Nagpur Ambazari Park News: अंबाझरी बायोडायवर्सिटी पार्क में बार-बार लगने वाली जंगल की आग बड़ी चुनौती बनती जा रही है। करीब 758 हेक्टेयर में फैले इस पार्क को वर्ष 2024 में मार्च और मई माह में लगी भीषण आग से भारी नुकसान झेलना पड़ा था, जिससे जैव विविधता प्रभावित हुई। हालांकि 2025 में ऐसी कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई, फिर भी हाल ही में आग लगने की घटना ने फिर चिंता बढ़ा दी है।
वन विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि आग प्राकृतिक कारणों से लगी या मानवजनित थी। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ‘पैंथेरा’ प्रणाली कारगर साबित हो सकती है।
पेंच टाइगर रिजर्व के कोलितमारा वन क्षेत्र में यह प्रणाली पहले से लागू है और वहां सफल परिणाम दे रही है। ऊंचे स्थानों पर लगाए गए कैमरे और सेंसर जंगल में लगने वाली आग का सटीक स्थान पहचानने में सक्षम हैं। हालांकि अंबाझरी पार्क समतल क्षेत्र में स्थित है, फिर भी इस तकनीक के माध्यम से यहां भी आग की घटनाओं पर शीघ्र नियंत्रण संभव माना जा रहा है।
अग्निशमन विभाग के अनुसार मार्च और मई 2024 में लगी आग ने पार्क के कई औषधीय पौधों को नुकसान पहुंचाया, वहीं पक्षियों का पलायन भी देखा गया। वर्ष 2021 से 2024 के बीच आग की घटनाओं से पार्क को लगातार क्षति पहुंची है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि ‘पैंथेरा’ प्रणाली स्थापित कर उसका डैशबोर्ड नजदीकी अग्निशमन केंद्र से जोड़ा जाए, तो आग लगने की सूचना तत्काल मिल सकेगी और समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी।
यह एक उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक है, जिसमें उच्च-रिजॉल्यूशन कैमरे, सेंसर और उपग्रह डेटा का उपयोग किया जाता है। यह प्रणाली धुएं और बादलों में अंतर कर सकती है तथा तीन मिनट से भी कम समय में जंगल की आग का रियल-टाइम अलर्ट जारी करती है।
कोलितमारा वन क्षेत्र में स्थापित यह प्रणाली नियंत्रण कक्ष से जुड़ी है और लगातार निगरानी करती है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या धुएं के संकेत मिलते ही यह तुरंत अलर्ट भेजती है, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो पाती है।