

Nagpur Air Pollution Tree Cutting: नागपुर कोराडी ताप बिजलीघर और खापरखेड़ा ताप बिजलीघर से उठने वाली राख के कारण होते प्रदूषण को लेकर राजेश उर्फ धम्मेश चौहान ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। इसी तरह से शहर में चल रहे निरंतर निर्माण कार्यों के कारण हवा में उड़ती धूल, सीमेंट और सूक्ष्म कणों ने नागपुर की वायु गुणवत्ता को खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है, इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार, महानगरपालिका, प्रन्यास और अन्य संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था।
शहर में हो रहे विकास कार्यों के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और उसके बदले किए जाने वाले 'क्षतिपूरक वनीकरण' की व्यवस्था पर अदालत में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान गंभीर सवाल खड़े किए गए। न्यायालय ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि विकासकर्ता शहर के मुख्य इलाकों में पेड़ काटते हैं और खानापूर्ति के लिए शहर से दूर किसी अन्य इलाके में पौधे लगा देते हैं।
अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि सिविल लाइंस या लंदन स्ट्रीट जैसे क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं और उसके बदले नागपुर के बाहर (पारडी के बाद) या अमरावती में पौधे लगाए जा रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि 1,000 पेड़ काटकर उसके बदले दूर किसी इलाके में 10,000 या 50,000 पौधे लगा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। 'क्षतिपूरक' का असली अर्थ यह है कि जिस क्षेत्र के लोगों को पेड़ों के कटने से नुकसान हुआ है उसी क्षेत्र में पौधे लगाए जाएं, ताकि वहां के लोगों को इसका लाभमिल सके।
सुनवाई के दौरान कार्बन उत्सर्जन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया। अदालत में यह तथ्य सामने रखा गया कि यदि किसी 60 साल पुराने पेड़ को काटा जाता है तो उसकी जगह लगाए गए नए पौधों को उतना ही कार्बन सोखने के स्तर तक पहुंचने में कम से कम 10 साल का समय लगेगा। पेड़ों की कटाई से उस विशेष क्षेत्र की वायु गुणवत्ता और तापमान में बहुत बड़ा अंतर आ जाता है, इसलिए उसी इलाके में पेड़ों की संख्या को बनाए रखना बेहद जरूरी है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नागपुर, अमरावती और चंद्रपुर के लिए काम कर रही स्टीयरिंग कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर औद्योगीकरण और निर्माण कार्यों से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण से निपटने के लिए एक ठोस और समग्र योजना बनानी होगी। केवल पौधारोपण की औपचारिकता निभाने से काम नहीं चलेगा बल्कि पर्यावरण की वास्तविक रक्षा सुनिश्चित करनी होगी।