नागपुर में न्याय की चौखट पर झुकी मनपा: आदेश की अवहेलना करने पर अधिकारी को याद आई मर्यादा

Nagpur High Court: जजों के बंगलों के निर्माण में बाधा और कोर्ट के आदेश की अवहेलना के मामले में मनपा की डिप्टी चीफ आर्किटेक्ट ने हाई कोर्ट में पेश होकर बिना शर्त माफी मांगी।
Nagpur Municipal Corporation bows before the bench: Official reminded of propriety after defying orders.
नागपुर हाई कोर्ट, (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Nagpur High Court Judge Bungalows: नागपुर न्यायाधीशों के लिए बनाए जा रहे बंगलों के निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न करने और न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने के मामले में शुक्रवार को एक बड़ा घटनाक्रम उजागर हुआ। मनपा की डिप्टी चीफ आर्किटेक्ट के।बी। रंगारी ने शुक्रवार को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर हाथ जोड़कर बिना शर्त माफी मांग ली।

जनमंच की ओर से सिटी में सीमेंट की सड़कों में लापरवाही एवं अन्य मुद्दों को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। गत सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के जजों के बंगलों को लेकर भी लापरवाही होने का मामला उजागर हुआ था। इसे कोर्ट ने गंभीरता से लेकर अधिकारियों को कोर्ट में तलब किया था।

अदालत की नाराजगी और अधिकारी की गैरहाजिरी

इन पत्रों के कारण उपजे विवाद पर संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने 14 जुलाई 2026 को रंगारी को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था। हालांकि वे उस दिन अदालत में उपस्थित नहीं हुई।

इस पर उन्होंने अपने हलफनामे में स्पष्टीकरण दिया कि उन्हें आदेश की जानकारी थी, लेकिन वे इस गलतफहमी में थीं कि 15 जुलाई का उनका मार्गदर्शन मांगने वाला पत्र पर्याप्त होगा।

हलफनामे में दी गई सफाई और 'बिना शर्त माफी'

अदालत के कड़े रुख के बाद रंगारी ने 17 जुलाई को एक विस्तृत हलफनामा दायर किया। इसमें उन्होंने बिना शर्त और स्पष्ट माफी मांगी। उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि उनका इरादा किसी भी निर्माण योजना, विशेषकर हाई कोर्ट के प्रोजेक्ट को रोकने का नहीं था।

दोनों पत्र जारी करना गैर इरादतन था और उन्हें नवनिर्मित बंगलों के मापदंडों को ध्यान में रखना चाहिए था। उन्होंने अदालत में बयान दिया कि दोनों विवादास्पद पत्र वापस ले लिए गए हैं। उन्होंने भविष्य में किसी भी प्रस्ताव को न रोकने का भी संकल्प लिया।

पहली गलती मानकर दी मोहलत

न्या। उर्मिला जोशी-फाल्के और न्या। निवेदिता मेहता ने यह टिप्पणी की कि यह अधिकारी की पहली अवज्ञा थी। अदालत ने यह तय किए बिना कि ये पत्र जानबूझकर जारी किए गए थे या अनजाने में, रंगारी की माफी को स्वीकार कर लिया। हालांकि अदालत ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि हम इस शर्त पर माफी स्वीकार करते हैं कि भविष्य में यदि हमारे सामने उनकी ऐसी ही कोई गलती आती है, तो इसे बहुत गंभीरता से लिया जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अलग-अलग पत्रों से अटका मामला

अदालती दस्तावेजों के अनुसार डिप्टी चीफ आर्किटेक्ट रंगारी ने 30 जून 2026 और 15 जुलाई 2026 को 2 अलग-अलग पत्र जारी किए थे, जिससे हाई कोर्ट के जजों के लिए प्रस्तावित बंगलों का निर्माण कार्य रुकने की नौबत आ गई थी।

पहला पत्र 30 जून 2026 को सार्वजनिक निर्माणकार्य विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यकारी अभियंता को लिखा गया था, जिसमें कुछ अनुपालनों की मांग की गई थी।

दूसरा पत्र 15 जुलाई 2026 को नागपुर बैच के रजिस्ट्रार (प्रशासन) को लिखा गया था, जिसमें मुबई और औरंगाबाद में जजों के आवासों के मापदंडों का हवाला देते हुए मार्गदर्शन मागा गया था।

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