‘रिपोर्ट नहीं, लापरवाह अफसरों के नाम चाहिए’, पेड़ों की दुर्दशा पर हाई कोर्ट का नागपुर मनपा को लगाई लताड़
Nagpur Cement Roads Tree Controversy: नागपुर में सीमेंट सड़कों के कारण दम तोड़ रहे पेड़ों पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मनपा से लापरवाह अधिकारियों की सूची और जवाब मांगा है।
- Written By: आकाश मसने
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ( सोर्स: सोशल मीडिया)
Bombay High Court Nagpur Bench On Environment Protection: नागपुर में सीमेंट रोड के निर्माण के दौरान पेड़ों के तने के पास जगह नहीं छोड़े जाने के कारण मृतप्राय हो रहे पेड़ों और शहर की हरियाली पर पड़ते असर को लेकर शरद पाटिल की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त लहजे में कहा था कि यदि निर्धारित समयसीमा तक काम पूरा नहीं होता है और इस संबंध में शपथ पत्र दाखिल नहीं किया जाता, तो प्रशासन को उन जिम्मेदार अधिकारियों के नाम बताने होंगे जो अपनी ड्यूटी निभाने में विफल रहे हैं।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने आदेश का पालन नहीं होने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए मनपा के लापरवाह अधिकारियों की सूची कहां है, इसका जवाब वकील से मांगा। सुनवाई के दौरान नागपुर मनपा की ओर से पैरवी कर रहे अधि। जैमीनी कासट ने कहा कि पेड़ों को मुक्त करने की प्रक्रिया जोनल स्तर पर हो रही है। इसका पूरा डेटा कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
कमेटी के समक्ष होना पड़ेगा पेश
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि सभी पेड़ों को एक माह के भीतर मुक्त करने के आदेश दिए गए थे लेकिन समय का ध्यान नहीं रखा गया जबकि आदेश का पालन होना चाहिए था। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि पेड़ों के तनों को सीमेंट कंक्रीट से मुक्त कराने की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। इस पर कोर्ट का मानना था कि अदालत ने कभी भी रिपोर्ट नहीं मांगी थी। इस कार्य में कितने कर्मचारियों को लगाया गया, कौन से अधिकारियों के नेतृत्व में काम हो रहा है, उनके नाम मांगे गए थे।
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हाई कोर्ट ने कहा कि हाल ही में उन्होंने सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के पास इसी तरह से पेड़ों की स्थिति देखी है। मनपा की ओर से बताया गया कि अब तक 4,123 पेड़ों को मुक्त किया गया है। कोर्ट ने कहा कि यदि लापरवाही बरती गई, तो अधिकारियों को समिति के समक्ष खड़े होना होगा। इसके बाद निर्णय लिया जाएगा।
9,000 तक पहुंच सकती है प्रभावित पेड़ों की संख्या
गत सुनवाई के दौरान नागपुर संभाग के संभागीय आयुक्त की रिपोर्ट पेश की गई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार शहर में 4,490 पेड़ पहले से ही ‘चोक’ (कांक्रीट से घिरे) पाए गए थे, जबकि 4,167 नए ऐसे पेड़ों की पहचान की गई है। इसके अतिरिक्त, कोर्ट द्वारा नियुक्त 3 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने भी 528 पेड़ों की पहचान कर उनकी तस्वीरें सौंपी हैं। कोर्ट ने अनुमान जताया कि इन आंकड़ों को मिलाकर कुल संख्या 9,000 तक पहुंच सकती है।
