नागपुर ताजबाग जमीन विवाद: क्या अतिक्रमणकारियों को मिलेगा मालिकाना हक? हाईकोर्ट ने मनपा की कार्रवाई पर लगाई रोक

Nagpur Tajbagh News: बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने हजरत बाबा ताजुद्दीन ट्रस्ट की जमीन पर अतिक्रमणकारियों को मालिकाना हक देने की मनपा की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
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बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Baba Tajuddin Trust Land Dispute News: ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व रखने वाले हजरत बाबा ताजुद्दीन ट्रस्ट (ताजबाग) की जमीन को लेकर एक बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। नागपुर के हजरत बाबा ताजुद्दीन ट्रस्ट को आवंटित जमीन में से कुछ हिस्से पर अतिक्रमणधारकों को मालकी पट्टे देने के लिए नागपुर महानगरपालिका की ओर से जोनल अधिकारी को निर्देश देते हुए पत्र जारी किया गया। कड़ी आपत्ति जताते हुए ट्रस्ट की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने इस पर अगली सुनवाई तक रोक लगाने की मांग की। याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने मालकी पट्टी की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने पर रोक लगा दी।

याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि यह कदम विशेष रूप से 'ताजबाग' जैसे निजी स्लम क्षेत्रों में रहने वाले अतिक्रमणकारियों के लिए उठाया जा रहा है, जिन्हें उनकी जमीनों के पट्टे पंजीकृत करके दिए जाने की कार्यवाही चल रही है जबकि संबंधित जमीन ताजबाग के सौंदर्यीकरण और विकास के लिए आवंटित की गई है।

प्रशासनिक कार्यवाही और दस्तावेजों की मांग

सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ को बताया गया कि नागपुर महानगरपालिका के 'झोपड़पट्टी आवंटन कक्ष' द्वारा इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए महानगर पालिका की ओर से जारी पत्र में ट्रस्ट को इस क्षेत्र से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज और संचार रिपोर्ट जमा करने के लिए निर्देशित किया गया है। इस प्रक्रिया में नेहरू नगर ज़ोन के सहायक आयुक्त की ओर से सूचनाएं दी गई हैं और नागरिकों से उनके स्वामित्व से संबंधित प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधि। वैरागडे और अधि। खान तथा महानगर पालिका की ओर से अधि। मेहाडिया तथा राज्य सरकार की ओर से अधि। दामले ने पैरवी की।

कानूनी पहलू और निजी संपत्ति का मुद्दा

इस पूरी प्रक्रिया में एक बड़ा पेंच यह है कि संबंधित भूमि एक निजी संपत्ति है। राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इसके अनुसार उक्त जमीन ट्रस्ट को दी गई जिसके बदले टीडीआर देने का निर्णय लिया गया। वह मामला भले ही अलग हो, लेकिन अब मनपा ने स्लम निवासियों के हित में कुछ लाभकारी प्रावधान लागू किए हैं।

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