

Nagpur Private Travels Illegal Parking: नागपुर शहर से ऑपरेट होने वाली निजी ट्रैवल्स बसों के संचालक और चालक किस तरह अधिकारियों के आदेशों को बस के धुएं में उड़ा रहे हैं, इसका उदाहरण सड़कों पर फिर से देखने मिल रहा है। बस चालक बेखौफ अपने वाहन सिटी में कहीं भी रोक देते हैं और ट्रैफिक पुलिस बेशर्म होकर तमाशा देखती रहती है। अब सवाल यह उठता है कि यदि व्यवस्था संभलती नहीं तो फिर नये-नये नियम लाए क्यों जाते हैं?
सिटी की सड़कों पर निजी बसों के स्टॉपेज और पार्किंग पर पाबंदी लगने के बावजूद बसें जगह-जगह रुक कर सवारियां भर रही हैं। 21 अगस्त 2025 को निजी बसों के अवैध स्टॉपेज पर प्रतिबंध लगाया गया था। बाकायदा अधिसूचना जारी की गई और कुछ दिनों तक पुलिस ने मोर्चा भी संभाला। व्यवस्था वाकई में सुगम होती दिखाई दी लेकिन सप्ताहभर बाद ही स्थिति ढाक के तीन पात वाली हो गई।
अब 13 मार्च 2026 को दोबारा डीसीपी ट्रैफिक ने अधिसूचना जारी की है जिसमें बसों को केवल निर्धारित स्थान से सवारी लेकर शहर से बाहर जाना है। जिनके पास पार्किंग व्यवस्था है केवल वे ही अपने स्थान पर बसें खड़ी कर सकते हैं। शहर में कहीं भी पिक एंड ड्रॉप नहीं होगा लेकिन पहले की तरह ही अब रोड पर बसों का जमावड़ा लगने लगा है। बस चालकों-संचालकों को तो चाहे जैसे हो, पैसा कमाना है लेकिन ताज्जुब की बात यह कि यातायात शाखाओं के अधिकारियों और कर्मचारियों को ये अनियमितताएं दिखाई क्यों नहीं देतीं? बस संचालकों के साथ सेटिंग करके परिमंडल के अधिकारी यह मनमानी होने दे रहे हैं।
शहर के बीचोंबीच अवैध बस अड्डे चल रहे हैं लेकिन पुलिस जानकर भी बेखबर बनी हुई है। यशवंत स्टेडियम के आसपास निजी ट्रैवल्स बस संचालकों ने अपने कार्यालय बना लिए हैं। सड़क पर ही अतिक्रमण करके अपनी-अपनी मेज लगाकर टिकटों की बुकिंग की जाती है। नाले के बिल्कुल बगल में मदर डेयरी का कियोस्क अब ट्रैवल्स बस के कार्यालय में तब्दील हो गया है। यह सरासर नियम के खिलाफ है लेकिन कोई ध्यान देने वाला नहीं है। इस अवैध बस स्टैंड से जबलपुर, रीवा के लिए बसें निकलती हैं। सभी बसें रास्ते पर ही खड़ी होती हैं। पुलिस का कोई खौफ नहीं है और सवारी बैठाने का काम सड़क पर ही किया जाता है।
बस स्टॉपेज के नये नियमों में इनर रिंग रोड का गेम खेला गया। मसलन बसें इनर रिंग रोड के बाहर जाकर रुक सकती हैं। अब छत्रपति चौक पर इनर रिंग रोड खत्म हो जाता है, जबकि यह स्थान शहर के बीच है। रिहायशी इलाके में बसों के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। छत्रपति चौक से होटल रेडिसन ब्ल्यू तक बसों की कतारें लग जाती हैं। कई बार केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का काफिला यहां रुक जाता है।
हाई सिक्योरिटी वाले हेवीवेट केंद्रीय मंत्री को भी इन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है लेकिन ‘जब सैयां भये कोतवाल तो डर काहे का।’ यही हालत उमरेड और छिंदवाड़ा रूट पर जाने वाली बसों की भी है। पुलिस के टोइंग वाहन से यहां नो-पार्किंग में खड़े होने वाले वाहनों को तो हटाया जाता है लेकिन बसों की कतार देखने के बावजूद कोई अनाउंसमेंट नहीं होता।
बस चालक दोबारा अपनी मनमानी न कर पाएं, इसीलिए निगरानी करने विशेष दस्तों का गठन किया गया था। अब ये दस्ते कहां काम कर रहे हैं? यह तो वे ही जानें लेकिन कृपलानी चौक, छत्रपति चौक, सक्करदरा, दिघोरी, अमरावती रोड पर लगातार बसों का जमावड़ा हो रहा है। गणराज, धनश्री, चिंतामनी, हिंदुस्तान, डॉ. आंबेडकर ट्रैवल्स, एप्पल, श्री साईं, नगरारे ट्रैवल्स की बसें खुलेआम रास्तों पर खड़ी रहती हैं।
बसों पर प्रतिबंध लगने से आसपास रहने वाले नागरिक बहुत खुश थे। दलालों की गालियां सुनाई नहीं देती थीं और कर्कश हॉर्न से भी छुटकारा मिला था लेकिन अब दोबारा माहौल खराब हो रहा है। व्यवस्था बनाए रखने में जोन के अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह विफल हैं। अधिकारियों के आदेशों का पालन करना उनकी जिम्मेदारी है लेकिन सड़कों पर तो बस संचालकों और स्थानीय अधिकारियों का ‘दोस्ताना’ माहौल दिख रहा है।