

महाराष्ट्र में छह राउंड की प्रवेश प्रक्रिया के बाद भी MBBS और BDS की 138 सीटें खाली रहीं।
MBBS की 8,814 सीटों में से 8,730 पर प्रवेश हुए, जबकि 84 सीटें रिक्त हैं।
BDS की 2,617 सीटों में से 2,563 पर प्रवेश हुए और 54 सीटें खाली रह गईं।
निजी मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में MBBS की कुल 84 सीटें खाली हैं।
निजी डेंटल विश्वविद्यालय में 100 में से केवल 70 सीटों पर प्रवेश हो सके।
Maharashtra MBBS Admission Seats Vacant: महाराष्ट्र में मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 6 राउंड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी 138 सीटें खाली रह गई हैं। इनमें एमबीबीएस की 84 और बीडीएस की 54 सीटें शामिल हैं। खास बात यह कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सभी सीटों पर प्रवेश हो चुके हैं।
जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में सीटें रिक्त हैं। इस वर्ष पहली बार मेडिकल और डेंटल के संस्थास्तरीय प्रवेश भी सीईटी के माध्यम से किए जाने से निजी संस्थानों में होने वाली कथित अनियमितताओं पर अंकुश लगने का दावा किया जा रहा है। प्रवेश के आंकड़ों के अनुसार राज्य में MBBS की कुल 8,814 सीटें उपलब्ध थीं।
इनमें से 8,730 सीटों पर प्रवेश हुए हैं। इस तरह प्रवेश का प्रतिशत 99.04 रहा, जबकि 84 सीटें खाली रह गईं। दूसरी ओर बीडीएस की कुल 2,617 सीटों में से 2,563 पर प्रवेश हुए। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश का प्रतिशत 97.93 रहा और 54 सीटें रिक्त रह गई।
महाराष्ट्र राज्य के 43 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की कुल 5,065 सीटें उपलब्ध थी। इन सभी सीटों पर विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है, यानी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का आंकड़ा 100 प्रतिशत रहा।
इसके विपरीत राज्य के 25 निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 3,299 सीटों में से 3,260 पर ही प्रवेश हो सके, यहां 39 सीटें खाली रह गई। इस वर्ष नए सिरे से मान्यता प्राप्त दो निजी मेडिकल विश्वविद्यालयों में भी अपेक्षित प्रवेश नहीं हो सके।
इन विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस की कुल 450 सीटें थीं, जिनमें से 405 पर प्रवेश हुए, जबकि 45 सीटे रिक्त रह गईं। इस प्रकार एमबीबीएस की कुल 84 रिक्त सीटों में से 39 निजी मेडिकल कॉलेजों और 45 निजी विश्वविद्यालयों में खाली हैं। सरकारी कॉलेजों में एक भी सीट रिक्त नहीं रही।
डेंटल पाठ्यक्रम में भी सरकारी और निजी संस्थानों के बीच प्रवेश का अंतर सामने आया है। राज्य के पांच सरकारी डेंटल कॉलेजों में 317 सीटें उपलब्ध थी। इनमें से 315 पर प्रवेश हुए और केवल 2 सीटें खाली रह गई।
वहीं 23 निजी डेंटल कॉलेजों की 2,200 सीटों में से 2, 178 पर प्रवेश हुए। इन कॉलेजों में 22 सीटें रिक्त हैं। इस वर्ष नए मान्यता प्राप्त एक निजी डेंटल विश्वविद्यालय में 100 सीटें उपलब्ध थी, लेकिन इनमें से केवल 70 पर ही प्रवेश हो सकें। यहां 30 सीटें खाली रह गई।
पिछले तीन शैक्षणिक वर्षों के आंकड़ों पर नजर डाले तो एमबीबीएस में लगभग शत-प्रतिशत प्रवेश होते रहे हैं। वर्ष 2025-26 में 8,537 उपलब्ध सीटों पर सभी प्रवेश हो गए थे। वर्ष 2024-25 में 8,143 सीटों में से एक भी सीट खाली नहीं रही थी।
इसी तरह वर्ष 2023-24 में 7,285 MBBS सीटों पर सभी प्रवेश हुए थे। बीडीएस में भी पिछले वर्षों में प्रवेश का प्रतिशत काफी अधिक रहा, वर्ष 2025-26 में 2,718 सीटों में से केवल एक सीट खाली रही थी। वर्ष 2024-25 में 2,675 सीटों में से एक सीट रिक्त थी, जबकि वर्ष 2023-24 में इतनी ही सीटों में से 11 सीटों पर प्रवेश नहीं हो सके थे।