नागपुर की ‘सेहत’ पर खतरे की घंटी: NEERI रिपोर्ट में प्रदूषण; शोर और जल संकट का खुलासा
Nagpur Environment Report: नागपुर की पर्यावरण रिपोर्ट 2024-25 में वायु, शोर प्रदूषण और गिरते जल स्तर पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट 22 अप्रैल को मनपा सभा में पेश होगी।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर पर्यावरण रिपोर्ट( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nagpur Urban Environment Crisis: नागपुर राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (नौरी) द्वारा महानगर पालिका (मनपा) के लिए तैयार की गई ‘पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट 2024-25’ ने शहर की सेहत को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है। रिपोर्ट के अनुसार नागपुर वायु प्रदूषण, अत्यधिक शोर और गिरते जल स्तर जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। यह रिपोर्ट 22 अप्रैल को एनएमसी की आम सभा में पेश की जाएगी।
हवा में घुलता जहर (वायु प्रदूषण)
रिपोर्ट के मुताबिक नागपुर में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा निर्धारित सीमा से लगातार ऊपर बना हुआ है।
समय का प्रभाव: हवा में प्रदूषण का स्तर देर शाम और रात के समय सबसे अधिक होता है, नीरी ने इसका मुख्य कारण यातायात, विशेष रूप से देर रात घर लौटने वाले व्यापारियों और दोपहिया वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को बताया है।
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क्षेत्रवार स्थितिः महल क्षेत्र में मई-जून और सर्दियों में प्रदूषण अधिक रहता है, जबकि राम नगर में अप्रैल और नवंबर में एक्यूआई का स्तर बढ़ जाता है।
शोर का बढ़ता स्तर (ध्वनि प्रदूषण)
शहर के 10 जोन में किए गए सर्वेक्षण में ध्वनि प्रदूषण के नियमों का भारी उल्लंघन पाया गया, अस्पताल और स्कूलों जैसे ‘साइलेंस जोन’ में भी शोर का स्तर बहुत अधिक है।
नदियों और भूजल की बदहाली
नागपुर की नदियों का पानी अब पीने, नहाने या खेती के योग्य भी नहीं बचा है।
नदी का पानीः सीवेज (गंदा पानी) सीधे नदियों में छोड़े जाने और कचरा फेंकने के कारण पानी में फॉस्फेट और हानिकारक बैक्टीरिया की मात्रा बहुत बढ़ गई है।
ग्राउंड वाटरः भूजल के नमूनों में भी बैक्टीरिया का संक्रमण पाया गया है। कई जगहों पर टीडीएस का स्तर 2,200 एमजी-एल तक पहुंच गया है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। साथ ही कुछ इलाकों में भूजल स्तर में हर साल 0.40 मीटर की गिरावट दर्ज की जा रही है।
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नीरी ने दिए सुझाव
नीरी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि ये चुनौतियां व्यवस्थागत और स्थायी हैं। शहर को पर्यावरण के विनाश से बचाने के लिए सख्त नीतियों, ठोस प्रवर्तन और टिकाऊ शहरी नियोजन की तत्काल आवश्यकता है।
