Nagpur News: धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस के अवसर पर 22 अक्टूबर 2015 को राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा दीक्षाभूमि के लिए आर्थिक सहायता और जमीन देने की घोषणा की गई थी लेकिन एक दशक बीत जाने के बाद भी यह वादा अधूरा है। बहुजन समाज पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार जानबूझकर दीक्षाभूमि स्मारक समिति को जमीन न देने का षड्यंत्र रच रही है और इसके उत्तरी मार्ग पर ही अवैध निर्माण शुरू कर दिया है।
बसपा के अनुसार प्रन्यास के तत्कालीन सभापति श्याम वर्धने के माध्यम से नोएडा की एक कंपनी से स्मारक के विकास का डिज़ाइन तैयार करवाया गया था। 29 नवंबर 2015 को मुख्यमंत्री के रामगिरी आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी जिसमें पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, पूर्व महापौर दटके, प्रन्यास के पूर्व सभापति श्याम वर्धने, पूर्व मनपा आयुक्त श्रावण हार्डिकर और स्मारक समिति के सदानंद फुलझेले मौजूद थे।
सरकार का ब्लूप्रिंट और मास्टर प्लान इस महत्वपूर्ण बैठक में दीक्षाभूमि स्मारक के विकास के लिए 3 चरण निर्धारित किए गए थे। पहले चरण में कॉटन रिसर्च सेंटर की 3.84 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर वहां के निर्माण कार्य को ढहाकर पुनर्निर्माण करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद 27 मार्च 2018 को मुंबई मंत्रालय में मुख्य सचिव की उपस्थिति में उच्चाधिकार समिति की बैठक भी हुई थी। दूसरे चरण के तहत स्वास्थ्य विभाग की 12 एकड़ जमीन पर नागरी सुविधाएं, जल आपूर्ति, सबवे, पार्किंग, पुस्तकालय, सूचना केंद्र, सुरक्षा व्यवस्था और प्रसाधन गृह आदि बनाने की योजना थी।
योजनाओं की अनदेखी से जनता में आक्रोश बसपा के उत्तम शेवडे का कहना है कि सरकार ने मूल योजना की अनदेखी करते हुए स्मारक के ठीक बगल में अंडरग्राउंड पार्किंग का काम शुरू कर दिया जिससे भारी जन आक्रोश फैला और परिणामस्वरूप एक साल पहले वह काम बंद पड़ गया।
अब कॉटन रिसर्च की जगह पर उत्तरी मुख्य प्रवेश द्वार पर और स्वास्थ्य विभाग की जगह पर पूर्वी मुख्य प्रवेश द्वार के सामने सरकार की ओर से अवैध रूप से भव्य निर्माण कार्य शुरू किया गया है। यह निर्माण कार्य अविलंब रोका जाए और मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप कॉटन रिसर्च सेंटर व स्वास्थ्य विभाग को लीज पर दी गई जमीन तुरंत दीक्षाभूमि स्मारक समिति को सौंपी जाए, ताकि विकास कार्य में कोई बाधा न आए।
अदालत में 7 साल से तारीख पे तारीख शेगांव, शिर्डी, नाशिक, त्र्यंबकेश्वर, पंढरपुर और कोराडी जैसे धार्मिक स्थलों की तर्ज पर दीक्षाभूमि का भी सौंदर्यीकरण और विस्तार करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अधि. शैलेश नारनवरे ने 2018 में हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। पिछले 7 सालों में सरकार ने इस याचिका पर कोई ठोस जवाब दाखिल नहीं किया है और केवल तारीख पे तारीख का सिलसिला चल रहा है।
हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान एनएमआरडीए ने प्रकल्प के लिए पीएमसी प्रकल्प सलाहकार नियुक्त करने के लिए फिर से टेंडर प्रक्रिया करने की जानकारी दी। एनएमआरडीए ने कोर्ट को बताया कि पहले जारी टेंडर में किसी भी सलाहकार कंपनी ने हिस्सा नहीं लिया जिससे फिर से ईटेंडर बुलाया गया है।