नागपुर मनपा में फिर ‘खेला’? खेल मैदान के टेंडर में ऐसी शर्तें कि चकरा गए बड़े-बड़े ठेकेदार!
NMC Contractors Protest: नागपुर मनपा के खेल विभाग में फिर 'खेला'! विशेष कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर में लगाई गईं कठिन शर्तें। ठेकेदारों ने पारदर्शिता पर उठाए सवाल।
- Written By: प्रिया जैस
बास्केटबाल मैदान (सौजन्य-सोशल मीडिया)
NMC Sports Department: नागपुर मनपा में कुछ दशकों पहले हुए खेल घोटाले में अभी अदालत से मामला पूरी तरह से निपटा भी नहीं है कि फिर खेल विभाग में ‘खेला’ होने के आरोप लगने लगे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खेल मैदानों के विकास के नाम पर अब जारी किए जा रहे टेंडरों में विशेष कम्पनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से टेंडर की शर्तें होने पर कड़ी आपत्ति जताई जा रही है।
मनपा (NMC) में विकास कार्य करने वाले कुछ बड़े ठेकेदारों का मानना है कि कुकड़े लेआउट पार्क में नया मल्टी स्पोर्ट्स ग्राउंड निर्मित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया और कड़े मापदंड जारी किए गए हैं। जारी किए गए टेंडर के अनुसार यहां पर फुटसल और बास्केटबॉल मैदान का निर्माण भी किया जाना है।
खेल विभाग द्वारा इसके लिए तय की गईं शर्तों के अनुसार जिस ठेकेदार कम्पनी के पास फुटसल मैदान और बास्केटबॉल मैदान के निर्माण का अनुभव होगा, वहीं इसमें हिस्सा ले सकेगा। ठेकेदार कम्पनियों का मानना है कि फुटसल और बास्केटबॉल मैदान का निर्माण कोई आम पंक्तियों में नहीं आता है। ऐसे में कुछ चुनिंदा ठेकेदारों की ओर से ही पहले कार्य किया गया होगा, जिससे उनमें से ही किसी कम्पनी को ध्यान में रखते हुए टेंडर की यह शर्त रखी हो सकती है।
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सरकारी या अर्ध सरकारी संगठन में काम का अनुभव
टेंडर के लिए पात्रता की रखी गईं शर्तों के अनुसार इस निविदा में भाग लेने वाले ठेकेदारों और एनजीओ के लिए पात्रता मानदंड भी स्पष्ट किए गए हैं। इनका महाराष्ट्र पीडब्ल्यूडी, सीपीडब्ल्यूडी, सिडको, एमएसआरडीसी, एमएमआरडीए या एनएमसी-नागपुर जैसी संस्थाओं में उचित श्रेणी में पंजीकृत होना आवश्यक है। विशेष रूप से बोली लगाने वालों (Bidders) के पास किसी सरकारी या अर्ध-सरकारी संगठन में ‘फुटसल’ (Futsal) और ‘बास्केटबॉल’ (Basketball) मैदान के सफलतापूर्वक निर्माण का पूर्व अनुभव होना चाहिए।
ISFF से मान्यता प्राप्त की भी शर्त
मनपा के खेल विभाग द्वारा जारी टेंडर की शर्तों के अनुसार जो भी ठेकेदार कम्पनी या एनजीओ इसमें हिस्सा लेना चाहते हैं, उन्हें इसी आर्थिक वर्ष में ISFF द्वारा ‘पसंदीदा फील्ड डेवलपर’ के रूप में भी मान्यता प्राप्त होनी चाहिए। यह शर्त काफी जटिल है, जिसमें किसी विशेष कम्पनी को ही मान्यता प्राप्त हो सकती है।
अन्य शर्तों को लेकर ठेकेदार कम्पनियों का मानना है कि टेंडर को आनलाइन ई-टेंडर प्रणाली में 30 मार्च की शाम को डाला गया। 31 मार्च होने से ठेकेदार कम्पनियां भी निश्चित ही लेखा-जोखा तय करने में लगी रहीं। टेंडर के अनुसार 2 मार्च को ही प्री-बीड मीटिंग रखी गई। इसमें कई कम्पनियां हिस्सा नहीं ले पाईं। अब 6 को टेंडर भरना है जबकि 3,4, और 5 को अवकाश है।
9 महीने में बनकर तैयार होगा ग्राउंड
प्रशासन द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार इस मल्टी स्पोर्ट्स ग्राउंड का निर्माण 9 महीने की अवधि के भीतर पूरा किया जाना है। इस ग्राउंड को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। निर्माण कार्य के प्रमुख हिस्सों में 400 वर्ग मीटर में सिंथेटिक टर्फ और 108 वर्ग मीटर में पीयू फ्लोरिंग या सिंथेटिक फ्लोरिंग लगाई जाएगी।
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इसके अतिरिक्त, ग्राउंड के निर्माण में 77.21 घन मीटर जीएसबी (GSB), 216.40 घन मीटर मुरुम और 101 वर्ग मीटर ट्रेमिक्स कंक्रीट का भी उपयोग किया जाएगा। विस्तृत कार्य का विवरण ‘बीओक्यू’ (BOQ) के अनुसार निर्धारित किया गया है।
ठेकेदारों के लिए तय किए गए कड़े नियम
चूंकि यह एक बड़ा प्रोजेक्ट है, इसलिए गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ठेकेदारों के लिए काफी कड़े नियम बनाए गए हैं।
- टर्नओवर और बीड क्षमता : टेंडर में हिस्सा लेने वाले ठेकेदार का पिछले 5 वर्षों में टर्नओवर कम से कम 217.90 लाख रुपये होना अनिवार्य है। इसके साथ ही ठेकेदार की बीड क्षमता भी 217.90 लाख रुपये से कम नहीं होनी चाहिए।
- कार्यानुभव : ठेकेदारों को पिछले 5 वर्षों में इसी तरह के कार्य सफलतापूर्वक पूरे करने का अनुभव होना चाहिए। इसके लिए ठेकेदार ने या तो 87.16 लाख रुपये के 3 समान कार्य, 108.95 लाख रुपये के 2 कार्य या फिर 174.32 लाख रुपये का कम से कम एक समान प्रोजेक्ट पूरा किया हो।
