एयरपोर्ट अथॉरिटी में नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी; नागपुर हाईकोर्ट से आरोपी रोहित थूल की अग्रिम जमानत खारिज

Airport Authority Job Fraud: एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 6.72 लाख रुपये की ठगी के आरोपी रोहित थूल की अग्रिम जमानत याचिका नागपुर हाई कोर्ट ने खारिज कर दी।
Fraud worth lakhs in the name of Airport Authority jobs; Nagpur High Court rejects anticipatory bail plea of ​​accused Rohit Thul.
नागपुर हाई कोर्ट, एयरपोर्ट अथॉरिटी, (सोर्स सोशल मीडिया)
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Nagpur AAI Job Scam Case: एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया में नौकरी दिलाने का झूठा वादा करके लाखों रुपये की ठगी करने वाले आरोपी रोहित ओमप्रकाश थूल को नागपुर हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। न्यायाधीश प्रवीण पाटिल की अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।

अदालत ने आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और पुलिस जांच में सहयोग न करने के उसके आचरण को देखते हुए यह फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार शिकायतकर्ता के भतीजे सारंग ने आरोपी रोहित धूल से उसकी पहचान कराई थी।

इसके बाद आरोपी ने एयरपोर्ट अथॉरिटी में नौकरी दिलाने का झूठा प्रलोभन देकर शिकायतकर्ता और उसके बेटे से 6,72,800 रुपये ठग लिए। शिकायतकर्ता द्वारा इस रकम के भुगतान का पूरा विवरण पुलिस को सौंपा गया है।

वाट्सएप पर भेजा फर्जी नियुक्ति पत्र

पैसे ऐंठने के बाद आरोपी ने शिकायतकर्ता को वाट्सएप के माध्यम से एक नियुक्ति पत्र भेजा जो कि पूरी तरह से फर्जी था। वास्तव में ऐसी कोई नियुक्ति की ही नहीं गई थी। इस धोखाधड़ी के मामले में बजाजनगर पुलिस थाना में 28 अक्टूबर 2025 को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316(2), 318(4), 336(3), और 340 (2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

मध्य प्रदेश में भी दर्ज है समान धोखाधड़ी

अदालत में सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी रोहित का यह पहला अपराध नहीं है। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की गंज पुलिस स्टेशन में भी उसके खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का एक समान मामला दर्ज है। उस मामले में वह 7 मई 2025 से जेल में था। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद अंततः 30 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उसे जमानत दी थी।

फरार घोषित कर दायर की गई चार्जशीट

सुप्रीम कोर्ट से जनवरी 2026 में जमानत मिलने के बाद भी आरोपी ने वर्तमान मामले में जांच अधिकारी को कोई सहयोग नहीं दिया। पुलिस को चकमा देने और जांब से बचने के कारण पुलिस ने उसे फरार घोषित करते हुए चार्जशीट अदालत में पेश कर दी।

बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी को गलत तरीके से फरार दिखाया गया है और मुख्य गवाह (सारंग) के बयान दर्ज नहीं किए गए हैं। हालांकि सरकारी वकील ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने संभवतः अन्य मासूम लोगों को भी इसी तरह ठगा होगा जिसका पता लगाने के लिए उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करना बेहद आवश्यक है।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि प्रथमदृष्ट्या आरोपी इस अपराध मे शामिल है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी के आपराधिक इतिहास और उसके असहयोगात्मक रवैये को देखते हुए वह अग्रिम जमानत का हकदार नहीं है और उसकी याचिका खारिज कर दी।

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