सावधान! क्या आपका CA भी बदल रहा है आपकी ईमेल आईडी? नागपुर में ऐसे हुआ ₹72 लाख का 'जीएसटी खेल'

Nagpur CA GST Fraud: 72 लाख के जीएसटी घोटाले में नागपुर के सीए अवि भोयर को हाई कोर्ट से मिली सशर्त जमानत। जाली रसीदें और ईमेल आईडी बदलकर धोखाधड़ी का था आरोप। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Nagpur High Court grants conditional bail to CA Avi Bhoyar in ₹72 lakh GST fraud case. Accused to deposit ₹10 lakh in installments. Details of the scam here.
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
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Avi Bhoyar Chartered Accountant: नागपुर विभाग में जीएसटी जमा करने के नाम पर 72 लाख की धोखाधड़ी किए जाने का आरोप लगाते हुए बालाजी इन्फ्रा कंपनी के मालिक सुनील बट्टुवार की ओर से पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5), 336(4), 338 और 340(2) के तहत मामला दर्ज कर चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) अवि नरेंद्र भोयर को गिरफ्तार कर लिया जिसमें जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।

सुनवाई के बाद न्यायाधीश एमएम नेरलीकर ने मामले की प्रकृति और जांच की स्थिति को देखते हुए याचिकाकर्ता सीए अवि भोयर को सशर्त जमानत प्रदान कर दी। याचिकाकर्ता की अधिवक्ता राजेन्द्र डागा ने पैरवी की।

दी थीं जाली इलेक्ट्रॉनिक रसीदें

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनके सीए अवि भोयर ने जीएसटी जमा करने के नाम पर समय-समय पर उनसे कुल 72,30,431 रुपये लिए थे। हालांकि आरोपी ने यह राशि सरकारी खजाने में जमा कराने की बजाय इसका गबन कर लिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने क्लाइंट को गुमराह करने के लिए जीएसटी की जाली इलेक्ट्रॉनिक रसीदें दी थीं जिनमें केवल 1,21,030 रुपये का भुगतान दिखाया गया था।

इतना ही नहीं, आरोपी ने 2017 में जीएसटी विभाग के रिकॉर्ड में अपना मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज कर दिया था। इस वजह से विभाग द्वारा भेजे गए डिफॉल्ट नोटिस या ओटीपी सीधे आरोपी के पास जाते थे और शिकायतकर्ता को अपनी कंपनी का जीएसटी नंबर रद्द होने तक इस धोखाधड़ी की भनक भी नहीं लगी।

जांच पूरी, चार्जशीट भी दायर

याचिकाकर्ता की पैरवी कर रहे अधिवक्ता राजेन्द्र डागा ने सुनवाई के दौरान बताया कि पूरा मामला दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है और जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, इसलिए आरोपी को जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए आरोपी को 25,000 रुपये के पी।आर। बॉन्ड और इतनी ही राशि की एक जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

याचिकाकर्ता के रिश्तेदार संजय गोर्वडकर द्वारा कोर्ट को दिए गए वचन के अनुसार वे अप्रैल 2026 से हर महीने 1 लाख रुपये की 10 किस्तों में कुल 10 लाख रुपये न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की अदालत में जमा करेंगे। शिकायतकर्ता इस राशि को निकाल सकेगा। इसी तरह से सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने की भी शर्त रखी गई।

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