

Nagpur BLO Verification Drive: नागपुर 'एसआईआर' एक प्रशासनिक प्रक्रिया है जिसे जिला चुनाव विभाग के माध्यम से चुनाव आयोग द्वारा चलाया जा रहा है। इसमें प्रशासन की ओर से बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) नियुक्त किए गए हैं। उन्हें प्रक्रिया, अधिकार और जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि कोई भी मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहे। इसके तहत बीएलओ को मतदाताओं के घर जाकर नियमानुसार उनका पंजीकरण करना होता है।
हालांकि जिला प्रशासन चाहे लाख दावा करे लेकिन हकीकत यह है कि बीएलओ ढूंढने से भी नहीं मिल रहे हैं। राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बीएलए या उस क्षेत्र के राजनीतिक नेताओं को ही बीएलओ आसानी से मिल रहे हैं, जबकि आम मतदाताओं को वे नहीं मिल रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए अब यह चर्चा आम हो गई है कि क्या बीएलओ का 'राजनीतिक अपहरण' हो गया है।
लगभग 24 साल के लंबे अंतराल के बाद विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों को त्रुटिरहित और सटीक बनाने के लिए 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) किया जा रहा है। यह एक राष्ट्रीय कर्तव्य है जिसे भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित समय सीमा में पूरा करने में बीएलओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
इस कार्य के लिए शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि जिले के 46,38,589 मतदाताओं में से अब तक केवल 23,07,189 मतदाताओं की जानकारी ही डिजिटलाइज (संगणीकृत) की जा सकी है, जबकि लगभग 20 लाख मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचने का दावा किया गया है।
यह काम केवल 49 प्रतिशत ही हुआ है जिससे यह प्रतीत होता है कि करीच 50 प्रतिशत बीएलओ ईमानदारी से काम नहीं कर रहे हैं। दूसरी ओर यह भी आरोप लग रहा है कि कई बीएलओ केवल स्थानीय राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों के इशारे पर काम कर रहे हैं।
राजनीतिक दलों द्वारा अपने बीएलए से एसआईआर कराने पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन बीएलओ द्वारा उन्हें विशिष्ट स्थानों पर बुलाकर केवल अपने पसंदीदा मतदाताओं के फॉर्म भरने पर जोर देना गलत माना जा रहा है। कई बार बीएलओ राजनीतिक नेता द्वारा तय किए गए स्थान पर बैठकर ही दिनभर का काम निपटाते हैं जिसकी जानकारी आम मतदाताओं को नहीं होती।
कई बीएलओ मतदाताओं को 'तबीयत ठीक नहीं है, 2 दिन बाद घर आऊंगा' कहकर टाल देते हैं और हफ्तों तक नहीं आते। अंततः परेशान होकर मतदाता खुद बीएलओ की तलाश करते हैं। कुछ बीएलओ तो जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों, मंदिरों, बुद्ध विहारों या समाज भवनों में बैठकर काम कर रहे हैं, मतदान केंद्रों पर उनका बमुश्किल ही दर्शन होता है जिससे मतदाता निराश लौट रहे हैं।
कौन हैं बीएलओ एसआईआर के लिए शिक्षकों को ही बीएलओ बनाया गया है। उन्हें अपने शैक्षणिक कार्यों के साथ-साथ यह अतिरिक्त जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। उनके पास एसआईआर का प्रोफार्मा भरकर उसकी एक प्रति प्रमाण के रूप में मतदाताओं को देनी होती है लेकिन कई मतदाताओं को यह रसीद (परतावा) नहीं मिल रही है। इसके अलावा कई बार उनसे अन्य दस्तावेजों की भी मांग की जाती है जिससे मतदाता बेहद त्रस्त हैं।
एसआईआर पंजीकरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए अब स्कूली विद्यार्थियों की मदद ली जा रही है। सोमवार को करिश्मा इंग्लिश स्कूल के विद्यार्थियों ने मानेवाड़ा क्षेत्र में हाथों में तख्तियां लेकर पदयात्रा निकाली।
इस कार्य के लिए 8 अगस्त तक की समय सीमा बढ़ाई गई है। चूंकि बीएलओ खुद मतदाताओं तक नहीं पहुंच पा रहे है, इसलिए विद्यार्थियों की मदद लेनी पड़ रही है।
शहर के जिन विधानसभा क्षेत्रों में पंजीकरण का काम कम 66 हुआ है, उन क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने के लिए पदयात्राएं निकाली जाएंगी, मंगलवार को जरीपटका और मानकापुर क्षेत्रों में जागरूकता यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद अन्य क्षेत्रों में भी विद्यार्थियों की मदद से अभियान चलाया जाएगा।
- उप जिला चुनाव अधिकारी, रचना इंदूरकर