ठेकेदार एसोसिएशन की मांग (सौजन्य-नवभारत)
NMC Contractors Welfare Association: नागपुर शहर में ठेकेदारों द्वारा अत्यधिक कम दरों पर निविदाएं (टेंडर) भरने की बढ़ती प्रवृत्ति ने प्रशासन और ठेकेदारों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर जहां स्थायी समिति में इस मसले को लेकर हुए हंगामे के बाद प्रशासक काल में 40 प्रतिशत से कम बोली वाले टेंडरों की जांच करने का आदेश दिया गया वहीं अब एनएमसी कॉन्ट्रैक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय नायडू के नेतृत्व में स्थायी समिति सभापति से मिले शिष्टमंडल ने इस समस्या से बचने के उपाय सौंपे।
इस समस्या के समाधान और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ठेकेदार एसोसिएशन ने महापौर को ज्ञापन सौंपा जिसमें टेंडर प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलावों की मांग की गई है। ठेकेदार एसोसिएशन ने प्रशासन से इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करने और इस विषय पर सभी संबंधित पक्षों के साथ एक खुली चर्चा आयोजित करने का आग्रह किया है।
चर्चा के दौरान नायडू ने कहा कि टेंडर में बहुत कम दरें भरने के कारण न केवल ठेकेदारों को आर्थिक नुकसान हो रहा है बल्कि इससे विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इस अनुचित प्रतिस्पर्धा के कारण गुणवत्ता को प्राथमिकता देने वाले कुशल ठेकेदार बाजार से बाहर हो रहे हैं और कई ठेकेदार अपने व्यक्तिगत संसाधन खो रहे हैं।
इस संकट से निपटने के लिए ठेकेदारों ने परफॉर्मेंस सिक्योरिटी के लिए बैंक गारंटी के स्थान पर डिमांड ड्राफ्ट की पुरानी प्रणाली को फिर से शुरू करने का सुझाव दिया है। प्रस्ताव के अनुसार, निविदा भरते समय डीडी को ऑनलाइन अपलोड किया जाना चाहिए और 3 कार्य दिवसों के भीतर उसकी भौतिक प्रति जमा की जानी चाहिए। इस व्यवस्था को एक वर्ष के परीक्षण आधार पर लागू करने की सिफारिश की गई है।
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उनका मानना है कि डीडी प्रणाली लागू होने से फर्जी बैंक गारंटी की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और टेंडर प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि ठेकेदार केवल अपनी वास्तविक वित्तीय और कार्य क्षमता के अनुसार ही काम लेंगे जिससे कार्यों की गुणवत्ता और उन्हें समय पर पूरा करना संभव हो सकेगा।