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पार्षद अभिजीत झा के अनुसार, प्रभाग 13 के सुरेंद्रगढ़ स्कूल भवन पर 2 करोड़ रुपए खर्च किए गए, लेकिन दो साल के भीतर ही इमारत में दरारें और सीपेज की समस्या सामने आई।
रवि नगर स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन 10 जून को हुआ था। आरोप है कि 19 लाख रुपए की लागत से बने भवन की टाइल्स उद्घाटन के तुरंत बाद टूटने लगीं।
मनपा आयुक्त की समीक्षा बैठकों में धरमपेठ जोन के डिप्टी इंजीनियर के तीन बार बुलाए जाने के बावजूद अनुपस्थित रहने का दावा किया गया।
Nagpur Municipal Corporation Corruption Allegations: सितंबर 2023 के बाद बाढ़ राहत के नाम पर धरमपेठ जोन में हुए कार्यों में भ्रष्टाचार और धांधली की कलई खुलने के बाद अब मनपा में धांधली का नया मामला उजागर हो रहा है। इस संदर्भ में भी आयुक्त से हुई शिकायत का हवाला देते हुए धरमपेठ जोन की जोन समिति सदस्य एवं पार्षद अभिजीत झा ने बताया कि स्कूल भवन और स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण में भी गड़बड़ी उजागर हो रही है।
धरमपेठ जोन के कार्यकारी अभियंता रहे विजय गुरूबक्षानी के कार्यकाल में ही तमाम कार्यों को अंजाम दिया गया। शायद उन्हें बचाने के लिए ही अधीक्षक अभियंता का अतिरिक्त कार्यभार देकर धरमपेठ जोन से मुख्यालय लाया गया है।
उनके विवादित कार्यकाल को देखते हुए ही मुख्यालय लाने के बाद उन्हें किसी तरह की मुख्य जिम्मेदारी नहीं दी गई है। दस्तावेजों के अनुसार उन्होंने कहा कि प्रभाग 13 स्थित सुरेंद्रगढ़ स्कूल के भवन पर 2 करोड़ रुपए खर्च किए गए, लेकिन महज 2 वर्षों के भीतर ही इमारत में दरारें और सीपेज की समस्याएं सामने आने लगी हैं।
इसी प्रकार रवि नगर स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (यूपीएचएससी) भवन का उद्घाटन 10 जून को हुआ था। 19 लाख रुपए की लागत से बने इस भवन के उद्घाटन के तुरंत बाद से ही वहां की टाइल्स टूटने लगी हैं।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए यह बात भी सामने आई है कि जिला योजना विकास समिति (डीपीडीसी) और बाढ़ नियंत्रण निधि के तहत स्वीकृत कार्यों में भारी डुप्लीकेशन किया जा रहा है। आजाद नगर (दीपक ढांडे से बिस्मिल्ला किराना) क्षेत्र में 150 मीटर नाले की दीवार के लिए 25 लाख रुपए का वर्क ऑर्डर डीपीडीसी के तहत ठेकेदार पवन गजभिये और कमलेश चौहान को दिया गया था, जबकि यही कार्य बाढ़ नियंत्रण योजना के तहत भी स्वीकृत दर्शाया गया।
प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि मनपा आयुक्त द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठकों में चरमपेठ जोन के डिप्टी इंजीनियर 3 बार बुलावा भेजे जाने के बावजूद उपस्थित नहीं हुए। बैठकों में सहायक आयुक्त और कार्यकारी अभियंता तो उपस्थित रहे, लेकिन संबंधित डिप्टी इंजीनियर गायब रहे। आरोप है कि सत्ता पक्ष के भारी दबाव के कारण शिकायतों के बावजूद न तो कोई विभागीय जांच हो रही है और न ही कोई कार्रवाई।
इसके साथ ही जोन सभापति द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर पत्र जारी करने और निधि आवंटन के प्रयास का मामला भी उजागर हुआ है, जिसे लेकर निगम सचिव को पत्र लिखा जा रहा है। शहर के मूलभूत विकास में भी भारी ढिलाई देखने को मिल रही है। सीपी क्लब से मदर डेयरी तक की सड़क का निर्माण 2023 में स्वीकृत होने, साइट विजिट होने और केंद्र सरकार से निधि प्राप्त होने के बावजूद पिछले 6 महीनों से अटका हुआ है।