नागपुर मनपा की बड़ी विफलता: विजनरी प्रोजेक्ट के नाम पर 16.41 करोड़ स्वाहा, बदहाली का शिकार हुई हेल्दी स्ट्रीट

Nagpur Healthy Street: नागपुर में 16.41 करोड़ रुपये की लागत से बना हेल्दी स्ट्रीट प्रोजेक्ट बदहाल स्थिति में पहुंच गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह वॉकएबल स्ट्रीट अब कचरे का केंद्र बन गई है।
Major failure of Nagpur Municipal Corporation: ₹16.41 crore squandered on a 'visionary project'; 'Healthy Street' falls into a state of disrepair.
नागपुर हेल्दी स्ट्रीट, वीएनआईटी,(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Nagpur Healthy Street Project: नागपुर शहर में विजनरी प्रोजेक्ट के नाम पर शहर की जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये किस तरह बर्बाद किए जाते हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण 'हेल्दी स्ट्रीट' प्रोजेक्ट है। वीएनआईटी से बजाज नगर (काचीपुरा) तक बनाए गए इस वॉकएबल स्ट्रीट प्रोजेक्ट पर 16.41 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद आज यह जगह 'स्मार्ट' बनने के बजाय 'कचरा घर' और 'शराबियों का अड्डा' बनकर रह गई है। महानगर पालिका (मनपा) की प्रशासनिक विफलता का आलम यह है कि जिस सड़क को 'हेल्दी' बनाने का सपना दिखाया गया था, वहां अब लोग गुजरने से भी कतरा रहे हैं।

करोड़ों का निवेश, नतीजा सिफर

मार्च 2023 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट 2025 के अंत में जाकर तैयार हुआ। निर्माण तो हो गया, लेकिन जिस मुख्य उद्देश्य 'फूड स्ट्रीट' के लिए इसे बनाया गया था, वह पूरी तरह गायब है।

मनपा अब तक एक भी फूड स्टॉल के लिए जगह उपलब्ध नहीं करा पाई है। नतीजा यह है कि करोड़ों की यह सुंदर स्ट्रीट अब वाहनों की पार्किंग और असामाजिक तत्वों का ठिकाना बन गई है।

बदहाली और गंदगी का आलम

  • स्थानीय रहवासियों का जीना मुहाल हो गया है। सुबह-शाम यहां शराब पीने वालों का कब्जा रहता है।
  • सड़क पर बिखरी शराब की बोतलें और फैली गंदगी इसे किसी डंपिंग यार्ड जैसा दिखाती हैं।
  • स्थानीय लोगों के लिए सड़क पर चलना और वाहनों का आवागमन मुश्किल हो गया है। कई बार शिकायतें दर्ज कराई गई, लेकिन मनपा के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।

35 करोड़ का नया 'जुगाड़' और विरोध

अपनी नाकामी छुपाने के बजाय मनपा प्रशासन अब इसी प्रकार के अन्य प्रोजेक्ट के नाम पर बजट में 35 करोड़ रुपये का और प्रावधान कर रहा है। इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नगरसेवक केतन ठाकरे ने कड़ा विरोध जताया है।

ठाकरे ने सवाल किया है कि जिस 16.41 करोड़ के पहले प्रोजेक्ट का हाल बुरा है, उससे सबक न लेते हुए शहर के दूसरे हिस्सों में प्रोजेक्ट बनाने की तैयारी केवल पैसे की बर्बादी है। 35 करोड़ डुबाने की पूरी व्यवस्था कर दी गई है, उन्होंने इसे सरासर फिजूलखर्ची करार देते हुए कहा कि जनता के पैसे का सदुपयोग करने के बजाय प्रशासन केवल बजट को ठिकाने लगाने की जुगत में लगा है।

  • 16.41 करोड़ खर्च करने के बाद भी रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित क्यों नहीं की गई।
  • जब पहला प्रोजेक्ट फेल साबित हो रहा है, तो बिना जवाबदेही तय किए 35 करोड़ का नया प्रस्ताव क्यों लाया जा रहा है।
  • क्या नागपुर मनपा प्रशासन के पास शराबियों के अड्डे बन चुके इस वॉकवे को हटाने का कोई ठोस प्लान है।
  • प्रशासन की इस कार्यप्रणाली ने शहर के विकास की नीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए है। देखना यह है कि क्या अब भी कोई जिम्मेदार
  • अधिकारी इस बदहाली की सुध लेगा या 35 करोड़ का नया बजट भी इसी तरह पानी में बहा दिया जाएगा।

टूटने की कगार पर पहुंची कलाकृति

निश्चित रूप से अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता तो सिटी की खूबसूरती में चार चांद लगा देता, लेकिन न तो फूड के लिए किसी को जगह उपलब्ध कराई गई है और न ही इसे बसाने का कोई प्रयास किया गया है। आधे अधूरे प्रयास अब 'पोल' खोल रहे हैं। पैसे की बर्बादी देखनी हो तो यहां पर देखी जा सकती है।

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