नागपुर: 10 साल से जमीन के पट्टे को तरस रहे 68 परिवार, RTI का जवाब न मिलने पर सूचना आयोग सख्त

Nagpur Indiranagar SRA Scheme: नागपुर के इंदिरानगर बस्ती के 68 परिवार पिछले 10 वर्षों से जमीन के पट्टे के लिए भटक रहे हैं। सूचना आयोग ने अधिकारियों की अनुपस्थिति पर 28 सितंबर को पेशी तय की है।
Nagpur Land Patta Dispute
इंदिरानगर बस्ती के लोगप्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
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Nagpur Land Patta Dispute: नागपुर जिले में जरीपटका क्षेत्र स्थित इंदिरानगर बस्ती के 68 परिवार पिछले कई वर्षों से अपने हक के जमीन के पट्टों (स्वामित्व हक) के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

बुनियादी हक की जमीन के लिए संबंधित प्रशासनिक विभागों के चक्कर काटने के बावजूद कोई संतोषजनक जवाब न मिलने से इन परिवारों की पिछले 14 महीनों से लगातार भाग-दौड़ जारी है।

सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई कागजी जानकारी उपलब्ध न कराए जाने के बाद अब यह मामला राज्य सूचना आयोग की नागपुर खंडपीठ के समक्ष पहुंच गया है।

366 घरकुलों की योजना, पर 10 वर्षों से अटका हक

मौजा इंदोरा स्थित खसरा क्रमांक 25/1 में स्लम कोड 410 के अंतर्गत इंदिरानगर बस्ती आती है। वर्ष 2014 में बीएसयूपी योजना के तहत यहां 366 एसआरए (SRA) घरकुलों की योजना मंजूर की गई थी।

हालांकि इंदिरानगर गृह निर्माण सहकारी संस्था की सचिव सोनू खोब्रागडे के अनुसार, वर्ष 2016 के बाद दस्तावेजों में पैदा हुई विसंगतियों के कारण 68 परिवार आज तक अपने पट्टों से वंचित हैं।

3 विभागों की खींचतान और टालमटोल

नागपुर जिले में जरीपटका क्षेत्र स्थित इंदिरानगर बस्ती का प्रमाणित नक्शा प्राप्त करने के लिए संस्था की सचिव सोनू खोब्रागडे ने RTI के तहत आवेदन दिया था लेकिन महानगरपालिका के विभिन्न विभागों द्वारा जिम्मेदारी एक दूसरे पर थोपने का आरोप है।

उन्होंने बताया कि नक्शे से संबंधित जानकारी नगर रचना विभाग के पास उपलब्ध है लेकिन मामला स्लम विभाग की ओर मोड़ दिया। इस विभाग की ओर से अपेक्षित और स्पष्ट जानकारी प्रदान ही नहीं की गई।

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पीड़ित परिवारों आंदोलन की चेतावनी

संस्था ने आरोप लगाया है कि राज्य सूचना आयोग का समन जारी होने के बावजूद संबंधित अधिकारी सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए। गरीब परिवारों को पिछले 10 वर्षों से पट्टों से वंचित रखने और मौखिक व लिखित बयानों में विरोधाभास होने पर लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

इस मामले में राज्य सूचना आयोग की नागपुर खंडपीठ में 28 सितंबर को सुनवाई तय की गई है। आयोग ने मामले से जुड़े चारों अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी है। सचिव सोनू खोब्रागडे और पीड़ित परिवारों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस सुनवाई में भी उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे कड़ा आंदोलन करेंगे।

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