

Bombay High Court Pune Mundhwa Land Scam Parth Pawar: पुणे के मुंढवा जमीन घोटाले को लेकर राकां सुनेत्रा पवार गुट के सांसद पार्थ पवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 40 एकड़ सरकारी जमीन के लेन-देन के इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुलिस से एक तीखा सवाल पूछा है कि इस मामले में पार्थ पवार को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया है।
हाई कोर्ट ने सख्त लहजे में पुलिस से कहा कि क्या वह डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार के पुत्र को संरक्षण दे रही है और सिर्फ दूसरे आरोपियों की जांच कर रही है।
सरकारी वकील मनकुंवर देशमुख ने जवाब दिया कि जांच एजेंसी कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी। मामले की सुनवाई जस्टिस माधव जामदार की सिंगल बेंच के सामने चल रही है।
कोर्ट ने यह टिप्पणी इस पुणे शहर के जमीन घोटाले में आरोपी शीतल किसनचंद तेजवानी की अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान की।
यह मामला पार्थ पवार की एमेडिया कंपनी से जुड़ा है। इस कंपनी ने मुंढवा में 40 एकड़ की जमीन सिर्फ 300 करोड़ रुपये में लेने का सौदा किया था जबकि इस जमीन की बाजार में कीमत 1,800 करोड़ रुपये है। इतना ही नहीं, आरोप है कि इस सौदे के लिए जरूरी 21 करोड़ रुपये की स्टाम्प ड्यूटी भी माफ़ कर दी गई थी।
इस मामले का खुलासा होने के बाद इस सौदे को रद्द कर दिया गया। पुणे की यह जमीन 'महार वतन' संपत्ति की श्रेणी में आती है जिसे सरकार की पूर्व अनुमति के बिना बेचा नहीं जा सकता है।
यह जमीन 'महार वतन' संपत्ति की श्रेणी में आती है। ऐसी जमीन के हस्तांतरण के लिए सरकार की पूर्व अनुमति से जुड़े नियम लागू होते हैं। मामले में इसी आधार पर जमीन के लेन-देन की वैधता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
फिलहाल बॉम्बे हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है और जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।