टैक्स डिमांड भेजने के लिए मनपा ने खर्च किए 60 लाख, स्पीड पोस्ट भी नहीं आया काम, बैरंग लौटी डिमांड

मनपा में कर्मचारियों के कमी के चलते सर्वाधिक आय के स्रोतों में से एक सम्पत्ति कर विभाग में कर्मियों की संख्या आधी है। यही कारण है कि कर वसूली के लिए मनपा ने नया प्लान बनाया जिसमें सम्पत्तिधारकों को कर्मचारियों के माध्यम से करों का डिमांड जारी करने की बजाय इसे स्पीड पोस्ट से भेजने का निर्णय लिया गया। जो कि सही नहीं साबित हो सका।
टैक्स डिमांड भेजने के लिए मनपा ने खर्च किए 60 लाख
नागपुर महानगर पालिका (सोर्स-सोशल मीडिया)
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नागपुर: मनपा में कर्मचारियों के कमी के चलते सर्वाधिक आय के स्रोतों में से एक सम्पत्ति कर विभाग में कर्मियों की संख्या आधी है। यही कारण है कि कर वसूली के लिए मनपा ने नया प्लान बनाया जिसमें सम्पत्तिधारकों को कर्मचारियों के माध्यम से करों का डिमांड जारी करने की बजाय इसे स्पीड पोस्ट से भेजने का निर्णय लिया गया। जो कि सही नहीं साबित हो सका।

स्पीड पोस्ट से डिमांड भेजने पर धारकों के पास कोई बहाना भी नहीं बचने की आशा जताई गई किंतु आलम यह रहा कि केवल टैक्स के डिमांड भेजने पर ही मनपा ने 60 लाख रुपए खर्च कर दिए। आश्चर्यजनक यह रहा कि भेजे गए डिमांड तो संबंधित सम्पत्तियों तक पहुंच थे किंतु कई घरों पर ताला लगा होने के कारण डिमांड वापस लौट आए। बताया जाता है कि चालू वित्तीय वर्ष के लिए कुल 5,64,188 डिमांड जारी किए गए थे। इनमें से 1,89,190 डिमांड वापस आ गए।

कई मामलों में गलत हो गए पते

प्राप्त जानकारी के अनुसार मनपा ने कर वसूली में सुधार की दृष्टि से डिमांड नोट स्पीड पोस्ट से भेजने के लिए एग्रीमेंट किया। प्रति डिमांड 32 रुपए स्पीड पोस्ट विभाग को दिए गए। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए सभी 10 जोन में लगभग 5,64,188 सम्पत्तिधारकों को डिमांड पहुंचने की अपेक्षा थी लेकिन कुछ गलत पते तो कुछ मामलों में घरों पर ताला लगा होने का हश्र यह हुआ कि 1.89 लाख डिमांड वापस आ गए।

इस तरह से 32 रुपए प्रति डिमांड के अनुसार 60,54,080 रुपए के खर्च पर पानी फिर गया है। अब 1.89 लाख डिमांड वापस आने के कारण करोड़ों के सम्पत्ति कर वसूली पर भी असर पड़ने की संभावना सूत्रों ने जताई। वापस आए डिमांड मनपा के कर्मचारियों के माध्यम से वितरित होने की जानकारी है।

कई सम्पत्तिधारक छूट से वंचित

प्राप्त जानकारी के अनुसार 30 जून तक ऑफलाइन कर भरने पर 10 प्रतिशत तक तथा ऑनलाइन कर अदा करने पर 15 प्रतिशत की छूट देने की घोषणा मनपा की ओर से की गई। सिटी में कुछ सम्पत्ति धारक ऐसे भी हैं जो डिमांड मिलते ही कर अदा कर देते हैं। ऐसे में उन्हें छूट का लाभ मिलता है और मनपा की तिजोरी भी भरती है किंतु अब 1.89 लाख डिमांड वापस आने पर एक ओर जहां कई अनुशासनप्रिय सम्पत्तिधारक इस छूट से वंचित हो जाएंगे। वहीं मनपा की वसूली पर भी इसका विपरीत असर पड़ेगा।

280 करोड़ रु. की वसूली का बोझ

प्राप्त जानकारी के अनुसार सम्पत्ति कर मनपा की आय का मुख्य स्रोत है। ऐसे में अब वितरीत नहीं हो पाए डिमांड के लिए मनपा के सभी 10 जोन में टीमों को काम पर लगाए जाएंगे। इस पुरानी पद्धति के कारण कर वसूली देरी से होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। पहले से 850 करोड़ के बकाया का बोझ ढो रही महानगरपालिका पर इस वर्ष के 280 करोड़ वसूली का भी बोझ बढ़ेगा। देरी होने के कारण वित्तीय वर्ष 2024-25 के राजस्व में कमी रहने की प्रबल संभावना सूत्रों ने जताई।

नेहरू नगर जोन से सर्वाधिक डिमांड वापस

बताया जाता है कि नेहरूनगर जोन में सर्वाधिक 49।18 प्रतिशत डिमांड वापस आए हैं। इस जोन में 84,206 डिमांड वापस हुए हैं। इसके अलावा हनुमान नगर जोन में 73,721 में से 22,213 डिमांड वापस आए हैं जो 30.12 प्रतिशत हैं। इसी तरह से आसीनगर जोन में 85,388 डिमांड में से 14,252 डिमांड, धरमपेठ जोन में 33,028 में से 8,357 डिमांड, गांधीबाग जोन में 25,829 में से 4,287, मंगलवारी जोन में 60,705 में से 12,040 और सतरंजीपुरा जोन में 36,986 में से 5,532 डिमांड वापस लौटे हैं। सबसे कम धंतोली जोन में 20,893 डिमांड में से केवल 1,089 डिमांड ही वापस आए हैं।

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