अवैध होर्डिंग पर नागपुर मनपा में घमासान, घाटकोपर हादसे का हवाला; सख्त कार्रवाई के निर्देश

Nagpur Illegal Hoardings: नागपुर मनपा में अवैध होर्डिंग को लेकर तीखी बहस। घाटकोपर हादसे का हवाला देते हुए पार्षदों ने 'बोगस ऑडिट' और मिलीभगत के आरोप लगाए, महापौर ने हटाने के सख्त निर्देश दिए।
Uproar in Nagpur Municipal Corporation over illegal hoardings, citing Ghatkopar tragedy; directives issued for strict action.
नागपुर अवैध होर्डिंग,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Encroachment Issue: नागपुर महानगर पालिका के सभागृह में शहर में फैले अवैध होर्डिंग, उससे होने वाले जानलेवा हादसों के खतरे और बढ़ते अतिक्रमण को लेकर भारी घमासान हुआ। पार्षद पिंटू झलके ने मुंबई के घाटकोपर हादसे का हवाला देते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली और होर्डिंग कंपनियों के साथ मिलीभगत पर गंभीर सवाल उठाए, लंबी और तीखी चर्चा के बाद महापौर ने शहर से सभी अवैध होडिंग और अतिक्रमण हटाने के सख्त निर्देश देते हुए वॉर्ड अधिकारियों (सहायक आयुक्तों) को इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया।

घाटकोपर हादसे से सबक नहीं, ऑडिट रिपोर्ट 'बोगस' चर्चा की शुरुआत में झलके ने बताया कि 227 वर्ग किलोमीटर में फैले शहर के 10 जोन में प्रशासन के अनुसार केवल 982 वैध होर्डिंग हैं। जवाब में उपायुक्त मिलिंद मेश्राम ने दावा किया कि नियमों के अनुसार हर 3 साल में इन सभी 982 होर्डिंग्स का स्ट्रक्चरल ऑडिट (स्थिरता प्रमाण पत्र) पंजीकृत इंजीनियरों द्वारा किया गया है।

हालांकि झलके ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इन ऑडिट रिपोर्ट्स को 'बोगस' करार दिया और दावा किया कि शहर के 50% से अधिक होडिंग नियम विरुद्ध हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें मनपा के अधिकारी भी शामिल हैं और इसके थर्ड पार्टी ऑडिट की मांग की।

बस शेल्टरों पर विज्ञापन, सुविधा नदारद पार्षद दर्शनी धवड ने बस शेल्टर की खस्ताहालत का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि शेल्टरों पर विज्ञापन तो लगाए गए हैं, लेकिन यात्रियों के बैठने के लिए बेंच तक नहीं हैं। कई जगह डिजिटल समय सारिणी बंद पड़ी है और बिजली के खुले मीटर हादसों को न्योता दे रहे हैं।

महापौर का कड़ा फैसला

अब वॉर्ड ऑफिसर होंगे जिम्मेदार चर्चा के अंत में महापौर ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सख्त निर्देश दिए कि सभी अवैध होर्डिंग्स को तुरंत निकाला जाए, उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम सभी के लिए समान हैं, चाहे वह राजनेता हो या निजी विज्ञापनदाता, महापौर ने यह भी आदेश दिया कि शहर में अवैध होर्डिंग और अतिक्रमण की रोकथाम की पूरी जिम्मेदारी अब संबंधित वॉर्ड अधिकारियों (वॉर्ड ऑफिसर) की होगी। यदि किसी क्षेत्र में बहर-बार अतिक्रमण होता है या अवैध होर्डिंग लगते हैं, तो सीधे वॉर्ड ऑफिसर पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बाउंड्री के बाहर और बिजली के तारों पर लटकते होर्डिंग

चवाँ के दौरान यह तथ्य भी उजागर किया गया कि नियमों (UDCPR और 2022 की नियमावली। के अनुसार कोई भी होर्डिंग भूखंड की बाहरी सीमारेखा के बाहर नहीं आना चाहिए लेकिन रेशमबाग चौक सहित शहर के कई हिस्सों में होर्डिंग इतने बाहर निकले हुए है कि किसी बड़े कंटेनर के टकराने से भीषण हादसा हो सकता है। इसके अलावा, हाई टेंशन और ली टेंशन बिजली लाइनों से 1.5 से 2 मीटर दूर होर्डिंग लगाने के नियम को ताक पर रखकर बिजली के तारों के एकदम पास होर्डिंग लगाए गए है। यह भी आरोप लगा कि 600 वर्ग फुट (20x30) की अनुमति लेकर होर्डिंग माफिया 625 वर्ग फुट (25x25) के ढांचे खड़े कर रहे हैं।

5 लाख रुपये जुर्माने के आदेश की अनदेखी

हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने सार्वजनिक जगहों पर लगे अवैध होर्डिंग पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया था लेकिन प्रशासन ने अब तक एक भी मामले में यह जुर्माना नहीं वसूला, बल्कि केवल कारण बताओ नोटिस जारी करने की औपचारिकता पूरी की है। सदस्यों ने कहा कि प्रशासन और होर्डिंग कंपनियों की साठगांठ के कारण मनपा की भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है। पार्षदों की ओर से भले ही आरोप लगाए गए हों, लेकिन उपायुक्त मिलिद मेश्राम ने कहा कि जो भी अवैध होर्डिंग्स सार्वजनिक स्थलों पर लगे हुए है, उनके खिलाफ जुर्माना वसूलने के आदेश दिए थे, जिसके अनुसार ऐसे सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

नेताओं और आम लोगों के बीच भेदभाव का आरोप

जोन के सहायक आयुक्तों ने शिकायत की थी कि जब वे अवैध होर्डिंग निकालते हैं तो राजनेताओं का भारी दवाव आता है और उन्हें मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है। इसके जवाब में पार्षदों ने पलटवार किया कि प्रशासन केवल चुनाव या नेताओं के बधाई बैनर पर ही एफआईआर करता है। जबकि निजी और व्यावसायिक विज्ञापनी (जैसे तुलसी तेल, योगा क्लास आदि) की अवैध होर्डिंग पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

मनपा मुख्यालय तक घिरा, एक बिल्डर को बचाने का आरोप

विपक्ष नेता संजय महाकालकर ने शहर में बढ़ते अतिक्रमण को लेकर भी प्रशासन को घेरा, उन्होंने आरोप लगाया कि सीताबर्डी मेन रोड पर अतिक्रमण विभाग के 3 दस्ते 24 घंटे केवल एक बिल्डर के 'ग्लोबल मॉल' के सामने अतिक्रमण रोकने के लिए तैनात किए गए हैं, जबकि पूरे शहर को लावारिस छोड़ दिया गया है।

मेडिकल कॉलेज की दीवार के पास वंजारी नगर से तुकडोजी पुतले तक भारी अतिक्रमण हो गया है। यहां तक कि मनपा के सिविल लाइंस स्थित मुख्य कार्यालय के बाहर भी अतिक्रमण का यह आलम है कि अधिकारियों और नगरसेवकों की गाड़ियां अंदर नहीं जा रही हैं।

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