नागपुर में 3,500 करोड़ की सरकारी जमीन होगी अतिक्रमण मुक्त, राज्य सरकार ने खारिज की अपील

Illegal Property Nagpur: नागपुर के काचीपुरा में पीकेवी की 65 एकड़ जमीन (मूल्य ₹3,500 करोड़ से अधिक) से अतिक्रमण हटाने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने कब्जाधारियों की अपील खारिज कर दी
The Maharashtra government has rejected appeals by illegal occupants, clearing the way to reclaim PKV land worth ₹3,500 crore in Nagpur's Kachipura area.
सरकारी जमीन अतिक्रमण (फोटो.सोशल मीडिया)
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Illegal Commercial Property Nagpur: रामदासपेठ और बजाजनगर जैसे संभ्रांत इलाके में काचीपुरा स्थित पीकेवी की 65 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण तथा नजूल की जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए लंबे समय से मनपा द्वारा कार्रवाई की जा रही है। यहां तक कि गत समय धरममेठ जोन ने यहां के तमाम अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया था।

कार्रवाई के चलते अतिक्रमणकारियों ने राज्य सरकार के पास अपील दायर की किंतु अब राज्य सरकार ने भी अपील ठुकराए जाने के कारण अंततः 3,500 करोड़ से अधिक की सरकार की सम्पत्ति अतिक्रमण के कब्जे से मुक्त होने जा रही है। उल्लेखनीय है कि 27 हेक्टेयर (65 एकड़ से अधिक) की जमीन राज्य सरकार की ओर से पीकेवी को लीज पर दी गई थी किंतु पीकेवी इसे संभाल नहीं पाई। इससे इस पूरी जमीन पर अतिक्रमण हो गया। अब सरकार द्वारा पीकेवी से भी जमीन वापस लेने की संभावना जताई जा रही है। नगर संवाददाता।

बाजार मूल्य कहीं अधिक

उल्लेखनीय है कि दशकों से अवैध कब्जे में जकड़ी पीकेवी की लगभग 3,500 करोड़ के बाजार मूल्य की यह जमीन मुक्त होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस जमीन को खाली कराने के कई प्रयास तो हुए किंतु हर समय राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते मामला अटक गया। आश्चर्यजनक यह है कि लगभग 3,500 करोड़ रुपए की इस जमीन को लेकर न तो 67 व्यावसायिक इकाइयों के खिलाफ कोई कार्रवाई हो रही है और न ही मनपा इनसे टैक्स ही वसूल कर पा रही है। फलस्वरूप सभी अतिक्रमणकारी चांदी काट रहे हैं। सम्पत्ति बाजार के जानकारों के अनुसार बजाजनगर के इस इलाके में रेडीरेकनर की दरें 8,000 से 8,500 रुपए हैं। ऐसे में 65 एकड़ की कीमत 3,500 करोड़ या उससे भी अधिक होती है। सिटी के बीच इतनी बड़ी जमीन पर अतिक्रमण होना किसी आश्चर्य से कम नहीं है।

एक ने दूसरे को किराये पर दे रखा है

जानकारी के अनुसार काफी वर्षों पूर्व से काचीपुरा के इस पीकेवी की जमीन पर अतिक्रमण हुआ है। समय के साथ यहां पर विवाह समारोह के लिए लॉन्स और नाइट लाइफ का चलन बढ़ने के बाद बड़े होटल खुल गए। जिन लोगों ने पहले अतिक्रमण कर रखा था उन्हें किसी न किसी समय जमीन हाथ से जाने की आशंका थी। यही कारण रहा कि पहले अतिक्रमणकारियों ने दूसरों को किराये पर यह अतिक्रमित जमीन दे दी। माना जा रहा है कि यहां पर कुल 67 व्यावसायिक प्रतिष्ठान है जिनमें से कुछ के पास एकड़ से भी अधिक का कब्जा है। प्रति माह का किराया ही एक से डेढ लाख रुपए का लिया जाता है। मामला पेचीदा होने के कारण राजनेताओं से संबंधित कुछ लोगों ने भी कब्जा कर लिया।

इस तरह है मामला

  • 15 जुलाई 2015 और 12 अगस्त 2015 को एमआरटीपी एक्ट की धारा 53 (1) के तहत 67 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस दिया गया। सभी को एक माह में अवैध निर्माण तोड़ने के आदेश दिए गए थे।
  • 19 जनवरी 2016 को हुई मनपा की आम सभा में तत्कालीन महापौर ने दोगुना टैक्स लगाने तथा इसकी वसूली करने के साथ रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे।
  • तत्कालीन महापौर के आदेशों के अनुसार जुलाई और अगस्त 2015 से इन प्रतिष्ठानों से दोगुना टैक्स वसूलना जरूरी है।
  • 20 जनवरी 2016 को आश्चर्यजनक ढंग से राज्य सरकार ने मनपा की एमआरटीपी एक्ट की कार्रवाई पर रोक लगा दी।
  • महापौर के आदेशों का हवाला देते हुए 6 फरवरी 2016 को दोगुना टैक्स लगाने के लिए लक्ष्मीनगर जोन ने धरमपेठ जोन को पत्र दिया था।

डूब रहा है सरकारी राजस्व

  • नागपुर मनपा में टैक्स प्रणाली के अनुसार चैप्टर 16 के तहत यदि किसी अवैध सम्पत्ति को हटाया नहीं जा रहा है जिससे मनपा का राजस्व डूब रहा है, जबकि इसी भूभाग से व्यावसायिक टैक्स के रूप में मनपा को करोड़ों का राजस्व मिल सकेगा।
  • नियमों के अनुसार यदि कहीं भी अवैध निर्माण हो तो उसे चिन्हांकित कर कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को सूचना देने की जिम्मेदारी भी मनपा के नगर रचना विभाग की है।
  • कुछ समय पहले विजय तालेवार नामक सम्पत्तिधारक द्वारा किए गए अवैध निर्माण का पूरा आकलन कर उसे नोटिस दिया गया है।
  • इसी तरह से जो भी व्यावसायिक निर्माण यहां हुआ है, उन्हें नोटिस देने की मांग उठ रही है। साथ ही उससे दोगुना टैक्स वसूलने की कार्रवाई होनी चाहिए।
  • मनपा अधिकारियों के अनुसार यदि नगर रचना विभाग सम्पत्तियों का निर्धारण कर टैक्स विभाग को इसकी सूचना भेजता है तो टैक्स विभाग इन सम्पत्तिधारकों को डिमांड भेज सकता है।
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