नागपुर में बनेगा 'बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स'! नितिन गडकरी और प्रशासन का मेगा प्लान तैयार

Nagpur Redevelopment Project: कांचीपुरा में बीकेसी मॉडल पर प्रस्तावित विकास परियोजना को अवैध कब्जों से चुनौती मिल रही है। प्रशासन और कब्जाधारियों के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है।
'Bandra-Kurla Complex' to be built in Nagpur! Nitin Gadkari and the administration have a mega plan ready.
कांचीपुरा, बीकेसी मॉडल, अतिक्रमण, नागपुर विकास,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Encroachment Challenge: नागपुर कांचीपुरा के 19.82 हेक्टेयर जमीन पर शहर की शानो-शौकत बढ़ाने वाला प्रोजेक्ट प्लान किया गया है। बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) की तर्ज पर यहां पर सुविधाएं विकसित करने की बात हो रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, कलेक्टर, मनपा सभी इस प्रोजेक्ट को गति देने में लगे हैं। प्लानिंग भी बनाई जा रही है।

कुछ स्केच बनकर तैयार भी हैं लेकिन इन सबके बीच यहां के 'कब्जेधारी' इसे चुनौती देने के मूड में हैं। वे नहीं चाहते हैं कि अवैध रूप से बने होटल, रेस्टोरेंट पर बुलडोजर चले। उनकी यह चाल है कि 'रोजगार' के एवज में उन्हें पर्याप्त जगह मिल जाए ताकि करोड़ों का माल 'अंदर' हो जाए। निश्चित रूप से कई लोगों के पास पुश्तैनी जमीन भी है, वे हकदार भी हैं लेकिन कुछ लोग बेमतलब की 'ताल' ठोंक रहे हैं। अब देखना दिलस्प होगा कि नेता-प्रशासन इन चुनौतियों को कैसे लेते हैं और कितनी जल्दी कार्रवाई होती है।

बेशकीमती जमीन पर 'बीकेसी'

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मंशा कच्चीपुरा की इस बेशकीमती जमीन पर मुंबई के 'बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स' की तर्ज पर एक अत्याधुनिक सुपर कॉम्प्लेक्स बनाने की है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य शहर की सुंदरता को बढ़ाना और आम नागरिकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मुहैया कराना है। लेकिन पिछले 25-30 वर्षों से व्यावसायिक कब्जा जमाए बैठे रसूखदार लोग इस विकास कार्य के सामने दीवार बनकर खड़े हैं।

पानी-बिजली भी सप्लाई

रेस्टोरेंट, दुकान, ढाबे का विस्तार यूं ही नहीं हो सकता। इसके पीछे पूरा का पूरा तंत्र लगा है। सभी अपना-अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। अवैध घोषित होने के बाद भी कृपादृष्टि बनी हुई है और पानी-बिजली का कनेशन दिया गया है। इसलिए संदेह करना लाजमी है। कोई राजनीतिक पार्टी का कार्यालय संचालित कर रहा है, तो कोई वर्ल्ड रिकॉर्ड बना रहा है।

बावजूद इसके 'प्रशासन मौन' धारण किए है। उच्च न्यायालय के हंटर के बाद लोगों की उम्मीदें जागी हैं। इस उम्मीद पर नेता, कलेक्टर, मनपा कितने सटीक उतरते हैं, यह देखने योग्य होगा। अन्यथा फिर फाइलें घूमती रहेंगी और लोग चुनौती देते रहेंगे।

अच्छी बात यह कि मनपा के एक बड़े अधिकारी ने कहा है कि सभी को पुनः नोटिस दिया जाएगा और शर्तें नहीं मानने पर बुलडोजर चलाया जाएगा। अधिकारी ने 'दम' दिखाया है, परंतु इसे साकार करने में 'हिम्मत' भी दिखानी होगी।

2015 में मनपा ने दिया था नोटिस

शंका इसलिए होती है क्योंकि महानगर पालिका ने इन अवैध निर्माणों के खिलाफ वर्ष 2015 (मई और अगस्त) में एमआरटीपी एक्ट 1966 की धारा 53 (1) के तहत तोड़ कार्रवाई के नोटिस जारी किए थे। इसके बाद सतीश सक्सेना, प्रशांत पवार, मंगेश सुरावार और अन्य लोगों ने निर्माण को नियमित करने के लिए धारा 44 के तहत आवेदन किया था।

मनपा के नगर रचना विभाग ने 21 सितंबर और 3 अक्टूबर 2015 को इन नक्शों और आवेदनों को नामंजूर कर दिया था। मनपा की इस कार्रवाई के खिलाफ अपीलकर्ताओं ने राज्य सरकार के पास धारा 47 के तहत अपील दायर की थी। सभी तरफ से हारने के बाद भी ये 11 वर्षों से दुकानदारी करते आ रहे हैं। इतना ही नहीं, इस बीच इन्होंने दुकानों को 'एकड़' में फैला लिया है। पहले जो दुकानें 3000-5000 वर्ग फुट में हुआ करती थीं, आज वही दुकान 50,000 वर्ग फुट जगह में बन चुकी है।

कानूनी लड़ाई का अंत

यह भूमि डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ (पीडीकेवी) की है। 2015 से शुरू हुई कानूनी लड़ाई, 23 जून को शहरी विकास के उस फैसले के बाद खत्म हो गई, जिसमें मनपा की कार्रवाई को पूरी तरह उचित ठहराया गया। इस आदेश ने 2016 से चली आ रही अंतरिम सुरक्षा को समाप्त कर दिया है।

रसूखदारों पर गिरेगी गाज, बिना मंजूरी गतिविधियां

बजाज नगर और कच्च्चीपुरा के बीच स्थित इस इलाके में वर्तमान में बड़े रेस्टोरेंट, नामी मैरिज लॉन, बैंक्वेट हॉल और गैस गोदाम जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठान चल रहे हैं। इनमें से कई कारोबारियों ने इस अवैध जमीन के सहारे करोड़ों की संपत्ति बनाई है। चर्चा है कि इनमें से कई अवैध ढांचे राजनीतिक रसूख और संरक्षण में फल-फूल रहे हैं। बिना फायर एनओसी और बिल्डिंग परमिशन के चल रहीं ये गतिविधियां अब प्रशासन के रडार पर हैं।

अतिक्रमण मुक्त होगी 27 हेक्टेयर भूमि

इन सभी तथ्यों, जमीन के मालिकाना हक और विकास योजना के आरक्षण को गंभीरता से विचार में लेते हुए राज्य सरकार ने माना कि मनपा द्वारा निर्माण अनुमति को नामंजूर करने की कार्रवाई बिल्कुल उचित थी। अंततः अपर मुख्य सचिव ने सतीश सक्सेना और अन्य

की अपील को पूरी तरह से खारिज कर दिया। इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि महानगर पालिका जल्द ही इस क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अपनी रुकी हुई कार्रवाई को फिर से शुरू करेगी।

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