नागपुर मनपा आयुक्त डॉ. अभिजीत चौधरी का हुआ तबादला, अब संभालेंगे पुणे PMRDA की कमान
Nagpur Municipal Commissioner Transfer: नागपुर मनपा आयुक्त डॉ. अभिजीत चौधरी का तबादला। पुणे PMRDA के नए महानगर आयुक्त नियुक्त। जिलाधिकारी डॉ. विपिन इटनकर संभालेंगे नागपुर मनपा का प्रभार।
- Written By: प्रिया जैस
मनपा आयुक्त डॉ. अभिजीत चौधरी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Dr. Abhijeet Chaudhary IAS: राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर फेरबदल करते हुए नागपुर महानगरपालिका के आयुक्त डॉ. अभिजीत चौधरी का तबादला कर पुणे महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण के नये महानगर आयुक्त के रूप में नियुक्ति कर दी। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार डॉ. चौधरी को तुरंत प्रभाव से पुणे महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) के नये महानगर आयुक्त की जिम्मेदारी संभालने का निर्देश दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि 4 जुलाई 2023 को मनपा के प्रशासक के रूप में उनकी नियुक्ति की गई थी। लगभग 3 वर्षों तक प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी संभालने के बाद अब मनपा में नई सत्ता स्थापित होते ही उनका तबादला कर दिया गया।
जिलाधिकारी इटनकर को सौंपेंगे प्रभार
सरकार के निर्देशों के अनुसार डॉ. अभिजीत चौधरी अपना वर्तमान कार्यभार जिलाधिकारी डॉ. विपिन इटनकर को सौंपकर पुणे के लिए रवाना होंगे। सहसचिव सुभाष उमराणीकर द्वारा जारी इस आदेश में डॉ. चौधरी को ‘ई-ऑफिस’ और ‘सी-एचआरएमएस’ (e-HRMS) प्रणालियों के उपयोग को प्राथमिकता देने के भी निर्देश दिए गए हैं। पुणे के विकास और मूलभूत ढांचे की योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से डॉ. चौधरी की यह नियुक्ति काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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प्रशासक कार्यकाल के सभी कार्यों की हो जांच
नागपुर महानगरपालिका में प्रशासक के रूप में अभिजीत चौधरी के कार्यकाल के दौरान मंजूर और पूरे किए गए सभी कार्यों की गहन जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है। पश्चिम नागपुर के विधायक विकास ठाकरे ने विधानसभा में मांग की कि इन कार्यों की ‘क्रीड़ा घोटाले’ की तर्ज पर जांच की जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।
विधानसभा में बोलते हुए ठाकरे ने स्पष्ट किया कि अभिजीत चौधरी का तबादला भले ही हो गया हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनके कार्यकाल में हुए नियमों के उल्लंघन और अनियमितताओं से उन्हें राहत मिल गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक राज के दौरान मनपा में कई ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिन पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच समय की मांग है।
झुड़पी जंगल और वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा
ठाकरे ने सदन का ध्यान एमएसआईडीसी द्वारा झुड़पी जंगल के लिए आरक्षित जमीन पर बनाए जा रहे प्रदर्शनी केंद्र की ओर आकर्षित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार झुड़पी जंगल की जमीन को वन भूमि माना जाता है फिर भी ऐसी जमीन पर प्रोजेक्ट बनाना नियमों का बड़ा उल्लंघन है। उन्होंने एमएसआरटीसी से संबंधित एक बड़े वित्तीय घोटाले का भी पर्दाफाश किया, जिससे सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है।
