लंबी दूरी की परेशानी खत्म? नागपुर-वाराणसी ट्रेन की मांग फिर तेज, कर्मचारियों की रेल मंत्री से अपील
Nagpur Direct Train Demand: नागपुर-वाराणसी सीधी ट्रेन की मांग तेज हो गई है। हजारों उत्तर भारतीय कर्मचारियों ने रेल मंत्रालय से जल्द निर्णय लेने की अपील की है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर, वाराणसी ट्रेन,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Indian Railways News: नागपुर सहित विदर्भ क्षेत्र में कार्यरत हजारों उत्तर भारतीय कर्मचारियों के लिए नागपुर से वाराणसी के बीच सीधी ट्रेन सेवा किसी संजीवनी से कम नहीं होगी। लंबे समय से इस रूट पर डायरेक्ट ट्रेन की मांग उठती रही है लेकिन अब यह मुद्दा फिर से जोर पकड़ता नजर आ रहा है।
विभिन्न उत्तर भारतीय सामाजिक संगठनों और कर्मचारियों के समूहों ने रेल मंत्रालय से इस दिशा में शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है। वहीं पासी समाज कल्याण समिति, नागपुर ने भी अपने 40,000 से अधिक समाज बंधुओं की ओर से रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से उक्त ट्रेन की मांग की।
त्योहारी, छुट्टियों में स्थिति बद से बदतर
ऐसे यात्रियों का कहना है कि त्योहारी सीजन, गर्मी की छुट्टियों और विशेष अवसरों पर स्थिति और भी विकट हो जाती है। कई बार उन्हें वेटिंग टिकट पर खचाखच भरी ट्रेनों में सफर करना पड़ता है या फिर बस जैसे अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ता है जो समय और सुरक्षा दोनों दृष्टि से चुनौतीपूर्ण साबित होता है।
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खासकर महिला कर्मचारियों और परिवार के साथ यात्रा करने वालों के लिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि नागपुर एक प्रमुख रेल जंक्शन होने के बावजूद उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी से सीधी कनेक्टिविटी का अभाव समझ से परे है। यदि यह ट्रेन शुरू होती है तो न केवल कर्मचारियों को राहत मिलेगी बल्कि पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को भी बढ़ावा मिलेगा।
आज भी करते संघर्ष
हमारे समाज के लोग वर्षों से यहां मेहनत कर रहे है लेकिन अपने पैतृक स्थानी तक पहुंचने के लिए आज भी संघर्ष करना पड़ता है। दक्षिण भारत से आने वाली ट्रेनों पर निर्भरता के कारण टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सीधी ट्रेन की मांग सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि जरूरत बन चुकी है।
– सदस्य, अशोक कैथवास
जीवन रेखा साबित होगी
विदर्भ में बड़ी संख्या में बसे इस समाज के लोगों के लिए यह ट्रेन जीवनरेखा साबित होगी खासकर त्योहारों और पारिवारिक अवसरों पर अपने पैतृक स्थान की यात्रा करना बेहद ही कठिन हो जाता है। केन्द्र सरकार और रेल मंत्रालय को हमारी इस मांग पर गंभीरता से विवार कर जल्द निर्णय लेना चाहिए।
– अध्यक्ष, सचिन्द्र बावरिया
40,000 पासी समाज बंधुओं की जरूरत
नागपुर में हमारे समाज के लगभग 7,000 लोग निवास करते हैं, जबकि पूरे विदर्भ में यह संख्या करीब 35,000 से 40,000 के बीच है। इस समाज के अधिकांश लोग आज विदर्भ की कोयला खदानों, मिनरल्स माइस तथा अन्य श्रम आधारित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है।
इसके बावजूद अपने पैतृक घर या स्थान पर आवागमन की सीधी ट्रेन सुविधा के अभाव में लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रेल मंत्री वैष्णव से पासी समाज की मांग है कि नागपुर से वाराणसी के बीच सीधी ट्रेन सेवा शुरू करें, यह हमारे समाज के लिए बड़ी राहत साबित होगी।
– सचित, दिलीप बावरिया
दक्षिण भारत से आने वाली ट्रेनों पर निर्भरता होगी समाप्त
वर्तमान में नागपुर में वेस्टर्न कोल्ड फिल्ड्स, मॉवल और इंडियन ब्यूरो ऑफ माइनिंग विभाग के अधिकांश कर्मचारी उत्तर भारतीय
वहीं नागपुर में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और वायु सेना हेडक्वार्टर समेत भारतीय सेना के 3 अंगों के विभाग पूरी कर्मचारी संख्या के साथ कार्यरत हैं।
इनमें भी बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय हैं। भले ही सभी के विभाग अलग-अलग हों लेकिन काशी, प्रयागराज, वाराणसी या अयोध्या जाने लिए सभी की परेशानी एक जैसी है।
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वह है, नागपुर से सीधी ट्रेन सेवा नहीं होने से यहां तक पहुंचने में दिन-रात की परेशानी सहना। जो ट्रेनें नागपुर को उत्तर भारत से जोड़ती हैं उनमें से लगभग सभी दक्षिण भारत से आती हैं।
ये ट्रेनें अपने पहले स्टेशन से ही फुल होकर चलती हैं। ऐसे में इन हजारों सैनिकों और सरकारी कर्मचारी अपने पैतृक गांव-शहर जाने के लिए काफी परेशानियों का सामना करते हैं।
