प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur LPG Gas Cylinder Home Delivery Delay News: घरेलू गैस सिलेंडर की किल्लत अभी भी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी है। हालात यह हैं कि गैस एजेंसियों पर रोजाना सुबह से ही उपभोक्ताओं की भीड़ जुट रही है। बुकिंग कराने के 15 दिन बाद भी लोगों को होम डिलीवरी नहीं मिल पा रही है जिससे आम उपभोक्ता परेशान हैं। एजेंसी का सिलेंडर लदा वाहन जहां भी पहुंचता है लोग तुरंत वहां पहुंचकर कतार में लग जाते हैं लेकिन इसके बावजूद सभी को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है।
नागपुर शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थित गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लंबी-लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं। कई जगहों पर तो लोग 2-2 घंटे तक इंतजार करने के बाद भी खाली हाथ लौटने को विवश हैं। ऑनलाइन बुकिंग के बावजूद समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा है जिससे रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। वहीं गैस संकट का सबसे ज्यादा असर अब बाजार पर दिखने लगा है।
लोग वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की ओर रुख कर रहे हैं। खासकर इंडक्शन चूल्हों की मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी जा रही है। व्यापारियों के अनुसार सामान्य दिनों में जहां एक दुकान से एक या दो इंडक्शन चूल्हे बिकते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 10 से 15 प्रति दिन तक पहुंच गई है। यानी बिक्री में 4 से 5 गुना तक इजाफा हुआ है। इसके चलते अब इसका शॉर्टेज भी हो रहा है।
मांग बढ़ने के साथ ही इसकी कीमतों में भी तेजी आई है। पहले 2,500 से 3,000 रुपये में मिलने वाला इंडक्शन चूल्हा अब 3,500 से 4,000 रुपये तक बिक रहा है। धीरे-धीरे इंडक्शन चूल्हे दुकानों से कम होते जा रहे हैं। वहीं प्रशासन के अनुसार आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। आने वाले दिनों में स्थिति पूरी तरह ठीक हो जाएगी। उपभोक्ताओं को भी थोड़ा धैर्य बनाए रखने की जरूरत है। वहीं कई फुटपाथ दुकानदार अब कोयले के सहारे छोटी-छोटी भट्टियां जलाकर काम चला रहे है। इससे कोयले के दाम भी बढ़ गए हैं।
इंडक्शन चूल्हों के बढ़ते उपयोग से बिजली की खपत भी बढ़ गई है। इससे शहर के कई इलाकों में चिजली पर अत्तिरिक्त दबाव देखने को मिल रहा है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो बिजली व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
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ईरान पर अमेरिका-इजराइल द्वारा किए गए हमले के बाद डीजल-पेट्रोल की कमी व कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर तेजी से अफवाह फैली थी। पेट्रोल पंपों पर लोगों की जबरदस्त भीड़ लग गई थी। स्थिति काफी खराब हो गई थी। इसका परिणाम यह हुआ था कि कई पेट्रोल पंप सूख गए थे लेकिन स्थिति सामान्य हो गई। पेट्रोल पंपों पर सामान्य दिनों की तरह ही लोग वाहनों में तेल भरवाने के लिए पहुंच रहे हैं। आंकड़ों को देखें तो नागपुर जिले में पेट्रोल-डीजल की औसत मांग प्रति दिन 7-8 लाख लीटर रहती है लेकिन शुरुआत में 54 घंटे में 45 लाख लीटर डीजल-पेट्रोल की बिक्री हुई थी जो दोगुनी से अधिक रही।