नागपुर में मॉडल मिल पुनर्विकास अटका, 320 परिवारों की सुरक्षा पर संकट, पुनर्विकास कार्य अधर में ठेकेदार पर सवाल

Nagpur Model Mill: नागपुर के मॉडल मिल चॉल पुनर्विकास प्रोजेक्ट में लंबी देरी से 320 परिवार जर्जर इमारतों में रहने को मजबूर हैं। बारिश के मौसम में उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
Model Mill redevelopment in Nagpur stalled; safety of 320 families at risk; project in limbo, questions raised about the contractor.
नागपुर, मॉडल मिल, पुनर्विकास, (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Model Mill Redevelopment Project: नागपुर सिटी में कुछ ऐसे प्रोजेक्ट हैं जिनका काम करवाने के लिए सरकार ने भी झुककर ठेकेदारों द्वारा रखी गई शतों को पूरा किया। खुद मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने संज्ञान लेकर ठेकेदारों व संबंधित विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश भी दिए लेकिन प्रोजेक्ट का काम तक शुरू नहीं हुआ और कुछ अधूरे ही लटके हुए हैं।

उनमें से एक है मॉडल मिल चॉलवासियों के लिए घर बनाकर देने का कार्य, दशकों से यह कार्य लटका हुआ है और जर्जर हो चुकी चॉल में रहने वाले 320 कामगारों के परिवारों की जान खतरे में है।

बारिश में यह चॉल कभी भी धराशायी हो सकती है लेकिन किसी को इसकी चिंता नहीं है। बीते वर्ष 25 मई 2025 को खुद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यह निर्देश दिए थे कि ठेकेदार से 22 महीनों का करार किया जाए और उस अवधि में किसी भी हालत में प्रभावितों को घर बनाकर दिया जाए।

आज करीब 13 महीने बीत गए हैं और ठेकेदार ने वहां झांककर भी नहीं देखा है। न ही संबंधित अधिकारियों ने उस ठेकेदार पर किसी तरह की कार्रवाई की है। ऐसा लग रहा है मानो ठेकेदार ने सीएम व गडकरी के निर्देशों को भी कचरे की टोकरी में डाल दिया है।

1 एकड़ में बनना है घरकुल

परिसर में 3.16 एकड़ जमीन है जिसमें से 1 एकड़ में 320 परिवारों के लिए घरकुल बनाने का निर्णय हुआ है। ठेकदार कंपनी पी एंड पी एसोसिएट्स ने 2 वर्ष पूर्व 2024 जनवरी में प्लान सेंक्शन के लिए मनपा के नगर रचना विभाग के पास निवेदन दिया था जो मंजूर हो चुका है।

हालांकि उस प्रक्रिया को पूर्ण हुए भी ढाई वर्ष बीत चुके हैं लेकिन अब तक ठेकेदार ने कार्य शुरू नहीं किया है। गडकरी ने बीते वर्ष उनसे मिलने आए कामगार प्रतिनिधियों को कहा था कि 22 महीने में घर बनाकर देने का करार ठेकेदार से कर लें।

इस दौरान भाजपा शहर अध्यक्ष दयाशंकर तिवारी और पूर्व मेयर अर्चना डेहनकर भी उपस्थित थीं। तब ऐसा लगा था कि अब जल्द ही कामगारों को उनके हक का घर मिल जाएगा।

फोटो खींचकर ले गई मनपा की टीम

मॉडल मिल चॉल सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजीव डोंगरे ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व ही मनपा की एक टीम आई थी। टीम जर्जर चॉल की फोटो खींच कर ले गई। उन्होंने संभावना जताई कि अब एक बार फिर चॉल निवासियों को जर्जर इमारत खाली करने का नोटिस जारी किया जाएगा। ठेकेदार द्वारा कार्य शुरू नहीं किये जाने से आशंका है कि खाली कर दिया तो फिर उनका हक छीन लिया जाएगा। ठेकेदार द्वारा घरकुल कब तक बनाकर दिया जाएगा यह नहीं बताया जा रहा है और न ही खाली करने के बाद दूसरी जगह रहने के लिए मकान किराया देने के संदर्भ में कोई चर्चा की जा रही है। वर्ष 2007 से 2012 में सरकार ने एफएसआई कम कर दिया था लेकिन ठेकेदार की मांग पर एफएसआई बढ़ा दिया गया।

आता हूं... करता हूं...चल रही बहानेबाजी

डोंगरे ने बताया कि 25 मई को ठेकेदार को फोन कर पूछा गया कि वह काम कब शुरू कर रहा है तो उसने आता हूं... करता हूं... का जवाब दिया, यही जवाब वर्षों से मिल रहा है। चॉल निवासियों की समझ में यह नहीं आ रहा है कि आखिर ऐसे ठेकेदार पर किसी तरह की कार्रवाई सरकार द्वारा क्यों नहीं की जा रही है।

डोंगरे ने बताया कि एक वर्ष पूर्व तो ठेकेदार ने चॉल के 1-1 नागरिकों को बुलाकर चॉल खाली करने की धमकियां दी थी, वह पुलिस फोर्स बुलाकर चॉल तोड़ने की धमकी दे रहा था। उसका कहना है कि जब तक चॉल खाली नहीं करोगे तब तक काम शुरू नहीं करने चाला।

डोंगरे ने कहा कि परिसर में जमीन खाली है, ठेकेदार एक साइड से निर्माण कार्य शुरू कर सकता है। दशकों से चॉलवासियों के साथ धोखा ही हुआ है जिसके चलते भरोसा नहीं है कि चॉल खाली करें और फिर ठेकेदार काम भी शुरू नहीं करे तो हम कहीं के नहीं रह जाएंगे। पूरे परिसर में खाली जमीन से वह निर्माण कार्य शुरू कर सकता है।

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