स्टाफ खाली, खर्च भारी! RTMNU में अनाप-शनाप खर्च का खुलासा, सीनेट में हंगामे की तैयारी! कल होगी बैठक
RTM Nagpur University: नागपुर यूनिवर्सिटी में आय घटने और खर्च बढ़ने से आर्थिक संकट गहरा गया है। 3 करोड़ सिक्योरिटी और 13 करोड़ अंशकालीन शिक्षकों पर खर्च पर सवाल उठ रहे हैं।
- Written By: प्रिया जैस
नागपुर यूनिवर्सिटी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur University Expenditure: राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति पहले की तरह ‘स्ट्रांग’ नहीं है। पिछले वर्षों में विश्वविद्यालय के खर्चों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। वहीं दूसरी ओर आय के स्रोत कम हुए हैं। आय बढ़ाने के लिए 6 महीने पहले गठित की गई समिति अब तक कागजों पर ही सीमित है। स्थिति यह है कि परीक्षा फीस से जितनी निधि मिलती है उससे ज्यादा परीक्षा कार्यों पर खर्च हो जाती है।
इसके बाद भी प्रशासन ने खर्चों में कटौती नहीं की है। स्थिति यह है कि एफडी के ब्याज से मिलने वाली रकम को भी खर्च करना पड़ रहा है। नागपुर विश्वविद्यालय का कार्य क्षेत्र 4 जिलों में फैला हुआ है। विश्वविद्यालय को सबसे अधिक खर्च परीक्षा संचालित करने में आता है। सेमेस्टर पद्धति की वजह से वर्ष में 2 बार परीक्षाएं होती हैं। विश्वविद्यालय में करीब 3 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
खर्च का लेखाजोखा
इनसे परीक्षा फीस के माध्यम से करीब 35 करोड़ रुपये प्राप्त होते हैं, जबकि परीक्षा पर करीब 50 करोड़ तक खर्च हो जाता है। अब खर्च की भरपाई 900 करोड़ के फिक्स डिपॉडिट से मिलने वाले सालाना करीब 60 करोड़ से अधिक के ब्याज से की जा रही है, जबकि यह निधि विश्वविद्यालयध विकास कार्य और छात्र संबंधी गतिविधियों पर खर्च होनी चाहिए।
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- 3 करोड़ रुपये सिक्योरिटी पर खर्च
- 13 करोड़ अंशकालीन शिक्षकों पर
- 3 करोड़ की परीक्षा फीस में कटौती
ठोस उपाय योजना का अभाव
विश्वविद्यालय के संलग्नित 30 से ज्यादा कॉलेजों ने ऑटोनॉमस का दर्जा हासिल कर लिया है। इस हालत में इन कॉलेजों के छात्रों की फीस अब विश्वविद्यालय को नहीं नहीं मिलती। करीब 3 करोड़ की कटौती परीक्षा फीस में हो गई है। वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय द्वारा सुरक्षा रक्षकों पर हर 3 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं, जबकि इतने सुरक्षा रक्षकों की जरूरत भी नहीं है।
यानी वर्तमान स्थिति ‘आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपय्या’ जैसी हो गई है। करीब 6 महीने पहले विश्वविद्यालय ने आय के स्रोत बढ़ाने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित की थी लेकिन अब तक समिति की रिपोर्ट नहीं मिली है क्योंकि अब तक उपाय योजना ही नहीं बनी है। विश्वविद्यालय के पास संपत्ति तो है लेकिन उसे आय के स्रोत में बदलने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बन सकती है।
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विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभागों में प्राध्यापकों के 60 फीसदी पद खाली हैं। इसके बदले तासिका तत्व यानी अंशकालीन शिक्षकों को रखा गया है। इन शिक्षकों पर हर वर्ष 13 करोड़ से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। यदि नियमित नियुक्ति हो जाए तो विश्वविद्यालय के 13 करोड़ के बच सकते हैं।
सीनेट की स्थगित बैठक कल
विश्वविद्यालय की सीनेट की स्थगित बैठक 20 दिसंबर को रखी गई है। इसमें सदस्यों के प्रश्नों के साथ ही प्रस्तावों पर चर्चा होगी। इसमें बंद की गईं ८ खेल स्पर्धाएं शुरू करने के लिए विश्वविद्यालय के प्रयास, परीक्षा के टाइम टेबल में गड़बड़ी से छात्रों को होने वाली दिक्कतें, लेमिनेशन डिग्री पेपर का बिल स्वीकार करने, सुरक्षा रक्षकों की संख्या कम करने जैसे मुद्दों पर सदस्यों द्वारा प्रशासन को घेरने का प्रयास किया जाएगा।
