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नागपुर स्मार्ट सिटी विवाद: IAS तुकाराम मुंडे को मिली क्लीन चिट, महिला उत्पीड़न मामले में जांच जारी

Maharashtra Winter Session Nagpur: नागपुर स्मार्ट सिटी विवाद में IAS तुकाराम मुंडे को वित्तीय अनियमितताओं में क्लीन चिट मिली, महिला उत्पीड़न मामले की जांच अभी जारी।

  • Written By: प्रिया जैस
Updated On: Dec 13, 2025 | 07:34 AM

तुकाराम मुंडे (सौजन्य-सोशल मीडिया)

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Tukaram Munde Clean Chit: महाराष्ट्र विधानसभा में विधायक कृष्णा खोपड़े द्वारा आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे के नागपुर महानगरपालिका और स्मार्ट सिटी के कार्यकाल को लेकर एक गंभीर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया गया, जिसमें उन पर गंभीर आरोप लगाए गए और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। जिसपर जवाब देते हुए मंत्री उदय सामंत ने वित्तीय अनियमिताओं में क्लीन चिट दिए जाने की जानकारी सदन में दी।

सात महीने का विवादास्पद कार्यकाल

सदस्यों ने बताया कि तुकाराम मुंडे 28 जनवरी 2020 को नागपुर महानगरपालिका में आयुक्त के पद पर नियुक्त हुए थे और केवल सात महीने में ही उनका स्थानांतरण हो गया। यह उल्लेख किया गया कि मुंडे अपने पूरे करियर में एक वर्ष में 24 तबादलों के लिए जाने जाते हैं। सदस्यों ने आरोप लगाया कि मुंडे विकास के मामले में ‘शून्य’ थे, लेकिन मीडिया और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के साथ अपने जुड़ाव के कारण बहुत प्रसिद्ध थे।

प्रमुख आरोप और वित्तीय नुकसान

कोविड काल में नुकसान : कोविड के दौरान, मुंडे के माध्यम से नागपुर से 35-40 किलोमीटर दूर काटोल रोड पर खुले मैदान में 5000 बिस्तरों का अस्पताल स्थापित किया गया था, जिसमें लगभग 40 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अगले ही दिन तेज हवा और बारिश के कारण अस्पताल की पूरी व्यवस्था नष्ट हो गई थी।

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कर्मचारियों की बर्खास्तगी : मुंडे ने एनएमसी के 17 चतुर्थ श्रेणी (क्लास फोर) कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। इन कर्मचारियों की फाइल पहले से ही 89 नियम के तहत लाभ देने के लिए चल रही थी, लेकिन मुंडे ने आते ही उन्हें बर्खास्त कर दिया, जिससे 17 परिवारों को बर्बाद करने का काम किया गया।

स्मार्ट सिटी में हस्तक्षेप : यह आरोप लगाया गया कि मुंडे के पास स्मार्ट सिटी का अधिकार न होते हुए भी उन्होंने हस्तक्षेप किया और एक विशिष्ट ठेकेदार को लगभग 18-19 करोड़ रुपये का बिल जारी करने का काम किया, जबकि वह बोर्ड के सदस्य भी नहीं थे। तत्कालीन महापौर संदीप जोशी ने स्मार्ट सिटी के सचिव को पत्र लिखकर यह स्पष्ट किया था कि मुंडे को हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है।

महिला अधिकारियों का उत्पीड़न

विधानसभा में यह भी मुद्दा उठाया गया कि जिन दो महिला अधिकारियों ने फाइल पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था, उनमें से एक को रविभवन के कॉटेज में बुलाकर प्रताड़ित किया गया, और दूसरी को कॉरपोरेशन के कार्यालय में प्रताड़ित किया गया।

महिला आयोग ने भी यह माना है कि मुंडे ने संबंधित महिला अधिकारी को गंभीर परिणामों की धमकी दी थी, जिसके कारण उसे मानसिक क्षति हुई थी। इस मामले में पूर्व महापौर संदीप जोशी और दो महिला अधिकारियों ने सदर पुलिस स्टेशन में मुंडे के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई थी।

मंत्री का जवाब और क्लीन चिट

मंत्री ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि मुंडे ने कोविड अवधि के दौरान स्मार्ट सिटी का काम जरूर देखा था, जो उन्हें तत्कालीन बीएमसी आयुक्त के मौखिक निर्देशों पर सौंपा गया था, जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ने भी आदेश जारी किया था। वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर बताया कि लगभग 20 करोड़ रुपये के बिल से संबंधित दो जांच चल रही थी।

यह भी पढ़ें – शीतकालीन सत्र: चुनाव आयुक्त भी लोकायुक्त के दायरे में, राष्ट्रपति के सुझाव पर 3 महत्वपूर्ण बदलाव

आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और पुलिस विभाग द्वारा की गई दोनों जांचों में मुंडे को क्लीन चिट मिली है। ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार, 16 से 18 करोड़ रुपये का भुगतान उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए किया गया था, और इसमें कोई भी गैर-व्यवहार नहीं हुआ।

महिला उत्पीड़न मामले में जांच जारी

मंत्री ने स्पष्ट किया कि महिला अधिकारियों के उत्पीड़न का मामला एक अलग विषय है। इस मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारी रस्तोगी मैडम की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा की जा रही है और यह जांच अंतिम चरण में है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि यह रिपोर्ट 15 से 20 दिनों या एक महीने के भीतर सरकार को प्राप्त हो जाएगा और रिपोर्ट में जो भी निष्कर्ष होगा, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

सदस्यों की मांग

सदस्यों ने मुंडे को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच मुख्य सचिव और पुलिस महासंचालक के माध्यम से कराई जाए। सदस्यों ने 20 अक्टूबर 2025 को जारी उस पत्र को भी तत्काल रद्द करने की मांग की, जिसके तहत मुंडे की स्मार्ट सिटी सीईओ पद पर नियुक्ति को “कार्योत्तर मान्यता दी गई थी, जबकि 2020 में उनके खिलाफ शिकायतें और एफआईआर दर्ज हुई थीं। मुख्यमंत्री ने पहले ही इस संदर्भ में जांच का आश्वासन दिया है।

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Published On: Dec 13, 2025 | 07:34 AM

Topics:  

  • Maharashtra
  • Maharashtra Legislative Assembly Session
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