नागपुर विशेष स्कूल लापरवाही( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nagpur Disabled Children Care: नागपुर अखिल भारतीय दिव्यांग कल्याणकारी बहुउद्देशीय संस्था द्वारा संचालित स्वावलंबी मतिमंद निवासी स्कूल में गंभीर असुविधाओं की खबर सामने आई है। जयताला स्थित इस स्कूल में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को जो बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए, उनका भारी अभाव है।
संस्थापक पर इन बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। बता दें कि इस स्कूल को सरकार द्वारा 50 विद्यार्थियों की मान्यता दी गई है और 100% वेतन-निष्ठित अनुदान (परिपोषण) भी मंजूर किया गया है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है।
विद्यार्थियों को स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई की व्यवस्था, पर्याप्त कक्षाएं, खेल का मैदान, रहने की पर्याप्त व्यवस्था, शैक्षिक, उपचारात्मक सामग्री और सुरक्षा का वातावरण प्रदान नहीं किया जा रहा है।
विशेष रूप से, बच्चों के लिए जरूरी संवेदनशील देखभाल और सुविधाओं की जानबूझकर उपेक्षा की जा रही है। बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रहा है।
ज्ञात हो कि विगत दिनों रामटेक तहसील के काचुरवाही में मतिमंद युवक विकास शिक्षण व प्रशिक्षण संस्था द्वारा संचालित सूरज मतिमंद निवासी शाला में छात्रों को विषबाधा हुई थी।
दोपहर के भोजन के बाद 15 बच्चों की हालत बिगड़ गई थी। जयताला स्थित स्वावलंबी मतिमंद निवासी स्कूल में भी भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर मतिमंद स्कूल में विषबाधा होने की आशंका बनी हुई है।
दिव्यांग कल्याण विभाग की मंजूरी के अनुसार, निर्धारित दिव्यांग विद्यालय में 50 छात्र होने चाहिए, लेकिन विद्यालय में केवल 20 से 25 बच्चे ही रहते हैं। संस्था के पास छात्रावास में केवल इतने ही बच्चों को ठहराने की व्यवस्था है। चर्चा है कि ऑनलाइन दस्तावेज दिखाकर छात्रों की संख्या बढ़ाई जा रही है। अनुदान राशि की हेराफेरी करने के लिए यह सब लगातार चल रहा है।
गौरतलब है कि सुविधाओं के अभाव की जानकारी निरीक्षण के दौरान संबंधित जिला परिषद, समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत जिला दिव्यांग सक्षमीकरण विभाग और प्रादेशिक उपायुक्त समाज कल्याण विभाग द्वारा देखी गई है।
हालांकि, यह दावा किया जाता है कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारी इसे नजरअंदाज कर रहे हैं। इससे यह तो स्पष्ट है कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का गभीर मामला है।
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राज्य के तत्कालीन दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव तुकाराम मुंहे ने नियुक्ति के बाद से पिछले कुछ महीनों से दिव्यांगों के अधिकारों के लिए फर्जी संस्थानों के खिलाफ अभियान चलाया, राज्य में ऐसे कई संस्थान मौजूद है जो प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से दिव्यांग बच्चों के कल्याण के नाम पर अनुदान का गबन कर रही है। ऐसे में दोषी संस्थाधकों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अनिवार्य है।