

नागपुर, प्रतिनिधि। सीपी रवींद्र कुमार सिंगल ने बुधवार को डीसीपी स्तर के अधिकारियों की तैनाती में फेरबदल किया। डीसीपी ईओडब्ल्यू अर्चित चांडक को अब शहर के यातायात विभाग की कमान सौंपी गई है, उनकी जगह पर डीसीपी ट्रैफिक शशिकांत सातव को ईओडब्ल्यू में तैनाती दी गई। भंडारा से तबादला होकर आए डीसीपी लोहित मतानी को एक बार फिर परिमंडल एक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सीपी ने बताया कि चांडक शहर के ही रहने वाले है। यहां की जनसमस्या उनसे बेहतर कौन समझेगा। इसीलिए अब शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी शहर के ही युवा डीसीपी को दी गई है।
गुरुवार को चांडक यातायात विभाग का पदभार ग्रहण करेंगे। नवभारत के साथ चर्चा में उन्होंने बताया कि सिटी में एक्सीडेंट पर प्रतिबंध लगाना बेहद जरूरी है। इसके लिए हर संभव कोशिश की जाएगी। सीपी ने उनपर विश्वास जताया है। वे खुद यातायात व्यवस्था को लेकर बेहद गंभीर है। उनके मार्गदर्शन में एक्सीडेंट कम करने के साथ ही यातायात व्यवस्था सुचारू रखना पहली प्राथमिकता होगी।
चांडक ने बताया कि सिटी में हर वर्ष हत्या की 90 के करीब वारदातें होती हैं। वहां किसी न किसी दुश्मनी या रंजिश होती है लेकिन एक्सीडेंट में 300 लोगों की जान जाती है। मेरे लिए यह हत्या की वारदातों से ज्यादा गंभीर बात है। दुर्घटना में किसी निर्दोष व्यक्ति की जान न जाए इसके लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। अकेले ट्रैफिक पुलिस यह काम नहीं कर सकती। इसके लिए अन्य विभागों के साथ मिलकर दुर्घटना रोकने के लिए प्रयास किए जाएंगे लेकिन इसमें सबसे ज्यादा सहयोग सिटी के नागरिकों को करना होगा। केवल और केवल यातायात नियमों का पालन करने से ही इन घटनाओं को रोका जा सकता है।
उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा मौतें सिर पर चोट लगने के कारण होती है। केवल पुलिस के डर से नहीं अपनी सुरक्षा के लिए नागरिकों को हेलमेट पहनना चाहिए। केवल चालान से बचने के लिए नहीं सिर बचे ऐसे सुरक्षित और आईएसआई मार्क वाले हेलमेट पहने। आईरैड के डाटाबेस और सेव लाइफ फाउंडेशन की मदद से एक्सीडेंट कम करने की योजनाओं पर पहले से काम चल रहा है। इसपर और गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि व्यस्त समय पर पुलिस की सड़कों और चौराहों पर उपस्थिति आवश्यक है। भले ही ट्रैफिक धीमा हो जाए लेकिन पुलिस रास्ते पर खड़ी है तो लोगों को यह विश्वास होता है कि उन्हें जल्दी ही राहत मिल जाएगी। इसके लिए सभी ट्रैफिक जोन के प्रभारियों को भी फील्ड पर उतरना होगा। विभाग के कर्मचारी अपने प्वाइंट पर ड्यूटी कर रहे हैं या नहीं इसकी निगरानी जरूरी है। कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाना भी जरूरी है। अधिकारियों का तो यहां से तबादला हो जाता है लेकिन यह शहर हमारा है और व्यवस्था भी हमें बनानी है इस उद्देश्य से कर्मचारियों को यातायात व्यवस्था संभालनी चाहिए।
सुबह 9.30 से दोपहर 12 और शाम को 5 से रात 9 बजे तक को कर्मचारियों को यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए अपने प्वाइंट पर ही उपस्थित रहना होगा। शहर में वाहनों की संख्या हर वर्ष बढ़ती जा रही है। दूसरी तरफ सड़कों के विकास काम चल रहे हैं। ऐसे में यातायात पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। शहर में बड़ी समस्या पार्किंग की भी है। हाई कोर्ट भी समस्या को लेकर गंभीर है। जल्द ही इस संबंध में महानगरपालिका के अधिकारियों के साथ बैठक कर पहले व्यस्त इलाकों में पार्किंग जोन निश्चित किए जाएंगे। फुटपाथ पैदल चलने वाले नागरिकों के लिए खुले रहे यह जरूरी है।