

नागपुर और आसपास के शहरों की भविष्य की पेयजल जरूरतों के लिए 1,300 करोड़ रुपये की दो योजनाएं प्रस्तावित।
कन्हान-कोलार नदी पर 900 करोड़ रुपये की लागत से बैराज बनाने की योजना।
पेंच बांध में उपलब्ध अतिरिक्त 35 MLD पानी के उपयोग के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रस्ताव।
नागपुर के 860 सार्वजनिक कुओं में से 400 पर सौर ऊर्जा आधारित दोहरी पंपिंग प्रणाली लगाई जाएगी।
Chandrashekhar Bawankule Nagpur News: नागपुर जिले के विदर्भ में जलसंकट से निपटने के लिए प्रशासन एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। इस संबंध में नागपुर और आसपास के तेजी से विकसित हो रहे शहरों की भविष्य की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए 1,300 करोड़ रुपये की 2 बड़ी जलापूर्ति योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।
इसमें 900 करोड़ रुपये की लागत से कन्हान-कोलार नदी पर बैराज का निर्माण तथा एनएमआरडीए की ओर से 400 करोड़ रुपये से पेंच बांध में अतिरिक्त बचे 35 एमएलडी पानी का उपयोग कर आसपास के शहरों को जलापूर्ति करने की योजना शामिल है।
दोनों योजनाओं के प्रस्ताव तैयार कर तत्काल राज्य सरकार को भेजने के निर्देश पालक मंत्री एवं राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मनपा, एनएमआरडीए और जलसंपदा विभाग को दिए हैं। पेयजल संकट से निपटने के उपायों की समीक्षा के लिए पालक मंत्री बावनकुले ने शनिवार को नियोजन भवन में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक ली।
बैठक में वित्त एवं नियोजन राज्य मंत्री आशीष जायसवाल, महापौर नीता ठाकरे, सांसद माया इवनाते, विधायक राजीव पोद्दार, संजय भेंडे, कृष्णा खोपड़े, प्रवीण दटके, उपमहापौर लीला हाथीबेड, स्थायी समिति की सभापति शिवानी दाणी-वखरे, सत्ता पक्ष नेता बाल्या बोरकर, मनपा आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर, एनआईटी के सभापति संजय मीणा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में पालक मंत्री ने कहा कि नागपुर और आसपास के शहरों में बढ़ती आबादी के साथ पानी की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। भविष्य में जलसंकट की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए स्थायी जलस्रोत विकसित करना जरूरी है।
इसी उद्देश्य से कन्हान-कोलार नदी पर बैराज निर्माण की योजना दोबारा प्रस्तावित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस परियोजना पर करीब 900 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं पेंच बांध में 35 एमएलडी पानी अतिरिक्त उपलब्ध है।
इस पानी के उपयोग के लिए एनएमआरडीए के माध्यम से 400 करोड़ रुपये की योजना प्रस्तावित की गई है। प्रस्ताव को राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।
शहर में उपचारित गंदे पानी के पुन उपयोग की योजना भी बनाई गई है। इसके तहत 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में हाइडेंट लगाए जाएंगे। यहां से टैंकरों के माध्यम से उद्यानों और सड़क किनारे लगे पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
बैठक में मनपा आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर ने वर्ष 2026 के अल बचत एवं जल संरक्षण अभियान का प्रस्तुतीकरण किया, उन्होंने बताया कि शहर में पानी की लीकेज रोकने के लिए तत्काल उपाय किए जा रहे है।
इसके अलावा वर्षा जल संचयन (रेन वॉटर हार्वेस्टिंग) को भी प्रोत्साहित किया जाएगा, शहर के सार्वजनिक कुओं का अधिकतम उपयोग करने के लिए लघु जलापूर्ति योजनाएं शुरू की जाएंगी, नागपुर में कुल 860 सार्वजनिक कुएं हैं।
इनमें से 400 कुओं पर सौर ऊर्जा आधारित दोहरी पंपिग प्रणाली स्थापित की जाएगी। इस परियोजना पर करीब 16 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे प्रतिदिन 20 एमएलडी पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
400 कुओं पर सौर ऊर्जा आधारित प्रणाली
दोहरी पंपिग प्रणाली पर 16 करोड़ का खर्च
कुओं से प्रतिदिन 20 एमएलडी पानी
10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में लगेंगे हाइड्रेट
293 वाहन धुलाई केंद्रों का सर्वेक्षण
नागपुर मनपा ने शहर के 293 वाहन घुलाई केंद्रों का सर्वेक्षण किया है। इनमें से 75 केंद्रों पर नल के पीने योग्या पानी का इस्तेमाल किए जाने पर नोटिस जारी किए गए है।
इन केंद्रों को पीने के पानी के बजाय अन्य स्रोतों से पानी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। मनपा आयुक्त ने चताया कि कार धोने के लिए मनपा के नल का पानी इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कनेक्शन काटने की कार्रवाई भी की जा रही है,