

संजीवन गोपालकृष्ण संस्था को हाई कोर्ट से राहत मिली।
राज्य सरकार ने 4 सितंबर 2026 को संस्था के स्कूलों पर प्रशासक नियुक्त करने का आदेश दिया था।
संस्था का आरोप था कि आदेश से पहले उसे सुनवाई का अवसर नहीं मिला।
अदालत ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन के आधार पर सरकारी आदेश रद्द कर दिया।
सरकार को आगे कोई आदेश पारित करने से पहले संस्था को सुनवाई का मौका देना होगा।
सुनवाई के दौरान विधायक चरण सिंह ठाकुर का 9 सितंबर का पत्र भी संबंधित पत्राचार में शामिल था।
Nagpur School Administrator Order Cancelled: नागपुर जिले के शिक्षण संस्था संजीवन गोपालकृष्ण संस्था की ओर से संचालित स्कूलों पर बिना सुनवाई का मौका दिए प्रशासक (एडमिनिस्ट्रेटर) नियुक्त करने के राज्य सरकार के आदेश को सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने रद्द कर दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए पारित यह आदेश कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है। संजीवन गोपालकृष्ण संस्था की ओर से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई।
याचिका में राज्य सरकार और अन्य के खिलाफ आरोप लगाया गया था कि 4 सितंबर 2026 को राज्य सरकार ने सहायक संचालक को संस्था द्वारा संचालित स्कूलों पर प्रशासक नियुक्त कर दिया, जबकि इससे पहले याचिकाकर्ता को सुनवाई का कोई मौका नहीं दिया गया।
कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि 28 सितंबर 2026 को नोटिस जारी करते समय ही अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील की ओर से यह दलील दर्ज की थी कि प्रशासक नियुक्त करने वाला आदेश पारित करने से पहले याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। सुनवाई के
दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पी.पी. ठाकरे ने इस तथ्य को दोहराया और कहा कि 4 सितंबर 2026 का आदेश रद्द किए जाने योग्य है क्योंकि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
अदालत ने कहा कि बहस के दौरान प्रतिवादियों ने भी यह विवादित नहीं किया कि याचिकाकर्ता को सुनवाई का मौका नहीं दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि यह पहलू मामले की जड़ से जुड़ा है क्योंकि प्रशासक की नियुक्ति याचिकाकर्ता-प्रबंधन द्वारा संचालित स्कूलों पर की गई है।
दोनों पक्षों की दलीलों के बाद अदालत ने महाराष्ट्र राज्य सरकार के 4 सितंबर 2026 को जारी आदेश को रद्द कर दिया, साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह एजीपी द्वारा अदालत के समक्ष प्रस्तुत 21 सितंबर 2026 के पत्र के अनुसार कार्य करें और कोई भी आदेश पारित करने से पहले याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर प्रदान करें।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सहायक सरकारी वकील पी.पी. पेंडके ने 21 सितंबर 2026 के पत्राचार की प्रति अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। यह पत्र मुंबई स्थित वीजेएनटी, ओबीसी और एसबीसी कल्याण विभाग से जुड़े डेस्क अधिकारी द्वारा निदेशक को भेजा गया था।
इसमें कहा गया था कि 4 सितंबर 2026 के आदेश से प्रतिवादी को अवगत कराया गया था। इसके अलावा याचिकाकर्ता-प्रबंधन के अध्यक्ष द्वारा 6 सितंबर 2026 को भेजे गए पत्र और संबंधित दस्तावेज तथा विधायक चरण सिंह ठाकुर द्वारा 9 सितंबर 2026 को जारी पत्र भी प्रतिवादी को अग्रेषित किए गए थे, पत्र में अंत में कहा गया था कि आश्रम स्कूल कोड, सर्कुलर और जीआर सहित सभी आवश्यक और लागू प्रावधानों की जांच के बाद सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाए।