नागपुर मनपा परिवहन विभाग में 200 करोड़ का घोटाला! विपक्ष ने सबूतों के साथ खोली कुप्रबंधन व भ्रष्टाचार की पोल

Nagpur NMC Transport Department: नागपुर मनपा के परिवहन विभाग में सिटी बस संचालन को लेकर बड़े घोटाले का आरोप लगा है। विपक्ष ने सबूतों के साथ 190-200 करोड़ के नुकसान का दावा करते हुए जांच की मांग की।
₹200 crore scam in the Nagpur Municipal Corporation's Transport Department! Opposition exposes mismanagement and corruption with evidence.
नागपुर मनपा, परिवहन विभाग,(फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Nagpur NMC Transport Department Aapli Bus: नागपुर मनपा का परिवहन विभाग आए दिन किसी न किसी कारगुजारी के कारण सुर्खियों में है। इसी श्रृंखला में सोमवार को उस समय परिवहन विभाग में कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और ऑपरेटरों की मनमानी का एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ, जब विपक्ष नेता संजय महाकालकर और परिवहन समिति के सदस्य शैलेश पांडे ने सबूतों के साथ परिवहन विभाग में महाघोटाले के सबूत पेश किए।

परिवहन समिति सदस्य दिनेश यादव भी उपस्थित थे। इस संदर्भ में संजय महाकालकर और शैलश पांडे ने कहा कि शहर में चल रहीं सिटी बसों के संचालन में बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है, जिससे मनपा को लगभग 190 से 200 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो रहा है।

कबाड़ बस पर 54 लाख का फर्जी बिल, बड़ा परिवहन घोटाला

'चलो' एप एजेंसी, निजी ऑपरेटरों और मनपा के अधिकारियों की कथित मिलीभगत से न केवल सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है, बल्कि बिना ब्रेक वाली बसें चलाकर यात्रियों की जान से भी खिलवाड़ किया जा रहा है।

कबाड़ हो चुकी बस का फर्जी जीपीएस और 54 लाख का बिल उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग में फर्जीवाड़े की हद तब पार हो गई जब एमएच 40 बीजी 1079 (MH 40 BG 1079) सीरीज की एक बस की चेचिस काटकर उसे अवैध रूप से चलाया गया।

जब पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की, तो ऑपरेटर ने रातोंरात उस बस को कबाड़ (स्क्रैप) बना दिया, हैरानी की बात यह कि जो बस हिंगना डिपो में कबाड़ हालत में खड़ी थी, उसका जीपीएस लोकेशन झांसी रानी चौक के रूट पर चलता हुआ दिखाया गया और इस 'बोगस' बस के संचालन के नाम पर 54 लाख रुपये का बिल पास करा लिया गया और भुगतान निजी ऑपरेटर कम्पनी को किया गया।

बिना हैंडब्रेक और बदले हुए इंजन के साथ दौड़ रहीं बसें

मोर भवन बस स्टैंड पर जांच में पाया गया कि लगभग 50% डीजल बसें बिना हैडब्रेक के चल रही है। मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार ऐसी बसों का फिटनेस रद्द होना चाहिए, लेकिन मनपा अधिकारियों ने 'सत्ता पक्ष के किसी नेता के मौखिक आदेश' का हवाला देते हुए इन बसों को रोकने से साफ इनकार कर दिया।

इसके अलावा बसों का संचालन कर रही एक कम्पनी ने लगभग 20 बसों के ओरिजिनल टर्बो इंजन निकालकर उनमें आरटीओ की अनुमति के बिना सादे 407 मॉडल के इंजन लगा दिए गए है, जिसका सीधा असर ब्रेक की क्षमता पर पड़ता है।

शहर की जनता के पैसे की इस खुली लूट और कुप्रबंधन ने नागपुर महानगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इन सबूतों और गंभीर आरोपों के बाद ऑपरेटरों और दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है।

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