बुलेट ट्रेन का दौर, फिर भी सुरक्षा राम भरोसे! 40 लाख आबादी पर 12 IPS, पर पूरी रेलवे के पास सिर्फ एक महानिदेशक

Train Theft Cases India: भारतीय रेलवे में आधुनिक तकनीकों से हादसों पर लगाम लगी है, यात्री सुरक्षा पर सवाल बरकरार हैं। बेतहाशा बढ़ती चोरियों के बीच RPF में IPS अधिकारियों की तैनाती बढ़ाने की मांग तेज।
Nagpur Railway Station Theft
हादसों पर लगाम कसने 'कवच' जैसी आधुनिक तकनीक प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स- AI
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Nagpur Railway Station Theft: बुलेट की रफ्तार से बढ़ भारतीय रेलवे अब डीजल-इलेट्रिक इंजनों और आईसीएफ कोचों के दौर से निकलकर वंदे भारत इंटरसिटी और स्लीपर ट्रेनों तक पहुंच गई है।

हादसों पर लगाम कसने 'कवच' जैसी आधुनिक तकनीक के कारण दुर्घटनाओं का आंकड़ा सैकड़े से घटकर इकाई में आ गया। यानी संरक्षा (सेफ्टी) मजबूत हुई लेकिन दूसरी ओर यात्रियों और रेल संपत्ति की सुरक्षा (सिक्योरिटी) अब भी सवालों के घेरे में है।

हर दिन ट्रेनों में यात्रियों के मोबाइल, कीमती सामान समेत पार्सल आदि की चोरी, ट्रेनों पर पत्थरबाजी जैसे मामलों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। रेलवे का 'संरक्षा' की तुलना में 'सुरक्षा' पर जोर इसी बात से समझ आता है कि अब भी पूरा रेलवे सुरक्षा बल केवल एक आईपीएस अधिकारी भरोसे है। 

तो देशभर में कितने करोड़ की चोरी

रेलवे परिसरों और चलती ट्रेनों में चोरी व आपराधिक घटनाओं का ग्राफ चिंता बढ़ा रहा है। अकेले नागपुर स्टेशन पर एक महीने में मोबाइल, गहने और नकदी समेत 25 लाख रुपये से अधिक की चोरी दर्ज होती है।

जब एक स्टेशन का यह हाल है तो 18 जोन और 68 मंडलों में फैले पूरे रेल नेटवर्क में सालभर यात्रियों के कितने सौ करोड़ रुपये का सामान अपराधियों के हाथ जाता होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

40 लाख की आबादी पर 12 आईपीएस

व्यवस्था का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है। करीब 40 लाख आबादी वाले नागपुर शहर की पुलिस व्यवस्था में 12 से अधिक आईपीएस अधिकारी है। इसके उलट देशभर में प्रति दिन 25,000 से अधिक ट्रेनों और करोड़ों यात्रियों को संभालने वाले आरपीएफ का शीर्ष नेतृत्व महानिदेशक के तौर पर केवल एक आईपीएस अधिकारी के भरोसे है।

एक दौर था जब आरपीएफ में जोनल लेवल पर महानिरीक्षक (आईजी) पद पर आईपीएस अधिकारी पदस्थ किये जाते थे, ताकि रेलवे के अपराधियों से कड़ाई से निपटा जा सके। नीतिगत बदलावों के बाद यह व्यवस्था धीरे-धीरे खत्म हुई और अब केवल डीजी स्तर तक ही रह गई है।

Nagpur Railway Station Theft
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रेलवे सुरक्षा का गणित

  • महाराष्ट्र राज्य व दिल्ली-एनसीआर यात्री संपत्ति चोरी (मोबाइल, बैग, गहने) के

  • मामलों में महाराष्ट्र और दिल्ली-एनसीआर सबसे आगे हैं। महाराष्ट्र जीआरपी में दर्ज 20,000 से अधिक एफआईआर में ४० प्रतिशत मामले चोरी के हैं। पूरे देश में ये आंकड़ा भी 75 से 80 प्रतिशत का है।

  • ट्रेनों और स्टेशनों पर होने वाली हत्याओं का अनुपात भारत में दर्ज होने वाले कुल हिंसक अपराधों के 0.8 प्रतिशत से 1 प्रतिशत के आसपास रहता है।

  • नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, रेल परिसरों में वर्ष 2021 में 215, 2022 में 247 और वर्ष 2023 में 230 से 250 (अनुमानित) हत्यायें दर्ज की गई।

  • रेलवे में हर वर्ष पटरियों पर गिरने या ट्रेन की चपेट में आने से लगभग 20,000 से 22,000 आकस्मिक मौतें दर्ज होती हैं।

इस प्रकार काम आयेगा IPS का पॉवर

  • अधिकार क्षेत्र का समाधान: रेलवे में लॉ एंड ऑर्डर जीआरपी और संपत्ति सुरक्षा आरपीएफ के पास है। जोनल आईजी व डीएससी स्तर पर इंडियन पुलिस सर्विस होने से राज्य के एसपी, डीआईजी व डीजीपी के साथ बेहतर अंतर-एजेंसी समन्वय बनेगा।

  • खुफिया जानकारी की साझेदारी: राज्य पुलिस के इंटेलिजेंस नेटवर्क और एटीएस के साथ रियल-टाइम में सूचनाओं का आदान-प्रदान आसान होगा।

  • कुशल अपराध जांच : भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और फोरेंसिक जांच में प्रशिक्षित आईपीएस अफसर ट्रेनों में संगठित चोरी, जहरखुरानी, मानव तस्करी और इग्स के अंतरराज्यीय गिरोहों पर प्रभावी नकेल कस सकेंगे।

  • प्रशासनिक तटस्थता व जवाबदेही बाहरी कैडर के आईपीएस अधिकारी स्थानीय रेल मंडलों (ऑपरेटिंग/कमर्शियल विभाग) के अप्रत्यक्ष दबाव से मुक्त रहकर तटस्थता और कड़ाई से निर्णय ले सकेंगे।

  • उच्च सुरक्षा प्रोटोकॉल एंटी टेरर ऑपरेशन, वीआईपी सुरक्षा और एआई व सीसीटीवी जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल में आईपीएस अफसरों का अनभव सरक्षा को वैश्विक स्तर पर ले जाएगा।

सतीश दंडारे नवभारत।

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