300 से अधिक मरीजों और डॉक्टरों की जान खतरे में: जर्जर इमारत में चल रहा नागपुर मेडिकल का नेत्र रोग विभाग

Structural Audit Delayed: नागपुर मेडिकल के नेत्र रोग विभाग की जर्जर इमारत का स्ट्रक्चरल ऑडिट शुल्क जमा होने के बावजूद साढ़े पांच महीने से नहीं हुआ। रोज 300 से अधिक मरीजों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे है।
Lives of over 300 patients and doctors at risk: Nagpur Medical's Ophthalmology Department operating in a dilapidated building.
नागपुर मेडिकल, नेत्र रोग विभाग,(फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Eye Hospital Building Safety: नागपुर शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल (मेडिकल) के नेत्र रोग विभाग की जर्जर इमारत का स्ट्रक्चरल ऑडिट शुल्क जमा होने के बावजूद अब तक नहीं हो सका है।

मेडिकल प्रशासन ने 5 मार्च को वीएनआईटी को 4 लाख 72 हजार रुपये का भुगतान कर दिया था, लेकिन साढ़े पांच महीने बीत जाने के बाद भी ऑडिट की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है।

जर्जर नेत्र रोग भवन में रोज 300 मरीजों का इलाज

मेडिकल का नेत्र रोग विभाग करीब डेढ़ दशक पहले परिवार कल्याण केंद्र की इमारत में स्थानांतरित किया गया था। उस समय भी भवन को असुरक्षित माना गया था लेकिन केवल मरम्मत कर काम चलाया गया।

वर्तमान में इस इमारत में प्रतिदिन 300 से अधिक मरीजों का इलाज किया जाता है। भवन की दीवारों में दरारें, जगह-जगह उखड़ा प्लास्टर और कमजोर हो चुकी संरचना के कारण मरीजों, डॉक्टरों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। नई इमारत के निर्माण की मांग लंबे समय से उठ रही है।

ऑडिट के लिए 4.72 लाख शुल्क निर्धारित

इसी बीच भवन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए वीएनआईटी से स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया। वीएनआईटी ने ऑडिट के लिए 4.72 लाख रुपये शुल्क निर्धारित किया था।

मेडिकल प्रशासन ने 5 मार्च को आरटीजीएस के माध्यम से यह राशि जमा कर निदेशक को भुगतान की जानकारी भी दी और जल्द ऑडिट कराने का अनुरोध किया।

इसके बावजूद अब तक ऑडिट शुरू नहीं हो पाया। लंबित ऑडिट के कारण जर्जर भवन में उपचार कार्य जारी है।

ऐसी स्थिति में मरीजों और अस्पताल कर्मियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्ट्रक्चरल ऑडिट में हो रही देरी पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

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