मनपा चुनाव: अब ‘गॉडफादर’ के सहारे जुगाड़, ओपन सीटों पर फोकस, आरक्षण का झटका, कई दिग्गजों का गणित फेल

Maharashtra Civic Polls: मनपा चुनाव 2025 में आरक्षण की नई सूची से कई दिग्गज नेताओं का गणित बिगड़ा। 151 में से 76 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित, सियासी हलचल तेज।
Maharashtra Civic Polls: मनपा चुनाव 2025 में आरक्षण की नई सूची से कई दिग्गज नेताओं का गणित बिगड़ा। 151 में से 76 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित, सियासी हलचल तेज।
नागपुर न्यूज
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Nagpur Municipal Election 2025: मनपा आम चुनाव के लिए चुनाव आयोग के निर्देशानुसार एक-एक प्रक्रिया पूरी की जा रही है और इसी क्रम में मंगलवार को प्रभागों में अ, ब, क, ड सीटों के लिए आरक्षण की घोषणा की गई। इस आरक्षण ने कई नेताओं के लिए मनपा में प्रवेश का खतरा पैदा कर दिया है।

कुल 151 सीटों में से 76 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। आरक्षण की घोषणा के बाद कुछ स्थापित नेता सुरक्षित हो गए हैं, जबकि कई अन्य ‘शॉक’ में हैं और पुन: बतौर पार्षद मनपा में पहुंचने का उनका गणित फेल हो चुका है। संभवत: उन्हें अब ‘गाडफादर’ के सहारे ही टिकट का जुगाड़ करना पड़ सकता है।

सर्वसाधारण सीटों पर नजर और पार्टी की ‘धाकधुक’

आरक्षण से प्रभावित हुए पूर्व नगरसेवकों ने अब सर्वसाधारण (जनरल) सीटों पर ध्यान केंद्रित कर लिया है और उम्मीदवारी हासिल करने के लिए जोरदार प्रयास शुरू कर दिए हैं। हालांकि उनकी चिंता यह है कि यदि किसी वर्ग की महिला के लिए कोई सीट आरक्षित हो जाती है तो उसी वर्ग के पुरुष उम्मीदवार को सर्वसाधारण सीट से टिकट देने के लिए पार्टी सामान्यतः अनुकूल नहीं होती है। इसी अनुभव के कारण कई लोगों की चिंता बढ़ गई है। ऐसे पूर्व नगरसेवकों को अब अपनी पार्टी के भरोसे रहना होगा।

नहीं लड़ेंगे गुड्धे, बोरकर ने ठोकी ताल

कांग्रेस के नेता प्रफुल गुड्धे पाटिल का मनपा में 5वीं बार प्रवेश आरक्षण के कारण रुक गया है। प्रभाग 38 में 3 सीटें हैं जिनमें से एक अनुसूचित जाति के लिए और 2 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हुई हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा मनपा में समाप्त हो गई है। अब वे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी के चलते वे अब वैसे भी प्रभाग में समय नहीं दे पाते।

भाजपा के वरिष्ठ पूर्व पार्षद बाल्या बोरकर 2017 में प्रभाग 23‘क’ (सर्वसाधारण) से चुने गए थे। मौजूदा आरक्षण में प्रभाग 23‘क’ सीट सर्वसाधारण महिला के लिए आरक्षित हो गई है। इसके अलावा ‘ब’ सीट ओबीसी महिला के लिए और ‘अ’ सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई है। अब बाल्या बोरकर प्रभाग 23‘ड’ सर्वसाधारण सीट से चुनाव लड़ने की फिराक में है। उन्होंने इस सीट के लिए ताल ठोक दी है।

 भाजपा में लौटने की देख रहे राह

पूर्व पार्षद सतीश होले पिछली बार (2017) में वार्ड 31‘ब’ (ओबीसी) से चुने गए थे। इस बार के आरक्षण में भी उनकी ‘ब’ सीट ओबीसी के लिए आरक्षित है। किंतु उनके भाजपा में चले जाने तथा बाद में घर वापसी किए जाने के कारण उनके सामने भी टिकट का संकट है।

इसी प्रभाग से छोटू भोयर ने 2017 में भाजपा से ‘ड’ (सर्वसाधारण) सीट पर जीत दर्ज की थी। वे बाद में कांग्रेस में चले गए थे लेकिन अब भाजपा में लौटने की राह देख रहे हैं। भोयर भी अब ‘ब’ सीट से चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं। प्रभाग 20‘क’ सीट अब महिला ओबीसी प्रभाग के लिए आरक्षित हो गई है। इससे कांग्रेस के रमेश पुणेकर, इसी प्रभाग की सर्वसाधारण पुरुष वर्ग के लिए आरक्षित ‘ड’ सीट पर पूर्व उपमहापौर दीपराज पार्डिकर को चुनौती दे सकते हैं।

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