Nagpur News: बौद्ध अनुयायियों का महाबोधि महाविहार मुक्ति के लिए विशाल‘शांति मार्च’,कानून में बदलाव की मांग
बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार मुक्ति हेतु बौद्ध अनुयायियों ने उपराजधानी में मंगलवार को दीक्षाभूमि से संविधान चौक तक शांति मार्च निकालकर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
- Written By: आंचल लोखंडे
बौद्ध अनुयायियों का महाबोधि महाविहार मुक्ति के लिए विशाल‘शांति मार्च’। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
नागपुर: बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार मुक्ति हेतु बौद्ध अनुयायियों ने उपराजधानी में मंगलवार को दीक्षाभूमि से संविधान चौक तक शांति मार्च निकालकर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीक्षाभूमि का दौरा किया था। उस समय परम पूज्य डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक समिति के अध्यक्ष ने अनुरोध किया था कि महाबोधि महाविहार को बौद्ध समुदाय को सौंप दिया जाए, ऐसी मांग भी की थी। वर्तमान में महाबोधि महाविहार हिंदू समुदाय के पास है। इसे बौद्ध समुदाय को हस्तांतरित करने के लिए कानून में बदलाव की मांग करने की आवश्यकता है।
इसी मांग को लेकर मंगलवार को बौद्ध अनुयायियों ने हाथों में पंचशील ध्वज लेकर पवित्र दीक्षा भूमि से शांति मार्च निकाला। लगभग चार किलोमीटर लंबी यह रैली संविधान चौक पहुंची। बारिश के बावजूद रैली जारी रही। वहां पूज्य भंते और विभिन्न संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों ने मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन भी सौंपा जिसमें आकाश लामा, भिक्खु संघ, समता सैनिक दल, भारतीय बौद्ध महासभा और अन्य बौद्ध संगठनों की ओर से बोधगया में चल रहे आंदोलन प्रदर्शन के प्रति समर्थन व्यक्त किया। यह बोधगया मंदिर अधिनियम – 1949 को निरस्त करने और महाविहार को बौद्धों के पूर्ण नियंत्रण में सौंपने की लड़ाई है। अब यह लड़ाई देश-विदेश में उग्र रूप ले चुकी है।
विभिन्न संगठनों का सहभाग
मार्च में भदंत प्रियदर्शी, भदंत नागदीपंकर, भदंत शीलवंस, भदंत नागसेन, भदंत चंद्रकीति, भदंत हर्षदीप ने संबोधित किया। आदरणीय देवानंद और बड़ी संख्या में भिक्षु एवं भिक्षुणियां उपस्थित थे। मार्च की सफलता के लिए नरेश वाहने, विलास नितनवरे, सुनील शेंडे, मनोहर गायकवाड़, जयंत इंगले, सुनील सारिपुत्ता, रंजीत रामटेके, राजेश ढेंगरे, पृथ्वी मोटघरे, अमर दीपांकर, पुष्पा घोडके, पद्माकर गणवीर और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने भी इस मार्च में सहभाग लिया।
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भिक्खूगण के पीछे अनुशासित रैली
शांति मार्च में भिक्खूगण के पीछे श्रामणेर, उपासिका, ज्येष्ठ नागरिक तथा विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने अनुशासित रैली संविधान चौक तक निकाली। सबसे आगे रथ था जिसमें तथागत गौतम बुद्ध, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और सम्राट अशोक की तस्वीर थी। इसके पीछे समता सैनिक दल की टीम ने सुरक्षा की कमान संभाली। मार्च में शामिल हजारों अनुयायी सफेद कपड़े, सिर पर नीली टोपी और हाथों में पंचशील झंडे लेकर शामिल हुए। वहीं किसी के हाथों में बीटी एक्ट रद्द करने के पोस्टर दिखे। शांति मार्च को शहर और विदर्भ के सैंकड़ों संगठनों की ओर से समर्थन दिया गया है।
