नागपुर: कमलेश चौधरी के अवैध निर्माणों पर अंततः हटा स्टे; फुटाला तालाब की जमीन पर चलेगा प्रशासन का बुलडोजर
Nagpur Kamlesh Chaudhary: नागपुर में पूर्व नगरसेवक कमलेश चौधरी और उनके परिवार के कथित अवैध निर्माणों पर लगी रोक राज्य सरकार ने हटा दी है। तीन साल बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर, कमलेश चौधरी,(सोर्स-सोशल मीडिया)
Nagpur Kamlesh Chaudhary Illegal Construction: नागपुर राज्य सरकार ने पूर्व नगरसेवक कमलेश चौधरी और उनके परिवार के खिलाफ एक कड़ा कदम उठाते हुए उनके अवैध लॉन और आवासीय इमारतों को गिराने पर लगी रोक अंततः हटा ली। लगभग 3 साल बाद लिए गए इस फैसले से फुटाला तालाब के जलग्रहण क्षेत्र और हाई फ्लड लाइन के साथ-साथ ‘महाराष्ट्र पशु और मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय’ (माफ्सू) की जमीन पर बने इन अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है।
फर्जीवाड़ा उजागर होने पर दर्ज हुई FIR
नगर विकास विभाग-1 के अपर मुख्य सचिव ने चौधरी परिवार की अपील को खारिज कर दिया और कार्रवाई पर लगी रोक हटा दी। सिटी सर्वे कार्यालय क्रमांक 3 की जांच में यह बात सामने आई कि कमलेश चौधरी के पिता दिलीप चौधरी का नाम संपत्ति कार्ड में लीजधारक के रूप में धोखाधड़ी से और हस्तलिखित रूप में दर्ज किया गया था।
इस फर्जी पंजीयन को अब रद्द कर दिया गया है और कमलेश चौधरी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। नगर विकास विभाग के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 7/12 उतारे और संपत्ति कार्ड के अनुसार इस जमीन का असली और कानूनी मालिक ‘महाराष्ट्र पशु और मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय’ ही है। साथ ही कमलेश के भाई मुकेश चौधरी का भी इस जमीन पर कोई मालिकाना हक नहीं है।
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लगातार फॉलोअप और संघर्ष लाया रंग
इस घोटाले को उजागर करने और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग करने में पश्चिम नागपुर के विधायक विकास ठाकरे और ‘अन्याय निवारण मंच’ के अध्यक्ष ज्वाला जांबुवंतराव धोटे की अहम भूमिका रही। विधायक ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के पास लगातार इस बात को उठाए रखा कि 7 अगस्त 2023 को नगर विकास विभाग द्वारा दी गई रोक को तुरंत हटाया जाए।
जारी किए गए थे नोटिस
चौधरी परिवार ने 2022 और 2023 के बीच MAFSU की जमीन और फुटाला तालाब के जलग्रहण क्षेत्र में 2 इमारतें खड़ी कर दी थी।
ज्वाला घोटे की शिकायत के बाद मनपा ने 25 अगस्त 2022 को MRTP एक्ट के तहत पहला नोटिस जारी किया था क्योंकि जांच में पाया गया कि फंक्शन लॉन का कुछ हिस्सा सीधे फुटाला तालाब के क्षेत्र में और बाकी हिस्सा जलग्रहण क्षेत्र व बाढ़ रेखा में आता है।
10 जनवरी 2023 को फंक्शन लॉन, रेस्टोरेंट और बुकिंग कार्यालय के खिलाफ दूसरा MRTP नोटिस जारी किया गया, जिसके बाद चौधरी परिवार ने खुद ही अपना रेस्टोरेंट तोड़ दिया था।
रोक के बावजूद निर्माण
महानगर पालिका ने जब चौधरी परिवार के इमारत निर्माण के नक्शे को नामंजूर कर दिया, तो उन्होंने सिविल कोर्ट (दीवानी न्यायालय) का दरवाजा खटखटाया और MRTP नोटिस पर रोक हासिल कर ली।
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इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार से भी 7 अगस्त 2023 को तोड़ कार्रवाई पर रोक लगवा ली थी। चौंकाने वाली और गंभीर बात यह रही कि न्यायालय और नगर विकास विभाग द्वारा रोक लगाए जाने के बावजूद कमलेश चौधरी और उनके परिवार ने दोनों आवासीय इमारतों का निर्माण कार्य धड़ल्ले से पूरा कर लिया।
