नागपुर ZP के पास लीगल सेल ही नहीं! हाई कोर्ट ने लगाई फटकार, 4 हफ्ते में मांगा फैसला

Zilla Parishad Legal: नागपुर HC ने ZP में लीगल सेल नहीं होने पर नाराजगी जताई। अदालत ने ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव को सभी जिला परिषदों में सेल गठन पर 4 सप्ताह में निर्णय लेने के निर्देश दिए।
Nagpur ZP lacks a legal cell! High Court reprimands the body, seeks a decision within 4 weeks.
नागपुर हाई कोर्ट (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Nagpur Zilla Parishad Legal Cell: नागपुर जिले में मंगलवार को सुनवाई के दौरान जिला परिषद को उस समय हाई कोर्ट की नाराजगी झेलनी पड़ी जब एक मामले में स्वयं जिला परिषद ने उसके पास लीगल सेल नहीं होने का खुलासा किया। इसके लिए हलफनामा दायर करने में देरी होने की जानकारी भी कोर्ट को दी गई।

जिला परिषद के इस अजीबोगरीब खुलासे के बाद न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव को सभी जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) की बैठक बुलाने और अदालती मामलों के निपटारे के लिए 'लीगल सेल' के गठन पर विचार करने का आदेश दिया। अदालत ने प्रधान सचिव से इस मामले में 4 सप्ताह के भीतर निर्णय लेने की अपेक्षा की है। मनीषा राठौड़ ने जिला परिषद के खिलाफ हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की।

2024 में ही हटा दिया था वकील

सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए नागपुर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अदालत को बताया कि अदालती फाइलों को प्रोसेस करने के लिए उनके पास कोई अलग या विशेष विभाग नहीं है जिसके कारण जवाब दाखिल करने में देरी हुई।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि दिसंबर 2024 में तत्कालीन वकील को हटा दिया गया था और अब फाइलों के समयबद्ध निपटारे के लिए वकीलों की कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर नियुक्ति की गई है।

अदालत ने जिला परिषद के सीईओ द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदमों की सराहना की लेकिन इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि अदालती मामलों को लापरवाही से लेने और विशेष विभाग न होने की यह समस्या लगभग सभी जिला परिषदों में मौजूद है।

बेवजह बढ़ती हैं अवमानना याचिकाएं

अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि इस अभाव के कारण न तो समय पर जवाब दाखिल किए जाते हैं और न ही मामलों की ठीक से पैरवी की जाती है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सबसे गंभीर बात यह है कि अदालती आदेशों का पालन नहीं होता जिससे अदालतों में अवमानना की याचिकाएं बढ़ती हैं।

न्यायालय ने सख्त लहजे में कहा कि कई मामलों में जब हम मुख्य कार्यकारी अधिकारी से पूछते हैं कि अदालती आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया तो उनका एक ही रटा-रटाया और स्वाभाविक जवाब होता है कि आदेश उनके संज्ञान में नहीं लाया गया था।

प्रभावी तंत्र नितांत आवश्यक

कोर्ट ने कहा कि अदालती मामलों और आदेशों के समयबद्ध अनुपालन के लिए जिला परिषदों में एक प्रभावी तंत्र होना नितांत आवश्यक है, इसलिए हाई कोर्ट ने ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव से सभी जिला परिषदों के सीईओ के साथ बैठक कर कानूनी प्रकोष्ठ बनाने पर विचार-विमर्श करने को कहा है।

अदालत में मौजूद सहायक सरकारी वकील एनआर पाटिल को यह आदेश अनुपालन हेतु प्रधान सचिव तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने नागपुर जिला परिषद को उसी दिन अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।