

नागपुर महानगरपालिका ने सेंट्रल जोन में सीवर नेटवर्क के निर्माण और पुनर्वास के लिए 289.19 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है।
टेंडर में शामिल कंपनी की क्षमता को जापानी वित्तीय सहायता एजेंसी JICA ने स्वीकार नहीं किया। इससे परियोजना की आगे की प्रक्रिया प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
पैकेज CP-4 के तहत सीवर नेटवर्क का आधुनिकीकरण और विस्तार किया जाना है। योजना को 30 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।
Nagpur Municipal Corporation Tender: नागपुर महानगर पालिका ने शहर के सेंट्रल जोन में व्यापक सीवर नेटवर्क के निर्माण और पुनर्वास के लिए 289.19 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है। पैकेज सीपी-4 30 महीने में पूरा के अंतर्गत शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य दक्षता और होना था प्रोजेक्ट पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ाने के लिए शहर के सीवेज बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और विस्तार करना है। इस एग्रीमेंट को 30 महीने की समयावधि में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह योजना सिटी के नागरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वच्छता मानकों में सुधार लाने की महानगरपालिका की व्यापक पहल का हिस्सा है। कार्य पूरा होने के बाद अपग्रेडेड सीवर सिस्टम से शहर की सीवेज प्रबंधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान लगाया जा रहा था। योजना के अनुसार मनपा की ओर से टेंडर मंगाकर इसे तकनीकी मंजूरी के लिए वित्तीय सहायता देने वाली जपान की जीका कम्पनी को भेजा गया, किंतु टेंडर में आने वाली कम्पनी की क्षमता को सिरे से खारिज कर दिया गया। ऐसी स्थिति में अब कुछ समय के लिए प्रकल्प पर ग्रहण लगने की जानकारी सूत्रों ने दी।
जानकारों की माने तो नाग नदी पुनरुज्जीवन प्रकल्प की घोषणा को लगभग 1 दशक से अधिक होने जा रहा है किंतु अब तक इसके वास्तविक कार्य की शुरुआत तक नहीं हो पायी। केवल सर्वे के नाम पर टाटा कंसलटेंसी की ओर से कुछ सर्वे किए जा रहे है। हालांकि योजना की गाड़ी सर्वे से आगे नहीं बढ़ पा रही है।
सिटी में कद्दावर नेता होने तथा पूरी योजना उनके अधीनस्थ होने के साथ-साथ वित्तीय मंजूरी के बाद भी अब तक कछुआ चाल से चल रही योजना, किसी आश्चर्य से कम नहीं है। संभवतः इस योजना के पूरी होने के लिए दशकों तक इंतजार करना पड़ सकता है। आश्चर्यजनक यह कि हजारों करोड़ की इस योजना के लिए हाल ही में मात्र 68 करोड़ रुपए मनपा को प्राप्त हुए।