सोलर के नियमों में बड़ा बदलाव! अब खपत के हिसाब से लगेगा सोलर; महावितरण के फैसले पर उठे सवाल
Mahavitaran Solar New Rules 2026: महावितरण के नए सोलर नियमों से महाराष्ट्र के उपभोक्ताओं को झटका। अब औसत खपत पर तय होगी सोलर क्षमता, सेंक्शन्ड लोड पर नहीं। सब्सिडी और बचत पर बढ़ा खतरा।
- Written By: प्रिया जैस
सोलर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
MSEDCL Solar Rooftop Policy: महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) द्वारा सोलर रूफटॉप (सौर ऊर्जा) के नियमों में किए गए हालिया बदलावों ने आम जनता और व्यापारियों के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी है। पहले केवल वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों को प्रभावित करने वाली ये पाबंदियां अब घरेलू उपभोक्ताओं पर भी लागू कर दी गई हैं जिससे ‘ग्रीन एनर्जी’ अपनाने वालों को बड़ा नुकसान हो रहा है।
क्या है नया बदलाव?
सोलर क्षेत्र के जानकार सुधीर बुधे ने कहा कि पहले सोलर क्षमता आपके ‘सेंक्शन्ड लोड’ (वह बिजली क्षमता जिसके लिए आपने भुगतान किया है, जैसे 3 केडब्ल्यू या 5 केडब्ल्यू) के आधार पर तय होती थी।
नया नियम : अब सोलर क्षमता पिछले 12 महीनों की औसत बिजली खपत के आधार पर तय की जाएगी।
विरोधाभास : बिलिंग के समय महावितरण आपसे ‘सेंक्शन्ड लोड’ के आधार पर डिमांड चार्ज वसूलती है लेकिन जब सोलर लगाने की अनुमति देने की बात आती है तो केवल खपत को ही आधार माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एमईआरसी नियमों और विद्युत अधिनियम का उल्लंघन है।
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उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला असर
बचत करने वालों को सजा : जो परिवार एलईडी बल्ब और कम बिजली खपत वाले उपकरणों का उपयोग कर बिजली बचाते हैं उन्हें अब बहुत कम क्षमता का सोलर लगाने की अनुमति मिलेगी।
विस्तार में बाधा : जो व्यवसाय या उद्योग अपना काम बढ़ाना चाहते हैं और भविष्य की जरूरत के हिसाब से बड़ा सोलर प्लांट लगाना चाहते हैं वे अब ऐसा नहीं कर पाएंगे।
सब्सिडी का नुकसान : क्षमता कम होने के कारण उपभोक्ता ‘पीएम सूर्य घर योजना’ जैसी सरकारी सब्सिडी का पूरा लाभ लेने से वंचित रह रहे हैं।
महंगी बिजली की मजबूरी : सौर ऊर्जा का उपयोग सीमित होने से उपभोक्ताओं को मजबूरी में ग्रिड की महंगी बिजली पर निर्भर रहना होगा।
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महाराष्ट्र के ‘ग्रीन फ्यूचर’ पर खतरा
महाराष्ट्र वर्तमान में भारत के कुल रूफटॉप सोलर आवेदनों में 25% (लगभग 55,000 आवेदन प्रतिमाह) का योगदान देता है। महावितरण के इन अड़ंगों से न केवल सौर ऊर्जा अपनाने की गति धीमी होगी बल्कि इस क्षेत्र में पैदा होने वाले नये रोजगारों पर भी संकट मंडराएगा।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
यद्यपि राज्य विद्युत नियामक आयोग ने अतीत में कई बार महावितरण पर जुर्माना लगाया है, फिर भी कंपनी नये-नये अवरोध पैदा कर रही है। अब उपभोक्ता और संगठन महाराष्ट्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं, ताकि उपभोक्ताओं के अधिकारों और राज्य के हरित भविष्य की रक्षा की जा सके।
