नागपुर मनपा का कामकाज भगवान भरोसे; मानसून में मैदानी काम ठप, बैठकों व निरीक्षणों के दौर में उलझे रहे अधिकारी
Nagpur NMC Monsoon: नागपुर में मानसून के दौरान मनपा अधिकारियों के लगातार बैठकों में व्यस्त रहने से मैदानी कार्य प्रभावित होने की चर्चा है। इससे नागरिक सुविधाओं व फील्ड स्तर के कामों पर असर पड़ रहा है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर, मनपा, मानसून, समीक्षा बैठक (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Nagpur NMC Monsoon Review Meetings: नागपुर जिले में मानसून की पृष्ठभूमि में नागरिकों को राहत देने के लिए महानगरपालिका की अधिकाधिक मशीनरी का मैदान पर सक्रिय होना अपेक्षित है लेकिन वर्तमान में मनपा में सिर्फ बैठकों का ही दौर चल रहा है। मनपा का कामकाज पूरी तरह से भगवान भरोसे चल रहा है जहां अधिकारी लगातार बैठकों में व्यस्त हैं और प्रत्यक्ष रूप से फील्ड पर होने वाले कामों की जमकर अनदेखी हो रही है।
महापौर नीता ठाकरे, स्थायी समिति की सभापति शिवानी दाणी और मनपा आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर के अलग-अलग निरीक्षण दौरों और लगातार समीक्षा बैठकों के कारण वरिष्ठ अधिकारियों तथा विभागाध्यक्षों का काफी समय कार्यालय में ही बीत रहा है। इस वजह से मनपा गलियारों में चर्चा है कि मैदानी कामों पर इसका सीधा और नकारात्मक असर हो रहा है।
पहली ही बारिश ने खोली प्रशासन की पोल
मानसून से पहले शहर भर में निरीक्षण दौरों, समीक्षा बैठकों और तैयारियों की घोषणाओं की झड़ी लगी हुई थी लेकिन पहली ही बारिश ने प्रशासन के इन दावों की पोल खोल दी है। स्थिति यह है कि कई नदी-नालों की सफाई के दौरान जी कीचड़ निकालकर किनारे रखा गया था वह बारिश के पानी के साथ वापस नालों में बह गया है।
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शहर के कई हिस्सों में पेड़ गिरने, सड़कों और उद्यानों में जलभराव, नालों में गाद जमा रहने, खोदी गई सड़कों पर पानी जमा होने और कचरे के ढेर जैसी समस्याएं नजर आ रही हैं। नागरिक अब यह सवाल पूछने लगे हैं कि आखिर इन बैठकों और दौरों का प्रत्यक्ष परिणाम क्या निकला? सूत्रों के अनुसार, मनपा मुख्यालय और विभिन्न जोन कार्यालयों में सुबह साढ़े 9-10 बजे शुरू होने वाली बैठकें अक्सर रात 8 बजे तक चलती रहती हैं।
इसके चलते संबंधित विभागों के अधिकारी, इंजीनियर और कर्मचारी दिन भर बैठकों में ही फंसे रहते हैं और उन्हें प्रत्यक्ष कामों की निगरानी के लिए समय ही नहीं मिल पाता। इसे लेकर खुद प्रशासन के भीतर भी नाराजगी व्यक्त की जा रही है।
आत्मनिरीक्षण करने की सख्त जरूरत
इन तमाम प्रक्रियाओं से भले ही एक राजनीतिक संदेश जरूर जा रहा हो लेकिन अब इस बात का आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत पैदा हो गई है कि क्या इससे प्रशासन की कार्यक्षमता बढ़ रही है, या फिर केवल समीक्षाओं की पुनरावृत्ति कर के खानापूर्ति की जा रही है।
सत्ताधारियों द्वारा प्रशासन पर पकड़ मजबूत करने के प्रयास में इस बात का भी ध्यान रखना आवश्यक है कि वास्तविक काम की गति कम न हो। अन्यथा बैठकें और प्रेजेंटेशन तो बढ़ते रहेंगे लेकिन नागरिकों की अपेक्षित सुविधाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी।
फिलहाल मनपा गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा यही है कि मानसून के इस संकट में शहर को अधिक बैठकों की आवश्यकता है या फील्ड पर अधिक अधिकारियों की ? इस अहम सवाल का जवाब आने वाले दिनों में प्रशासन के वास्तविक कामकाज से ही मिलेगा।
बैठकें अलग-अलग लेकिन अधिकारी वही
मनपा आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर ने लक्ष्मीनगर, धरमपेठ, हनुमाननगर, धंतोली और नेहरूनगर जोन में मानसून की तैयारियों की अलग से समीक्षा की। ठीक उसी समय महापौर नीता ठाकरे और स्थायी समिति की सभापति शिवानी दाणी ने भी इन्हीं जोन में अलग-अलग बैठकें लेना शुरू कर दिया।
एक ही विषय पर और लगभग उन्हीं अधिकारियों की मौजूदगी में होने वाली इन दोहरी बैठकों के कारण प्रशासन का बहुत सा कीमती समय केवल कागजी समीक्षाओं में बर्बाद हो रहा है। मानसून में हर एक घंटा बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
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ऐसे समय में सीवरलाइनों की सफाई, नालों से गाद निकालना, खतरनाक पेड़ों की छंटाई, सड़कों के गड्ढे भरना, जलभराव वाले स्थानों का निरीक्षण करना और आपातकालीन व्यवस्था को मुस्तैद रखने के लिए अधिकारियों का प्रत्यक्ष रूप से फील्ड पर होना जरूरी होता है लेकिन इसके बजाय बैठकों को प्राथमिकता दिए जाने से काम के क्रियान्वयन पर बुरा असर पड़ रहा है।
