील व जिला नागपुर स्थित खसरा क्रमांक 65/5, नगर भूमापन क्रमांक 277 और 3.80 हेक्टेयर क्षेत्रफल की यह सरकारी नजूल जमीन हॉकी के विकास और सार्वजनिक खेल सुविधाओं के निर्माण के उद्देश्य से विदर्भ हॉकी एसोसिएशन को भाडेपट्टे पर दी गई थी। रिकॉर्ड के अनुसार यह भाडेपट्टा वर्ष 1962 से अस्तित्व में है और 24 सितंबर 2007 के नवीनीकरण करार के जरिए इसे 23 सितंबर 2037 तक बढ़ाया गया था। नवीनीकरण के बावजूद मूल भाडेपट्टे की शर्ते लागू रहने की बात भी करार में दर्ज है।
कलेक्टर कार्यालय की नजूल शाखा ने मैदान की स्थिति को लेकर रिपोर्ट मंगाई थी। जिला खेल अधिकारी द्वारा 15 जून 2026 को प्रस्तुत निरीक्षण रिपोर्ट में मैदान की स्थिति पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार- मैदान की देखभाल संतोषजनक नहीं थी और जगह-जगह मिट्टी, पत्थर व विरल घास दिखाई दी। हॉकी के लिए आवश्यक समतल खेल सतह उपलब्ध नहीं थी। प्राकृतिक अथवा कृत्रिम टर्फ की सुविधा नहीं थी।
मैदान के किनारों पर झाडियां, बढ़ी हुई वनस्पति और गंदगी मिली। खुली नालियां और टूटे हुए स्लैब पाए गए जिससे खिलाड़ियों को चोट लगने की आशंका जताई गई। बैठने की व्यवस्था पुरानी और अपर्याप्त बताई गई। गोलपोस्ट, मैदान की मार्किंग, ड्रेनेज, चेंजिग रूम, शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। मैदान की नियमित और गुणवत्तापूर्ण देखभाल नहीं होने का निष्कर्ष निकाला गया।
अपर विभागीय आयुक्त ने रिकॉर्ड, जिलाधिकारी का आदेश, निरीक्षण रिपोर्ट, भाडेपट्टा करार, वीएचए का जवाब और न्यायालयीन कार्यवाही को एक साथ देखते हुए जिलाधिकारी के निष्कर्षों से सहमति जताई। आदेश में कहा कि केवल संस्था का पंजीकृत होना उसे सरकारी नजूल जमीन से जुड़े भाडेपट्टे की स्वतंत्र शर्तों के पालन से मुक्त नहीं करता। जमीन जिस विशिष्ट सार्वजनिक क्रीड़ा उद्देश्य के लिए दी गई है, उस उद्देश्य के अनुरूप उसका उपयोग और आवश्यक रखरखाव करना भाड़ेपट्टाधारक की जिम्मेदारी है।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि हॉकी इंडिया और हॉकी महाराष्ट्र के बीच मान्यता अथवा प्रशासन से जुड़ा विवाद अलग विषय है। उस विवाद के लंबित होने से नजूल जमीन के भाडेपट्टे की शर्तों का पालन करने की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। अपर आयुक्त ने यह भी माना कि कारण बताओ नोटिस देकर वीएचए को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया गया, मामले में 7 अगस्त, 2 सितंबर और 23 सितंबर 2026 को सुनवाई हुई। 23 सितंबर को मामला निर्णय के लिए रखा गया। इसके बाद 28 सितंबर 2026 को अपर विभागीय आयुक्त तुषार मठकर ने आदेश जारी किया।
अपर विभागीय आयुक्त के आदेश ने जिलाधिकारी के उस निर्णय को बरकरार रखा है जिसके तहत वीएचए की लीज समाप्त कर जमीन शासन के कब्जे में लेने का रास्ता साफ किया गया है। हालांकि आदेश के रिकॉर्ड में वीएचए की ओर से उच्च न्यायालय की कार्यवाही और अन्य न्यायालयीन पहलुओं का भी उल्लेख है, इसलिए इस पूरे विवाद का अगला चरण संबंधित न्यायालयीन और प्रशासनिक कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
इसी रिपोर्ट और नजूल शाखा की जांच के आधार पर वीएचए को 16 जून 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसमें संस्था की वैधता, भाडेपट्टे की सभी शर्तों के पालन, फार्म-बीबी की शर्त क्रमांक 5 तथा मैदान में आवश्यक हॉकी सुविधाओं की उपलब्धता के प्रमाण मांगे गए, साथ ही भू-भाड़ा नियमित रूप से शासन के खाते में जमा नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। कलेक्टर नागपुर द्वारा 17 जुलाई को जमीन शासन के कब्जे में लेने का आदेश दिया गया था।