Nagpur High Court: नागपुर में आयातित माल की जब्ती से जुड़े मामले में चिया टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को हाई कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए 5 लाख रुपये जमा करने का आदेश दिया है। अदालत ने कंपनी पर सुनवाई के दौरान न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश का आरोप माना।
यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल पानसरे और निवेदिता मेहता की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को अगली सुनवाई से पहले यह राशि कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करनी होगी और व्यक्तिगत रूप से उपस्थित भी रहना होगा।
मामले में याचिकाकर्ता का दावा था कि आयातित चार कंटेनरों में स्केटबोर्ड थे, जबकि कस्टम विभाग ने इन्हें स्कूटर खिलौने बताया। सुनवाई के दौरान राइडर शिपिंग लाइंस के प्रतिनिधि और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयानों में विरोधाभास सामने आया।
एक कर्मचारी ने बताया कि उससे ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए गए, जिसमें उसे कंपनी से असंबंधित बताया गया, जबकि वह 2024 से कंपनी के लिए काम कर रहा था और भुगतान भी प्राप्त कर रहा था। इन बयानों को अदालत ने गंभीर माना।
हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ने अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया है। इससे पहले भी कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि गलत जानकारी देने पर जुर्माना और अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।
अदालत ने याचिकाकर्ता को दी गई अंतरिम राहत जारी रखने से भी इनकार कर दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई में कंपनी के प्रतिनिधि को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहकर जवाब देना होगा।
यह आदेश न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और सत्यता बनाए रखने के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है।