छत्तीसगढ़ की 'गरे पाल्मा' खदान से कोयले की पहली खेप रवाना होने पर बयान देते सीएम फडणवीस ( सोर्स: सोशल मीडिया )
महाराष्ट्र की ऊर्जा आत्मनिर्भरता: 77 वर्षों के कोयला संकट का अंत और कॉर्पोरेट जिहाद की जांच का संकल्प
Maharashtra Energy Self-Reliance: महाराष्ट्र के ऊर्जा इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बात की पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक निर्णयों के चलते ‘महाजेनको’ को अब अपनी स्वयं की कोयला खदान मिल गई है। छत्तीसगढ़ की ‘गरे पाल्मा’ खदान से कोयले की पहली खेप रवाना होना राज्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
अब तक बिजली उत्पादन के लिए 2800 से 3200 GCV वाले कोयले पर निर्भरता थी, लेकिन इस नई खदान से 4300 GCV वाला उच्च गुणवत्ता का कोयला प्राप्त होगा। इस उच्च गुणवत्ता का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि कम कोयले के इस्तेमाल से अधिक बिजली पैदा की जा सकेगी, जिससे अंततः उत्पादन लागत में भारी कमी आएगी। खदान की 77 वर्षों की लंबी उम्र ने राज्य की भविष्य की चिंताओं को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
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राज्य की बुनियादी सुविधाओं पर बात करते हुए फडणवीस ने कहा कि वर्तमान में महाराष्ट्र पूरी तरह से लोडशेडिंग की समस्या से बाहर निकल चुका है। सरकार का विशेष ध्यान कृषि क्षेत्र पर है, जिसके परिणामस्वरूप अब लगभग 70 प्रतिशत किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े कानूनी मुद्दों पर सफाई देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने के लिए तैयार है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि केवल उन मामलों में राहत नहीं दी जा सकती जहाँ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया है। अन्य सभी मामलों की वापसी की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है।
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नाशिक के बहुचर्चित ‘कॉर्पोरेट जिहाद‘ मामले पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए उपमुख्यमंत्री ने कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण की जड़ तक जाकर जांच की जाएगी और जो भी अपराधी इसमें शामिल पाए जाएंगे, उन्हें कानून के तहत सख्त से सख्त सजा दी जाएगी।